उड़द की दाल प्रोटीन समेत अनेक पौष्टिक तत्‍वों का पिटारा है। इसमें विटामिन, खनिज लवण, कैल्शियम, पोटैशियम, आयरन, मैग्नेशियम, मैंगनीज आदि तत्‍व पाए जाते हैं। छिलकों वाली दाल में विटामिन व खनिज लवण की प्रचुरता होती है। कोलेस्‍ट्राल नाममात्र का होता है। औषधीय गुणों के नाते इसका अनेक हर्बल नुस्‍खों में उपयोग किया जाता है।

Hari urad dal
हरी उड़द की दाल

उड़द की दाल के गुण

1. स्वस्थ पाचन शक्ति

– गरम मसाले के साथ छिलके वाली दाल बनाई जाए तो यह स्‍वादिष्‍ट होने के साथ ही काफ़ी गुणकारी होती है। बिना छिलके वाली उड़द दाल पेट में अफारा कर देती है लेकिन छिलकायुक्‍त दाल में यह दोष नहीं होता।

– सप्‍ताह में तीन दिन बिना छिलके वाली दाल का सेवन करने से काफी लाभ मिलता है। इसमें नींबू मिलाकर खाने से इसका स्‍वाद व पाचन शक्ति बढ़ जाती है।

– जठराग्नि मंद होने की स्थिति में उड़द का पाक या लड्डू बनाकर सेवन किया जाता है। उड़द की दाल का लड्डू काफी शक्तिवर्धक होता है। उड़द की दाल पीसकर उसमें सभी प्रकार के मेवे मिलाकर लड्डू बनाएं जाते हैं। इन लड्डुओं के सेवन के लिए शीत ऋतु उत्‍तम मानी जाती है।

– अपचन या बवासीर में उड़द की दाल के सेवन से आराम मिलता है, पेट साफ होने लगता है।

2. शारीरिक वृद्धि में लाभदायक

– उड़द की छिलके वाली दाल वज़न बढ़ाने में भी कारगर है। वज़न बढ़ाने के लिए भोजन में दोनों समय उड़द की दाल का सेवन करना चाहिए।

– उड़द की दाल के सेवन से रक्‍त, मांस, मज्‍जा में वृद्धि होती है।

-उड़द दाल के लड्डू या खीर का तीन माह तक लगातार सेवन करने से रूप तो निखरता ही है, नवयौवन की भी प्राप्ति होती है।

– यदि आप फोड़े-फुंसी, घाव आदि से परेशान हैं तो उड़द दाल के आटे की तीन-चार दिन पट्टी बांधें, आराम मिलेगा।

3. दर्द निवारक औषधि

– यदि जोड़ों में दर्द है तो उड़द की छिलके वाली दाल को सूती कपड़े में लपेटकर तवा पर गरम करें और उससे जोड़ों की सेंकाई करे। शीघ्र लाभ मिलेगा।

जोड़ों के दर्द के लिए काली उड़द दाल को सरसोंं के तेल में गर्म करें और उस तेल से जोड़ों की मालिश करें, दर्द में तुरंत आराम मिलेगा। यदि शरीर का कोई अंग लगवा से प्रभावित है तो उस अंग में मालिश करने से भी लाभ मिलता है।

उड़द की छिलके वाली दाल की खीर दिल, स्मरण शक्ति बढ़ाती है तथा सिर दर्द में आराम पहुंचाती है। लगभग 50 ग्राम उड़द की दाल को रात को पानी में भिंगो दें, सुबह इसका छिलका निकालकर बारीक पीस लें। इस पिसी हुई दाल को उसी के बराबर घी में हल्‍की आंच पर भूनें, जब वह लाल हो जाए तो उतार लें और उसमें एक पाव गरम दूध व आवश्‍यकतानुसार मिश्री मिला लें। अब आपकी उड़द की खीर तैयार है। रोज़ सुबह खाली पेट इसका सेवन करें। एक सप्ताह तक नियमित सेवन करने से पुराना मूत्र रोग भी ठीक हो जाता है। यह खीर रूप भी निखारती है। इसे खाने से महिलाओं के स्‍तन में दूध भी बढ़ता है तथा गर्भाशय के विकार दूर होते हैं।

काली उड़द की दाल
काली उड़द की दाल

4. सौंदर्य वर्धक

– यदि चेहरे पर मुंहासे या दाग हैं तो उड़द की बिना छिलके की दाल को रात में दूध में भिगो दें। सुबह इसे पीसकर इसमें नींबू की कुछ बूंदें व मधु मिलाएं और उसे चेहरे पर लगाएं, एक घंटे के बाद धो लें, समस्‍या दूर होने लगेगी। मुंहासे तो दूर होंगे ही चेहरे की चमक भी बढ़ जाएगी।

– डांग के आदिवासियों के अनुसार यदि सफेद दाग (ल्युकोडर्मा) है तो उड़द दाल के आटे की लोई तैयार कर लगाने से आराम मिलता है।

5. बालों के लिए लाभकारी

– डांग (गुजरात) के आदिवासी इसे गंजेपन दूर करने की कारगर औषधि मानते हैं। दाल को उबालकर पीस लें। रात को सोते समय इसका लेप सिर पर करें तो धीरे-धीरे गंजापन दूर होने लगता है। सिर पर नए बाल आने शुरू हो जाते हैं।

6. बढ़िया रक्त संचार

– काली उड़द की दाल के सेवन से कोलेस्‍ट्रॉल तो घटता ही है, मैग्‍नीशियम व फोलेट लेवल बढ़ जाता है जो रक्‍त संचार को तेज कर देता है, इससे धमनियां ब्‍लॉक नहीं होने पातीं।

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