टमाटर में अनेक गुण हैं। यह सब्ज़ियों का स्‍वाद तो बढ़ाता ही है, उन्‍हें ख़ूबसूरत भी बना देता है। लेकिन इसकी एक और ख़ास बात है, इसमें पर्याप्‍त मात्रा में मौजूद एंटीआक्सीडेंट कई बीमारियों से हमें बचा भी लेता है। अभी हाल के जापानी शोधों से पता चला है कि टमाटर से डिप्रेशन का ख़तरा 52 प्रतिशत कम हो जाता है। इसके लिए आपको सप्ताह में 4-5 बार टमाटर अवश्य खाना चाहिए। इसलिए अवसाद से ग्रस्त लोगों को एक बड़ा लाल टमाटर दिन में एक बार रोज़ खाना चाहिए। इससे न केवल मानसिक ताज़गी मिलेगी बल्कि काम करने की एनर्जी भी देगा।

टमाटर से डिप्रेशन का उपचार
टमाटर से डिप्रेशन का उपचार

एक शोध के दौरान 70 वर्ष व उससे अधिक के उम्र के लगभग एक हजार महिला-पुरुषों के भोजन व उनके मानसिक तनाव का अध्‍ययन किया गया। निष्‍कर्ष चौंकाने वाले थे। जिन लोगों ने सप्‍ताह में दो से छह टमाटर का प्रयोग किया था, उनमें अपेक्षाकृत कम डिप्रेशन पाया गया।

टमाटर से डिप्रेशन का इलाज

टमाटर में तनाव कम करने वाला लाइकोपीन नाम का एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है, जो मस्तिषक कोशिकाओं का पोषण भी देता है। बस इतना ही लाल टमाटर दिल के दौरे और कई तरह के कैंसर से भी लड़ने की क्षमता देता है। अक्सर देखा गया है कि गंभीर बीमारियों के बाद मरीज़ अवसाद की चपेट में आ जाते हैं और ऐसे मामलों में टमाटर एक औषधि की तरह काम करता है।

आपने एक्सपर्ट्स को कई बार कहते सुना होगा कि सब्ज़ियों को पकाकर खाने से उसमें मौजूद अधिकतर पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं या उनका असर कम हो जाता है। लेकिन टमाटर में पाए जाने वाले लाइकोपीन को पकाने के बाद उसका असर बढ़ जाता है। इसलिए आपको टमाटर को पकाकर या बेक करके खाना चाहिए। साथ ही साथ आप टोमटो सॉस , जोस और टमाटर की चटनी से भी उतना ही लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

जब टमाटर के एंटी इंफ़्लेमेटरी तत्व उसके एंटीऑक्सीडेंट तत्वों से मिल जाते हैं जो मानव मस्तिषक के संज्ञानात्मक कार्यों को सुदृढ़ करते हैं जिससे मानसिक स्वास्थ्य अच्छा होता है।

सावधानी बरतें

आप टमाटर के उपरोक्त गुणों से अवश्य प्रभावित हुए होंगे लेकिन जैसे कहते हैं कि अति हर चीज़ की ख़राब होती है इसलिए टमाटर का सेवन भी हद से ज़्यादा नहीं करना चाहिए। ऐसा इसलिए कि टमाटर एसिडिक होते हैं और इनके अधिक सेवन से सीने में जलन और एसिडिटी की प्रॉब्लम हो सकती है। इसलिए टमाटर खाना चाहिए लेकिन तय मात्रा से अधिक नहीं।

आप एम० पार्ले की रिसर्च यहाँ से डाउनलोड कर सकते हैं