गिलोय, गुर्च, गुड़ुचि या अमृता एक ही औषधीय लता के नाम हैं। इसका अंग्रेज़ी नाम टीनोस्पोरा कार्डीफोलिया होता है। इसमें भरपूर औषधीय गुण विद्यमान होते हैं। हर तरह के दोषों का शमन करती है। कहा जाता है कि आत्‍मा तक को कंपा देने वाले मलेरिया बुखार को यह छिन्‍न-भिन्‍न कर देती है। यह एक प्रकार की झाड़ीदार लता है जो पहाड़, पेड़, भवन व खेतों की मेड़ों पर पाई जाती है। इसकी जड़ रस्‍सी से लेकर अंगूठे के बराबर मोटी होती है। यह हमेशा हरी रहती है। इसका पत्ता पान के पत्ते के आकार का होता है। इसे काटने पर इसका रंग सफेद से लालिमा लिए भूरे रंग का हो जाता है। यह उग्र गंध वाली होती है। नीम के पेड़ पर चढ़ी गिलोय का उपयोग ज़्यादा लाभकारी है।

गिलोय का सत्व

गिलोय की डंडी के लिसलिसे पदार्थ को सुखा देने पर गिलोय का सत्व बनता है। यह पंसारी की दुकान पर मिलता भी है। इसके अरिष्‍ट को अमृतारिष्‍ट कहते हैं, यह भी बाजार में उपलब्‍ध है। ताज़ी गिलोय न मिलने की स्थिति इनका उपयोग किया जाता है। यदि ताज़ी मिले तो वह सर्वाधिक उपयुक्‍त है। ताज़ी डंडी के छोटे-छोटे टुकड़े करके पानी में गला दें और जब गल जाए तो उन टुकड़ों को हाथ से मसलकर उसे पानी में पूरी तरह मिला दें और छान लें। उसे एक दिन के लिए ढककर रख दें और दूसरे दिन उसमें जो तलछट जमा है उसे निथार कर सुखा लें, यही गिलोय का सत्व है।

गिलोय टीनोस्पोरा कार्डीफोलिया
Tinospora Cordifolia – Giloya

क्‍यों कहते हैं अमृता

कहा जाता है कि त्रेतायुग में राम-रावण युद्ध समाप्‍त होने पर इंद्र ने अमृत की वर्षा कर वानरों को जीवन दान दिया। उस समय जहां अमृत की बूंदें गिरी वहां गुड़ुचि उत्‍पन्‍न हो गई। दूसरी कथा कहती है कि देव-दानव युद्ध में जहां-जहां अमृत की बूंदें गिरी वहां गुड़ुचि उत्‍पन्‍न हो गई। इसलिए इसे अमृता कहते हैं। यह स्‍वयं कभी मरती नहीं है और जो इसका उपयोग करता है उसे भी मरने नहीं देती।

औषधीय प्रयोग

– सर्प दंश में गिलोय का रस या क्‍वाथ सर्प दंश की जगह लगाया जाता है तथा आंखों में डाला जाता है। साथ ही आधा-आधा घंटे पर इसे पिलाया जाता है।

– गिलोय 12 मिली, शहद दो ग्राम व सेंधा नमक एक ग्राम मिलाकर इसका अंजन बनाया जाता है जिसे नियमित आंखों में लगाने से रतौंधी, आंखों से पानी गिरने सहित कई नेत्र रोगों में लाभ मिलता है।

– कामला रोगी को गीली टीनोस्पोरा कार्डीफोलिया के टुकडों की माला बनाकर पहनना चाहिए।

– गिलोच के रस में शहद मिलाकर पीने से बल में वृद्धि होती है।

– टीनोस्पोरा कार्डीफोलिया का क्‍वाथ नियिमित पीने से गठिया रोग दूर भाग जाता है।

शरीर में खून की कमी दूर करने के लिए सुबह-शाम गिलोय के रस में घी व शहद मिलाकर पीया जाता है।

– घी के साथ गिलोय का एक चम्‍मच चूर्ण के सेवन से वात संतुलित होता है और एसिडिटी, जोड़ों के दर्द, शरीर की अकड़न आदि में आराम मिलता है।

– मधु के साथ टीनोस्पोरा कार्डीफोलिया का चूर्ण खाने से कफ व सोंठ के साथ खाने से गठिया दूर हो जाती है।

– बांझपन से मुक्ति के लिए गिलोय व अश्वगंधा को दूध में पकाकर सेवन किया जाता है।

– गिलोय व गेहूं के ज्‍वारे कर रस लें और उसमें थोड़ा सा पानी डालकर मिला लें, इसका एक कप रोज खाली पेट पीने से ब्‍लड कैंसर में लाभ मिलता है।

अन्य चमत्कारिक लाभ

– कैंसर में गिलोय व गेहूं के ज्वारे के रस में तुलसी व नीम के 5-7 पत्ते पीस कर पीने से लाभ होता है। इन सभी चीजों को मिलाकर काढ़ा बनाकर पीने से भी आराम मिलता है।

– गिलोय सत्व, इलायची व वंशलोचन का मधु के साथ सेवन करने से टीबी की बीमारी में लाभ होता है।

– मिर्गी रोग से मुक्ति के लिए टीनोस्पोरा कार्डीफोलिया व पुनर्नवा का काढ़ा नियमित कुछ दिन तक पीना चाहिए।

पीलिया रोग में इसका कई तरह से इस्‍तेमाल किया जाता है। गिलोय की लता गले में लपेटने से लाभ होता है। इसके काढ़ा में मधु मिलाकर दिन में 3-4 बार पीने से लाभ होता है। इसके पत्तों को पीसकर मट्ठा के साथ पीने से भी लाभ मिलता है। पीलिया में इसकी डंडी के साथ पुनर्नवा की जड़ कूटकर काढ़ा बनाकर पीने से लाभ मिलता है, किडनी के लिए भी यह फायदेमंद है।

– मंदाग्नि दूर करने के लिए इसे सोंठ के चूर्ण के साथ लिया जाता है।

– गिलोय का क्‍वाथ पीने से मूत्रदाह दूर होता है तथा पेशाब साफ आने लगता है।

– उन्‍माद दूर करने के लिए ब्राह्मी के साथ गिलोय का क्‍वाथ पीया जाता है।

दिल की पत्ती वाला गिलोय
Heart-leaved Moonseed – Giloya

टीनोस्पोरा कार्डीफोलिया के लाभ

– ज्‍वर रोगों में खूबकला, कासनी, गिलोय, अजवायन व काला नमक का क्वाथ रामबाण है, भूख भी खुलकर लगती है।

– ज्‍वरतिसार के लिए गिलोय, अतीस, इन्द्र जौ, नागरमोथा, सोंठ व चिरायता का क्‍वाथ पीने से लाभ होता है। बारी से आने वाले ज्‍वर में इसकी जड़ का क्‍वाथ पिलाया जाता है। क्‍वाथ को ठंडा करके उसका चौथाई भाग शहद मिलाकर पीने से जीर्ण ज्‍वर ठीक होता है व उल्‍टी बंद होती है।

– श्‍वेतप्रदर में शतावर के साथ टीनोस्पोरा कार्डीफोलिया का क्‍वाथ पीने से लाभ मिलता है।

– कान का मैल निकालने के लिए गिलोय को पानी में घिस गुनगुना करके कान में डाला जाता है।

– बल वृद्धि के लिए गिलोय, गोखरु, आंवला, मिश्री समान मात्रा में मिलाकर रख लें और प्रतिदिन सुबह-शाम १-१ चम्मच दूध के साथ लें।

– टीनोस्पोरा कार्डीफोलिया व सोंठ के चूर्ण की नस्‍य देने से हिचकी बंद होती है।

– घी के साथ सेवन सभी प्रकार वात रोगों में लाभकारी है।

कब्‍ज़ के लिए इसका सेवन गुड़ के साथ करना चाहिए।

– मोटापा कम करने, चर्बी घटाने व मेदो रोग में गिलोय, हरड, नागर मोथा के चूर्ण का शहद के साथ सेवन करना चाहिए।

– गिलोय के रस में गिलोय सत्व व आमलकी रसायन को मिलाकर पीने से सभी प्रकार के प्रदर रोगों में लाभ मिलता है और शरीर कांतिवान होती है।

– ब्‍लड प्रेशर नियंत्रित करने के लिए टीनोस्पोरा कार्डीफोलिया, ब्राह्मी व शंखपुष्पी के चूर्ण को आंवला के मुरब्बे के साथ सेवन करना चाहिए।

– गिलोय व ब्राह्मी का क्वाथ पीने से दिल का अधिक धड़कना नियंत्रित होता है।

– टीनोस्पोरा कार्डीफोलिया, उश्वा, उत्रातमूल का क्वाथ उपदंश में लाभ पहुंचाता है।

– आंवला के रास में गिलोय का सत्व मिलाकर पीने से नेत्र ज्‍योति बढ़ती है तथा आंखों के रोग ठीक होते हैं।

अन्य लाभ

– बांझपन से मुक्ति के लिए गिलोय व अश्वगन्ध को दूध में पकाकर सेवन किया जाता है।

– भ्रम रोग से मुक्ति के लिए गिलोय, सोंठ, पिप्पलामूल व मुनक्का के क्वाथ का सेवन किया जाता है।

– टीनोस्पोरा कार्डीफोलिया सत्व ६ ग्राम, बड का दूध ३ ग्राम व मिश्री १२ ग्राम मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से समस्‍त प्रकार के वीर्य रोग दूर होते हैं तथा वीर्य गाढ़ा होता है।

– गिलोय का क्वाथ पीने से समस्‍त प्रकार के प्रमेह एवं मधुमेह में आराम मिलता है। खाली पेट सेवन से Aplastic Anaemia भी ठीक हो जाता है। इसकी डंडी में जो लिसलिसा पदार्थ होता है वही औषधि है, डंडी को ऐसे भी चूसा जा सकता है अथवा उसे कूटकर उसमें पानी मिलाकर छान लें और पी जाएं, इसको कैसे भी पीयें, लाभ ही पहुंचाएगी।

– इसके सेवन से अति पुराना बुखार भी चला जाता है, रक्‍त संबंधी विकार नहीं उत्‍पन्‍न होते और बुखार कभी नहीं होता है।

– इसके सेवन से दस्त, पेचिश, आंव, त्वचा व लीवर रोग, ट्यूमर, मधुमेह, ईएसआर, टीबी, पेशाब के रास्‍ते धातु निकलना व हिचकी आदि अनेकों प्रकार की बीमारियां ठीक हो जाती हैं।

– नियमित गिलोय के सेवन से असमय ही झुर्रियां नहीं पड़ती।

– शरीर की अधिक गर्मी निकालने के लिए इसे रात को कूटकर पानी में भिगो दें और सुबह मसलकर मधु या मिश्री के साथ पी लें।

– एलोवेरा व टीनोस्पोरा कार्डीफोलिया मिलाकर पीने से प्‍लेटलेट्स बढ़ जाते हैं।

Keywords – Tinospora Cordifolia, Giloe, Gudachi