लगभग सभी पैथियों में थायराइड का इलाज है। किसी भी पैथी की दवा नियमित रूप से सेवन करने पर थायराइड से मुक्ति मिल जाती है। विशेष तौर से सर्वाधिक प्रचलित पैथियों- एलोपैथ, आयुर्वेद, होम्‍योपैथ आदि सभी में दवा खाने की ज़रूरत पड़ती है, दवा के साथ परहेज़ व नियमबद्धता भी आवश्‍यक होती है। लेकिन दो विधियां ऐसी भी हैं जिनमें दवा खाने की ज़रूरत नहीं पड़ती और थायराइड ठीक हो जाता है। एक योग और दूसरी एक्‍यूप्रेशर है।

थायराइड का इलाज

थायराइड का इलाज

योग चिकित्‍सा

योग के कई आसन हैं जो थायराइड का इलाज करने और उससे मुक्ति पाने के लिए करने होते हैं। किसी भी आसन का सही प्रयोग करने के लिए किसी कुशल योगाचार्य से संपर्क करना चाहिए और उसकी देखरेख में ही योगाभ्‍यास करना चाहिए।

१. उज्जायी प्राणायाम

किसी भी आसन में जिसमें आप सुखपूर्वक बैठ सकें, बैठ जाएं। आंखें बंद कर लें और जीभ को तालू से सटा दें। अब गले से सांस इस प्रकार खींचें कि आवाज व कंपन उत्‍पन्‍न होने लगे। इस प्राणायाम को शुरू में दस बार करें और बाद में बढ़ाते हुए इसे बीस बार तक ले जाएं।

२. नाड़ीशोधन प्राणायाम

इस प्राणायाम में भी सुखपूर्वक बैठ जाएं। कमर व गर्दन सीधी हो। एक नाक से धीमी, लंबी, गहरी सांस लें और दूसरी नाक से निकाल दें। फिर उससे सांस लेकर दूसरी वाली से निकाल दें। यह क्रिया दस बार दोहराएं।

३. ध्यानयोग

किसी भी आसन में सुखपूर्वक बैठकर आंखें बंद कर लें। मन को सांसों के आने-जाने पर लगाएं। भीतर आती सांस पर सो और बाहर जाती सांस पर हम का विचार करें। यह प्रयोग पांच से दस मिनट करें।

४. ब्रह्ममुद्रा

इस प्रयोग के लिए वज्रासन ठीक रहता है क्‍योंकि इसमें कमर सीधी रहती है। कमर सीधी करके बैठें और गर्दन को 10-10 बार ऊपर-नीचे, दाएं-बाएं व उल्‍टा-सीधा घुमाएं।

५. मांजरासन

इसमें हाथ व घुटने के बल ज़मीन पर चौपाये की तरह झुक जाएं और गर्दन, कमर ऊपर-नीचे दस बार करें।

६. उष्ट्रासन

घुटनों पर खड़े होकर पीछे झुकें, एड़ियों को दोनों हाथ से पकड़कर गर्दन को पीछे झुकाएं और पेट को आगे की तरफ़ उठाएं। दस से पंद्रह मिनट तक यह प्रयोग करें। सांस लेते और छोड़ते रहें।

७. शशकासन

वज्रासन में बैठकर सामने झुक जाएं और दस-पंद्रह मिनट तक सांस लें और छोड़ें।

८. मत्स्यासन

इस आसन के लिए वज्रासन या पद्मासन ठीक होता है। किसी भी आसन में बैठकर कोहनियों की मदद से पीछे झुककर गर्दन लटकाते हुए सिर के ऊपरी हिस्से को ज़मीन से छूने का प्रयास करें। दस-पंद्रह मिनट यह आसन करते हुए श्‍वांस-प्रश्‍वास जारी रखें।

९. सर्वांगासन

पीठ के बल लेट जाएं और हाथों की मदद से पैर को ऊपर उठाते हुए शरीर को कंधों पर रोकें। 10-15 मिनट तक श्‍वांस-प्रश्‍वास करें।

१०. भुजंगासन

इस आसन में पीठ के बल लेटकर हथेलियां कंधों के नीचे लगाकर नाभि तक उठाकर 10- 15 श्वास-प्रश्वास किया जाता है।

११. धनुरासन

इस आसन में पेट के बल लेट जाएं, दोनों टखनों को पकड़कर गर्दन, सिर, छाती घुटनों को ऊपर उठाकर 10-15 श्वास-प्रश्वास करना चाहिए।

१२. शवासन

पीठ के बल लेटकर, शरीर ढीला छोड़कर आंखें बंद कर 10-15 लंबी-गहरी सांस लेकर छोड़ें, इसके बाद 30 साधारण सांस लें।

thyroid man

एक्युप्रेशर चिकित्सा

एक्युप्रेशर चिकित्सा में कुल औषधि दबाव पर निर्भर है। थायराइड के लिए थायराइड के हथेलियों व पैर के तलवों में स्थि‍त बिंदु पर पंप की तरह से दबाव देने से लाभ होता है। हथेलियों व पैरों में यह बिंदु अंगूठे के बिलकुल नीचे होता है। अंगूठे की जड़ के नीचे जो उभरा हुआ भाग है, वही थायराइड बिंदु है।

इन बिंदुओं पर थायराइड के अल्पस्राव की अवस्था में घड़ी की सुई की दिशा में अर्थात बाएं से दायें दबाव दें तथा अतिस्राव की अवस्‍था घड़ी की सुई की उलटी दिशा में यानी दायें से बायें दबाव देना चाहिए। साथ ही पियूष ग्रंथि के बिंदु पर भी दबाव देने से लाभ होता है। इन बिंदुओं पर दिन में दो बार एक से तीन मिनट तक दबाव देना चाहिए।