बदलते समय के साथ ही सेक्‍स के बारे में बातें करना या सार्वजनिक रूप से किताबें पढ़ना अब ज़्यादा सहज हो गया है। एक समय ऐसा भी था, जब सेक्‍स के बारे में सामान्‍य तौर सही सामग्री न तो उपलब्‍ध थी और न ही हितचिंतक इसके बारे में समझाते थे, इसलिए ग़लत लोगों से जानकारी मिलती थी और फुटपाथों पर बिकने वाली सेक्‍स की उथली किताबें लोगों में सेक्‍स के बारे में भ्रम पैदा कर देती थीं। अब जब इंटरनेट ने समाज को काफ़ी खुलापना प्रदान किया है। सुहागरात के बारे में बहुत सारी आवश्‍यक जानकारियाँ लेने के लिए पढ़े-लिखे युवा अब किसी के मोहताज नहीं हैं। फिर भी यह पता कर पाना कि कौन सी जानकारी अधूरी और भ्रम पैदा करने वाली है, थोड़ा मुश्किल आज भी है।

Suhagraat tips

सुहागरात – दाम्पत्य जीवन की आधारशिला

एक तरह से देखा जाए तो शादी बहुत कुछ होते हुए भी यौन जीवन की शुरुआत है। इसे क़ानूनी व सामाजिक स्‍वीकृति मिली हुई है। शादी के बाद जब सहवास की पहली रात आती है तो स्त्री व पुरुष दोनों में ग़लत जानकारियों के चलते एक भ्रम बना रहता है जो सहवास की पहली रात को बोझिल, आशंकित व दु:खपूर्ण बना देता है।

पुरुष के मन का डर

आम तौर पर लोगों की बातचीत से यह धारणा बन जाती है कि हस्‍तमैथुन से नपुंसकता आती है, शीघ्र पतन की समस्‍या उठ खड़ी होती है। इसके अलावा अनेक युवा अपने शिश्न के पतलेपन, छोटेपन को लेकर परेशान रहते हैं। साथ ही व शीघ्र पतन की आशंका से भयभीत रहते हैं।

स्त्री के मन का डर

यही स्थिति लड़की के सामने भी होती है। इसी प्रकार लड़कियाँ इस भ्रम में रहती हैं कि सुहागरात में या पहली बार सेक्‍स के दौरान बहुत ज़्यादा दर्द होता है, ख़ून गिरता है। इसे लेकर सहवास की पहली रात को दोनों असहज रहते हैं। लड़के के सामने पहली बार सेक्‍स का अनुभव और उसके बारे में ग़लत लोगों से सुनी गई बातों के आधार पर कल्‍पना एक चुनौती बनकर खड़ी हो जाती है।

जबकि सच यह है कि पहली बार सेक्‍स के दौरान हल्‍का सा दर्द होता है, उसका कारण है योनि द्वार को ढकी झिल्‍ली फटती है और थोड़ा सा ख़ून भी गिरता है। इस कौमार्य झिल्‍ली को हाईमन कहते हैं।

झिल्‍ली कौमार्यता का प्रमाण नहीं

यहाँ यह भी बताना आवश्‍यक है कि यह झिल्‍ली कौमार्यता का प्रमाण नहीं है। स्‍कूल में खेल-कूद या साइकिल चलाने के दौरान भी यह फट सकती है। इसलिए इसे कौमर्याता का प्रमाण न मानें और अपनी स्त्री साथी पर पूरा भरोसा रखें। यह झिल्‍ली फटती है तो थोड़ा सा रक्‍तस्राव होता है थोड़े समय के लिए ही होता है, यह ऐसा दर्द नहीं होता कि लड़की बेहोश जाए।

सहवास का सुख

सेक्‍स से मिलने वाला आनंद इस दर्द से कहीं बहुत ज़्यादा होता है, लेकिन यदि ख़ून गिरने व दर्द होने का भय लड़की को सता रहा है तो सेक्‍स का आनंद नहीं मिल पाता और सुहागरात ख़राब हो जाती है। क्‍योंकि सहवास की पहली रात को लड़की इस बातों से चिंतित होती है और वह अपने योनि द्वार को इतना सिकोड़ लेती है कि उसमें शिश्न आसानी से प्रवेश नहीं कर पाता, शिश्न को प्रवेश कराने के लिए पुरुष सा‍थी को अधिक ज़ोर लगाना पड़ता है जिससे योनि में घर्षण के कारण दर्द तेज़ हो सकता है। इसलिए स्त्री को चाहिए कि पहले सेक्‍स के दौरान अपने शरीर को ढीला छोड़ दे और पुरुष साथी का पूरा सहयोग करे।

Love science attraction
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प्यार चाहती है स्त्री

पुरुष साथी को भी यह पता होना चाहिए कि लड़की दूसरे घर से आई है। अभी उसका इस परिवार से कोई तालमेल नहीं है। वह संबंधों व पुरुष साथी के स्‍वभाव को लेकर आशंकित हो सकती है। इसलिए सुहागरात में जब कमरे में प्रवेश करें तो सबसे पहले उसे प्‍यार दें, सेक्‍स की प्रकिया में सीधे शामिल न हों। स्त्री सेक्‍स से ज़्यादा प्‍यार पसंद करती है। उसे जब प्‍यार से तैयार करते हैं तो वह अपना सबकुछ समर्पित करने के लिए तैयार हो जाती है। इसलिए जब भी सहवास की पहली रात को स्त्री के पास जाएं तो उसे प्‍यार से सहलाएं, उसे भरोसा दिलाएं कि आपके साथ उसे कोई ख़तरा नहीं है। आप और वह दो नहीं हैं।

फ़ोरप्ले से शुरुआत

उसके बालों को छुएं, गालों को सहलाएं, उसका सिर अपनी गोदी रखकर प्‍यार से चुंबन लें। जब उसका शरीर उत्तेजित होने लगे, वह अपनी टांगों को एक-दूसरे पर चढ़ाकर तानने लगे, सांसे तेज़ चलने लगें, छाती में उभार आने लगे, वह आपसे लिपटने को बेताब होने लगे तब उसके साथ सहवास की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए।

सरल आसनों का प्रयोग

सुहागरात को या पहली बार सहवास करते समय सामान्‍य आसनों का ही उपयोग करें, ख़ासकर उसके ऊपर सोकर, बगल में सोकर या उसे अपने ऊपर सुलाकर ही संभोग करें। कठिन आसनों से दर्द होगा और वह पहली रात ही सेक्‍स से घबरा जाएगी, उसका यह पहला अनुभव जीवन भर उसका पीछा करेगा और संभव है कि वह हमेशा सेक्‍स से भागने की कोशिश करे। इसलिए पहली रात को किसी भी प्रकार के भ्रम का त्‍याग कर एक साथ प्रेमपूर्ण ढंग से रात बितानी चाहिए। दोनों में आत्‍म विश्‍वास, शारीरिक सक्रियता, उत्‍साह आदि के साथ एक-दूसरे का सहयोग करना चाहिए।

बत्ती न बुझाएँ

सुहागरात में / जब पहली बार सेक्‍स कर रहे हों तो कमरे की लाइट बुझानी नहीं चाहिए। कमरे में अंधेरा नहीं होना चाहिए। इससे दोनों एक-दूसरे जननांगों के बारे में जान-समझ सकेंगे। क्‍योंकि इसके पूर्व दोनों ने एक-दूसरे के जननांगों के बारे में जाना-समझा नहीं है और पहली रात को जानने की यह उत्‍सुकता बनी रहती है। इस उत्‍सकुता का पूरा होना भी ज़रूरी होता है, इसलिए कमरे में अंधेरा न करें।

पुरुष पहल करे

स्त्री थोड़ी संकोची होती है, इसलिए पुरुष साथी को पहल करनी पड़ती है। स्त्री को भी चाहिए कि सुहागरात को इतना संकोच न करे कि पुरुष साथी को परेशानी होने लगे। सेक्‍स के बाद स्त्री से बिल्‍कुल अलग न हो जाएं, उससे बातें करते रहें, समय-समय पर चुंबन लेते रहे। उसे आलिंगनबद्ध करते रहे ताकि उसे लगे वह किसी अजनबी के साथ नहीं है, यह भरोसा दिलाते रहें, घर-परिवार की बातें करते रहें।

पहली रात सफल हुई तो वही दांपत्‍य जीवन की नींव है, पूरा दांपत्‍य जीवन सफल होगा। सफल दांपत्‍य जीवन के लिए थोड़ा धैर्य, थोड़ी समझदारी से काम लेना आवश्‍यक है।

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