संतुलन जीवन को सही ढंग से जीने का सबसे बेहतर तरीक़ा है। न ज़्यादा न कम, सभी चीज़ें संतुलित रहें तो व्‍यक्ति के शरीर से लेकर समाज तक स्‍वस्‍थ रहेगा। स्मरण शक्ति के साथ भी ऐसा ही है। यदि सारी चीज़ें याद रह रही हैं, कुछ भूल नहीं रहा है तो यह घातक है और सब कुछ भूलते जा रहे हैं, कुछ याद नहीं रख पा रहे हैं तो यह भी घातक है। इसलिए श्रेष्‍ठ को याद रखना व व्‍यर्थ को भूल जाना ज़रूरी होता है। यदि श्रेष्‍ठ को याद रखने में कठिनाई हो रही है, स्मरण शक्ति साथ नहीं दे रही है तो उसके लिए हम आपको कुछ उपाय बता रहे हैं, जिनका प्रयोग आपकी याद रखने की शक्ति बढ़ाएगा, साथ ही आपको मानसिक रूप से मज़बूती प्रदान करेगा।

स्मरण शक्ति बढ़ाना

स्मरण शक्ति बढ़ाने के भाव प्रयोग

– सकारात्‍मक सोच विकसित करें। चीज़ों को रटनें की कोशिश न करें बल्कि पढ़े और समझें। यदि एक बार आपने किसी चीज़ को समझ लिया तो वह आजीवन आपका साथ नहीं छोड़ेगी। हमारे यहां प्राचीन काल में श्रव्‍य परंपरा थी। इसीलिए वेदों को श्रुति कहते हैं, जो सिर्फ़ सुना जाता था। काग़ज़-कलम नहीं थे। गुरुकुल में गुरु शिष्‍यों को केवल पढ़ाते व समझाते थे, शिष्य उसे इस ढंग से समझते थे कि आजीवन उन्‍हें नहीं भूलता था। आज हमारे पास जो भी वेद, शास्‍त्र व उपनिषद हैं, वे बहुत दिनों तक एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक मौखिक हस्‍तांतरित होते रहे। बाद के दिनों में जब काग़ज़-कालम का आविष्‍कार हुआ तब उन्‍हें लिपिबद्ध किया गया।

– दिन में जो पढ़े, सुने उसे रात को एक बार मनन करें। ऐसा करने से वह चीज़ें दुबारा आपके मस्तिष्‍क में अपना स्‍थान बना लेंगी और लंबे समय तक उनकी याद रहेगी।

– विद्यार्थियों को चाहिए कि वे दिन में जो चीज़ें पढ़ें, उसे सिर्फ़ पढ़ें, याद करने की कोशिश न करें। आपने देखा होगा जब मस्तिष्‍क पर ज़ोर देखकर किसी का नाम याद करने की कोशिश करते हैं तो नाम याद नहीं आता है और ज्‍योंहि आप याद करना छोड़ देते हैं, नाम याद आ जाता है। इसका मतलब जब आप मस्तिष्‍क पर ज़्यादा ज़ोर दे रहे थे तो स्मरण शक्ति ने आपका साथ छोड़ दिया, ज्‍योंहि आपने मस्तिष्‍क को ढीला छोड़ दिया, नाम याद आ गया। इसलिए पढ़ने में मस्तिष्‍क पर ज़ोर न दें, केवल पढ़ते चले जाएं। जो दिन में पढ़े उसे रात को बिना किताब देखे एक बार मन में ही दुहराएं और कापी पर लिखें। इससे वह चीज़ हमेशा के लिए मस्तिष्‍क में संग्रहित हो जाएगी।

– जब हम फ़िल्‍म देखते हैं या कहानी पढ़ते हैं तो चीज़ें याद हो जाती हैं। इसका सिर्फ़ इतना ही कारण है कि हम उसे याद नहीं कर रहे थे, केवल देख रहे थे। दूसरी तरफ़ जब हम किसी परीक्षा की तैयारी करते वक़्त कोर्स की किताबें पढ़ते हैं तो जल्‍दी याद नहीं होता, इसका कारण इतना है कि हम उसे याद करने की कोशिश कर रहे थे।

– दिन भर मैंने क्‍या किया, किससे मिले और क्‍या बात की, यदि रात को सोते समय इसका एक बार आंकलन कर लें तो वह चीज़ हमेशा के लिए याद हो जाएगी। कभी भूलेगी नहीं।

– काग़ज़, गत्‍ता या मोटे कपड़े की पिरामिड के आकार में टोपी बना लें और सिर पर रखकर उत्‍तर दिशा की ओर मुंह करके पढ़ने से जल्‍दी याद होता है।

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यौगिक प्रयोग

– स्मरण शक्ति बढ़ाने की एक सम्‍मोहन की विधि है। रात को शवासन में लेट जाएं, हाथ-पैरों को व पूरे शरीर को ढीला होने का निर्देश दें। ऐसा तीन मिनट तक करें। अगले तीन मिनट तक सांसों को शिथिल होने का निर्देश दें और उसके अगले तीन मिनट तक मन को शांत होने का निर्देश दें। अब आपका शरीर, सांस व मन तीनों शिथिल हो गया। ऐसे में आप अपने आप को निर्देश दें कि दिन भर मैंने जो पढ़ा-लिखा वह जीवन भर याद रहे। ऐसा करने से वह चीज़ें आपके जीवन का हिस्‍सा हो जाएंगी और ध्‍यान का भी स्‍वाद मिलेगा।

– स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए ज्ञान मुद्रा का अभ्यास कारगर है। सुबह उठकर पद्यासन या सुखासन में रीढ़ सीधी कर बैठ जाएं। तर्जनी अंगुली के नाखून को अंगूठे के नीचे रखकर शेष अंगुलियां सीधी फैला दें। इसे ज्ञान मुद्रा कहते हैं। आंखें बंद कर पंद्रह मिनट के लिए बैठ जाएं, धीरे-धीरे इस अवधि को 45 मिनट तक ले जाएं। इससे मानसिक तनाव व विकृतियां दूर होती हैं, स्‍नायु व ज्ञान तंतु मज़बूत होते हैं। मन शांत हो जाता है। पागलपन, चिड़चिड़ापन, क्रोध, भय, अनिश्चितता, व्‍याकुलता, धबराहट व आलस्‍य जैसे दुश्‍मन विदा हो जाते हैं। चेहरे पर प्रसन्नता बनी रहती है।

– स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए पद्मासन या सुखासन में रीढ़ सीधी कर बैठ जाएं और आज्ञाचक्र पर ध्‍यान करें। आज्ञा चक्र दोनों भौंहों के बीच ललाट पर नासिका के ठीक ऊपर होता है। आज्ञा चक्र के सक्रिय हो जाने से व्‍यक्ति के लिए कुछ भी असंभव नहीं होता, उसके सामने भूत, वर्तमान व भविष्‍य तीनों उपस्थित हो जाते हैं।

औषधीय प्रयोग

– एक बादाम कूंचकर देशी गाय के घी में मिलाकर गरम कर लें। उसे छानकर रख ड्रापर में रख लें। आपकी औषधि तैयार है। रात को सोते समय थोड़ी देर के लिए ड्रापर को गरम पानी में डाल दें, उसके बाद दोनों नाक में दो-दो बूंद डालें।

– इस औषधि का प्रयोग नाभि पर भी किया जाता है। इसे नाभि पर दो-तीन बूंद डालें और पांच-पांच बार क्लॉकवाइज़ व एंटी क्लॉकवाइज़ घुमाएं। इसके बाद नाभि पर एक गीला कपड़ा और उसके ऊपर एक सूखा कपड़ा रखें। रोज़ाना इसे 10-15 मिनट करना चाहिए।

– रात को सोने के पहले इस औषधि को दोनों पैरों के तलवे में मलें। इससे नींद भी अच्‍छी आएगी और मन शांत व प्रसन्‍न रहेगा।

– गाय के दूध में चार-पांच बादाम पीसकर मिला लें और आवश्‍यकानुसार मिश्री डालकर पियें। इससे मन शांत होगा।

– स्मरण शक्ति व मानसिक शक्ति बढ़ाने के लिए ब्राह्मी, शंखपुष्पी, वच, असगंध, जटामांसी, तुलसी बराबर-बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें और नियमित दूध के साथ सेवन करें।

– पंचगव्‍य (देशी गाय का घी, दूध, दही, गोमूत्र व गोबर) बराबर-बराबर मात्रा में लेकर गरम करें। जब केवल घी शेष रह जाए तो उसे उतार कर ठंडा कर लें और छानकर रख लें। रोज़ रात को सोते समय देशी गाय के गरम दूध में इसे 2 चम्‍मच मिलाकर पियें। यदि इसमें मिश्री, केसर, इलायची, हल्दी, जायफल, मिलाकर पिएं तो ज़्यादा लाभकारी है। इससे बल, बुद्धि, साहस, पराक्रम, उमंग व उत्साह में वृद्धि होती है।

कुछ अन्‍य प्रयोग

-कानों के जिस भाग में कुंडल पहना जाता है, उसे हाथ से पकड़कर दबाएं और नीचे की ओर खींचें। इसके बाद कान को ऊपर से नीचे तक मरोड़ें।

-सिर के नीचे पीछे की तरफ़ मेडुला नाड़ी होती है, जहां थोड़ा सा गड्ढा होता है, वहां 3-4 मिनट तक अंगुली या अंगूठे से मलें, इससे स्मरण शक्ति बढ़ेगी।

इनसे बचें

नकारात्‍मक विचारों को मन में न आने दें। बिना कारण अंगुलियों की गांठों को न फोड़े, बिना मतलब पंजा न लड़ाएं और अंगुलियों से बिना मतलब न घास नोंचे न ज़मीन पर रेखा बनाएं, इससे स्नायु तंतुओं में विकार उत्‍पन्‍न होता है और प्राण शक्ति कमज़ोर होती है। साथ ही स्मरण शक्ति भी कमज़ोर हो जाती है।

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