स्लिप डिस्क (Slipped Disk) के बारे में आपने सुना होगा, भारत में स्लिप डिस्‍क से लगभग 20 प्रतिशत से ज़्यादा लोग परेशान हैं। हालांकि यह कोई बीमारी नहीं हैं, इसमें डिस्‍क स्लिप होने जैसा कुछ नहीं होता बल्कि डिस्‍क रीढ़ की हड्डी से थोड़ी बाहर की ओर आ जाती है। उसके बाहरी भाग पर एक मज़बूत झिल्‍ली होती है जिसके अंदर जैलीनुमा तरल पदार्थ होता है। डिस्क में उपस्थित जैली या कुशन जैसा हिस्सा कनेक्टिव टिश्यूज के सर्कल से बाहर की ओर निकल आता है और रीढ़ की हड्डी पर दबाव बनाने लगता है।

उम्र बढ़ने के साथ ही जैलीनुमा पदार्थ सूखने लगता है और कभी-कभी झिल्‍ली फट जाती है जिससे तरल पदार्थ बाहर आकर नसों पर दबाव बनाने लगता है। इससे पैरों के सुन्‍न होने या दर्द होने की समस्‍या सामने आने लगती है। यह समस्‍या 30 से 50 वर्ष की आयु में आमतौर पर देखने को मिलती है। 40 से 60 वर्ष की आयु में गर्दन के पास सर्वाइकल वर्टिब्रा में दिक्‍कत देखने को आती है। लेकिन इस समय तो 20-25 वर्ष के युवाओं में भी इस तरह की समस्‍या देखने को मिल रही है। इसका किसी योग्‍य चिकित्‍सक से इलाज कराना चाहिए और उन्‍हीं की सलाह पर जांच करानी चाहिए।

स्लिप डिस्क उपचार

स्लिप डिस्क का कारण

झुककर या लेटकर पढ़ना-लिखना या काम करना, कंप्‍यूटर के आगे ज़्यादा झुककर बैठना, ग़लत उठने-बैठने की वजह से भी यह दर्द हो सकता है। ज़्यादा देर आराम करना, पैदल चलने से परहेज़ करना, व्‍यायाम न करना, अत्‍यधिक शारीरिक श्रम, गिरने, फिसलने, चोट लगने व देर तक गाड़ी चलाने से भी यह समस्‍या उत्‍पन्‍न हो सकती है।

स्लिप डिस्क के लक्षण

कमर दर्द, एड़ी या पैर की अंगुलियों में सुन्नपन, पैरों में दर्द, पैर के अंगूठे या पंजे में कमज़ोरी, हिप या थाईज के आसपास सुन्न होने की अनुभूति, यूरिन-स्टूल पास करने में परेशानी, रीढ़ के निचले हिस्से में असहनीय दर्द, चलने-फिरने, काम करने, झुकने में दर्द, खांसने पर करंट लगने जैसा अनुभव आदि इसके लक्षण हैं।

Harinated slip disk

स्लिप डिस्क का उपचार

– इस रोग में दो-तीन सप्‍ताह में फिजियोथेरेपी व आराम करने से राहत मिल जाती है। चिकित्‍सक की सलाह पर दर्द निवारक दवाएं भी ले सकते हैं।

– दर्द कम होने के बाद ही फिजियोथेरेपी कराएं।

– फिजियोथेरेपी व दवाओं से आराम नहीं पहुंचता है तो इसकी सर्जरी करानी पड़ती है।

– उठने, चलने, बैठने में असहनीय पीड़ा हो तो तत्‍काल मरीज का अस्‍पताल में भर्ती करा देना चाहिए।

ज़रूरी सलाह

– आमतौर पर स्लिप डिस्‍क की सर्जरी सफल रहती है, कभी-कभी सफल नहीं होती है।

– सर्जरी के बाद कम से कम 15-20 दिन आराम करना चाहिए। सर्जरी के बाद की जाने वाली एक्‍सरसाइज़ योग्‍य फिजियोथेरेपिस्ट से ही कराएं।

– सर्जरी के बाद हार्ड बेड पर सोना चाहिए, झुककर कोई काम न करें, लंबे समय तक एक ही पोज़ीशन में न बैठें, झटके न उठें और वज़न नियंत्रित रखें।

थोड़ा जीवन शैली बदलें

– रोज़ तीन से छह किलोमीटर पैदल चलें।

– देर तक कुर्सी पर झुककर न बैठें।

– सामान्‍य शारीरिक श्रम दिनचर्या में शामिल करें।

– लंबे समय तक एक ही पोजीशन में न तो बैठें और न खड़े रहें।

– जल्‍दीबाजी में कोई भारी सामान न उठाएं।

– हाई हील्स व फ्लैट चप्पल पहनने से बचें।

– आराम से सीढ़ियों पर चढ़ें-उतरें।

– कुर्सी पर जब बैठें तो एक पैर दूसरे पर न चढ़ाएं।

– झुककर कोई सामान न उठाएं।

– अत्‍यधिक मुलायम गद्दों पर सोने से परहेज़ करें।

– ज़्यादा ऊंची तकिया न लगाएं।

– लंबी ड्राइविंग में गर्दन व पीठ के लिए कुशन का इस्‍तेमाल करें।

– इधर-उधर देखने के लिए गर्दन को ज़्यादा मोड़ने की बजाय शरीर को घुमा लें।

– पेट के बल या उल्‍टे होकर सोने से परहेज़ करें।

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