अलसी यानि तीसी अपने आपमें स्‍वयं एक बड़ी औषधि है। वैवाहिक जीवन के लिए शीघ्र पतन एक अभिशाप है। यह शीघ्र पतन को दूर कर जीवन साथी को संभोग में पूरी संतुष्टि प्रदान करने में सक्षम बनाती है। कामेच्‍छा को बढ़ाने में सहायक है तथा गर्भपात व माँ के स्‍तन में दूध की कमी की रामबाण औषधि है। इसके साथ ही यह अनेक समस्‍याओं की कुंजी है अलसी । सेक्‍स संबंधी समस्‍याओं के निदान के लिए अलसी अन्‍य सभी औषधियों से अधिक गुणकारी व सुरक्षित है। प्रतिदिन इसका सेवन 30 से 60 ग्राम तक किया जा सकता है। गर्मी में इसकी मात्रा आधी कर देनी चाहिए। नियमित सेवन करने के लिए 30 ग्राम का चयन अधिक उपयोगी है।

अलसी शीघ्र पतन को दूर करने के अलावा शरीर को ऊर्जावान व मांसल बनाती है। शरीर में ऊर्जा का प्रवाह अधिक होने से हमेशा फुर्ती बनी रहती है और थकान नहीं लगती है। इसके नियमित सेवन से मन शां‍त, सकारात्‍मक व प्रसन्‍न रहता है। अलसी त्‍वचा के सूखेपन को दूर कर उसे कोमल व आकर्षक बनाती है। त्‍वचा बेदाग व गोरी हो जाती है। साथ ही यह बालों को काला, घना, मज़बूत व रेशमी बनाने में सहायक है। बालों में चमक आ जाती है।

शीघ्र पतन को दूर करे अलसी

शीघ्र पतन को दूर करे अलसी

शीघ्र पतन को दूर करने के लिए अलसी में मौजूद ओमेगा- 3 फैट, जिंक व मैग्‍नीशियम काफ़ी सहायक होते हैं। इनकी वजह से शरीर में पर्याप्‍त मात्रा में टेस्‍टोस्टिरोन हार्मोन व फेरामोन (आकर्षण के हार्मोन) स्रवित होकर सक्रिय होने लगते हैं। टेस्‍टोस्टिरोन से कामेच्‍छा में वृद्धि होती है और जीवनसाथी के प्रति आकर्षण व अनुराग बढ़ने लगता है। साथ ही अलसी में मौजूद ओमेगा-3 फ़ैट, आर्जिनीन व लिगनेन गुप्‍तांगों में रक्‍त प्रवाह को बढ़ाता है जिससे शीघ्र पतन दूर होकर स्‍तंभन शक्तिशाली होता है। संभोग का समय लंबा खिंचता है जिससे जीवन साथी को पूरी संतुष्टि प्राप्‍त होती है। इससे उत्‍कृष्‍ट व सक्रिय शुक्राणुओं का निर्माण होता है। साथ ही यह शिथिल पड़ी नाड़ियों में जान डाल देती है। अलसी में मौजूद लेसीथिन, विटामिन बी ग्रुप, बीटा केरोटीन, फ़ोलेट, कॉपर आदि नाड़ियों को स्‍वस्‍थ रहने में मदद करते हैं। आयुर्वेदाचार्यों की मानें तो अलसी लिंग की लंबाई व मोटाई बढ़ाने में भी मदद करती है।

अलसी से अन्य लाभ

  1. गले एवं छाती के दर्द, सूजन तथा निमोनिया व पसलियों के दर्द में अलसी की पुल्टिस आराम पहुंचाती है।
  2. चोट, मोच, जोड़ों की सूजन, गांठ, गठिया या फोड़े पर लगाने से लाभ मिलता है।
  3. यह श्वास नलियों और फेफड़ों में जमे कफ को निकाल कर दमा और खांसी में राहत देती है।
  4. पेशाब की रुकावट के लिए यह कारगर औषधि है। पथरी व मूत्र शर्करा में भी इससे लाभ पहुंचता है।
  5. पुराना जुकाम हो या नाक में कफ जमा हो तो अलसी के तेल का धुआं सूंघें। यह धुआं हिस्टीरिया रोग में भी लाभ पहुंचाता है।
  6. मलाशय की शुद्धि के लिए अलसी का काढ़ा अत्‍यंत लाभदायक है। पेट के रोगों में अलसी तेल इस्‍तेमाल किया जाता है।
  7. आग से जलकर बने घाव पर अलसी के तेल व चूने के पानी का इमल्‍सन लगाया जाता है। इससे घाव जल्‍दी भरता है।
  8. अलसी का फांट पीने से पथरी, सुजाक व पेशाब की जलन में लाभ मिलता है।
  9. स्नायु रोगों, कमर व घुटनों के दर्द, बवासीर, भगंदर आदि में अलसी तेल पंद्रह मिली सुबह-शाम पीने से लाभ मिलता है।

अलसी का सेवन करने की विधि

  1. अलसी को बारीक पीसकर आटें में मिला लें और रोटी या पराठा बनाकर खाएं। साथ ही विभिन्‍न खाद्य पदार्थों में मिलाकर तथा विभिन्‍न खाद्य पदार्थ बनाकर इसका सेवन किया जा सकता है। सुगर के मरीजों को रोज सुबह-शाम अलसी की रोटी खानी चाहिए।
  2. अलसी को कड़ाही या तवा पर बिना तेल डालें भून लें और मिक्‍सी में थोड़ा दरदरा पीस लें। इसे भोजन के साथ या भोजन के बाद भी खाया जा सकता है।

जिन्हें भी ऐसी कोई समस्या अलसी उनके किए अवश्य लाभकारी होगी।