फोड़ा-फुंसी और उनके फूटने से घाव होना आम समस्या है। फोड़े-फुंसी होने पर त्वचा पर एक लाल गांठ पड़ जाती है। जैसे जैसे यह गांठ बड़ी होकर फोड़ा बनती है, पहले व्यक्ति को उस जगह खुजली होती है। फिर लाल गांठ में पस बन जाने से इसका बीच का भाग सफेद रंग का दिखने का लगता है। जिसे छूने से इसमें दर्द भी होता है। फोड़े के फूटने के बाद इसमें घाव बन सकता है। जिसकी सही देखभाल करना बेहद जरूरी है।

फोड़े-फुंसी होने के कारण

– गंदगी और प्रदूषण से त्वचा में संक्रमण
– शारीरिक साफ-सफाई का ध्यान न देना
– शरीर का खून दूषित हो जाने से
– डायबिटीज़ या किसी कारण त्वचा की स्किन फट जाना

फोड़े-फुंसी का उपचार
Phode phunsi ka upchar

फोड़े-फुंसी का उपचार

– फोड़े-फुंसी से परेशान हैं तो पीपल के पत्ते पर घी लगाकर थोड़ा गरम करके उसे बांध दें। फोड़ा बहुत जल्‍दी पककर फूट जाएगा तथा ठीक हो जाएगा।

– धतूर का पत्ता गर्म करके बांधने से फोड़ा या तो बैठ जाता है या पककर फूट जाता है और जल्‍दी ठीक हो जाता है।

– एक पूरा अन्नानास 15-20 दिन नियमित खाने से शरीर और फोड़े-फुंसी की सूजन खत्‍म हो जाती है।

– अरहर की दाल पानी के साथ पीसकर उसमें थोड़ा नमक मिलाकर गर्म करके बांध देने से फोड़ा जल्‍दी पक जाता है।

– प्‍याज भूनकर उसकी तीन परत लें और उसपर हल्‍दी का चूर्ण लगाकर गर्म कर दें। उसे पीपल के पत्ते पर रखकर बांध देने से दो दिन में ही या तो फोड़ा बैठ जाएगा या फूटकर ठीक हो जाएगा।

– नारियल की सूखी गरी कूट लें और उसमें चौथाई भाग हल्‍दी चूर्ण मिलाकर पोटली बांध देने से फोड़ा ठीक हो जाता है।

– गिलोय का काढ़ा पीने से फोड़े-फुंसी व अनेक प्रकार के चर्म रोग दूर हो जाते हैं। गिलोय का काढ़ा बनाकर पिलाने से फोड़े-फुंसी तथा अनेक प्रकार के चर्मरोग दूर हो जाते हैं।

– पसयुक्‍त फोड़े-फुंसी के लिए नेट्रम सल्‍फ्यूरिकम 30 दिन में दो बार तथा दुर्गंधयुक्‍त फोड़े-फुंसी व घाव के लिए काली पफॉस्फोरिकम-200 की रोज एक खुराक ली जा सकती है।

घाव की सूजन का उपचार

– एरंड के पत्ते पर तेल लगाकर गर्म करके बांधने से घाव की सूजन खत्‍म हो जाती है।

– गाजर का रस फोड़े-फुंसी की रोकथाम का कारगर उपाय है। पुदीना का रस मिलाकर नाक, कान या घावों पर टपका देने से कीड़े नष्‍ट हो जाते हैं।

– नीम के पंद्रह ग्राम हरे पत्ते लें और उसे बारीक पीसकर तेल में अच्‍छी तरह फेंट लें। इसमें छह ग्राम कपूर पीसकर मिला दें। इसे फोड़ा, फुंसी व घावों पर लगाने से जल्‍दी लाभ मिलता है।

– तंबाकू के हरे पत्तों का रस निकालें और रस के बराबर उसमें तिल का तेल मिलाकर आग पर पकाएं। जब सिर्फ तेल ही बचे तो उसे आग से उतारकर ठंडा कर लें। इस तेल को लगाने से घाव जल्‍दी भर जाता है।

– साधारण घाव है और खून बह रहा है तो साफ सूती कपड़े को जलाकर उसकी राख बांध देनी चाहिए। इससे खून बहना बंद हो जाता है और घाव जल्‍दी ठीक हो जाता है।

Pimples ka ayurvedic treatment
Pimples ka ayurvedic treatment

सूजन कम करने के उपाय

– सौ ग्राम पानी में छह ग्राम पुदीना का रस मिलाकर लगाने से पिंडलियों की सूजन कम होने लगती है।

– अमतास के गूदे में हरी मकोय का अर्क पीसकर लगाने से सूजन कम हो जाती है।

– ग्‍वारपाठे के टुकड़े पर हल्‍दी लगाकर बांधने से भी सूजन में आराम मिलता है।

गठिया के दर्द से परेशान हैं तो आक के पत्ते पर तिल का तेल लगाकर गर्म कर लें और दर्द वाले जोड़ पर बांध दें। कुछ ही दिन में दर्द व सूजन गायब हो जाएगा।

– अंडकोष में सूजन है तो तंबाकू के हरे पत्ते को आग पर गर्म करके बांध देने से सूजन चली जाती है। हरा पत्ता न मिले तो सूखे पत्ते का भी उपयोग कर सकते हैं लेकिन उसपर पानी छिड़ककर मुलायम कर लें और तिल का तेल लगाकर आग पर गर्म करके बांधें।

– भिलावे के काले रस के लग जाने से हुई सूजन दूर करने के लिए तिल का तेल लगाना चाहिए। भिलावे का काला रस शरीर के जिस स्थान पर लग जाता है, वह भाग सूज जाता है। उस सूजन को दूर करने के लिए तिल का तेल लगाना चाहिए। पूरी शरीर सूज गई है तो तिल के तेल से मालिश करने के अलावा 40-50 ग्राम तेल पी लेने से शीघ्र लाभ होता है। अमरबेल को उबालकर सेंकाई करने व सूजन वाले स्‍थान पर बांध देने से भी सूजन चली जाती है।

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