संगत के साथ व्‍यसन भी आते हैं। बहुत से ऐसे लोग हैं जिन्‍होंने संगत में आकर मादक द्रव्‍यों या किसी भी प्रकार के नशे का उपयोग शुरू किया जो आज उनके जी का जंजाल बन गया है। वे छोड़ना चाहते हैं लेकिन लत ऐसी है कि छूटती नहीं। मजबूरी में खाते या पीते चले जा रहे हैं। इससे पैसा तो बर्बाद होता ही है, शरीर को भी नुक़सान होता है। जो लोग नशे की लत छोड़ना चाहते हैं, उनके लिए आज मैं एक कारगर उपाय बताने जा रहा हूं, यह उपाय उन्‍हीं के लिए है जो नशा छोड़ने के लिए संकल्पित हैं, जो छोड़ना ही नहीं चाहते, उनके लिए कोई दवा कारगर नहीं है। जो उपाय हम बताने जा रहे हैं वह केवल मादक द्रव्‍यों से ही मुक्ति नहीं दिलाएगी बल्कि किसी भी प्रकार की लत से मुक्‍त करने में मदद करेगी।

यदि आप नशे की लत छोड़ने के लिए संकल्पित हो चुके हैं तो दुनिया की कोई ताक़त आपको रोक नहीं सकती। नशा मुक्ति में आपका संकल्‍प ही अधिक काम करेगा और बचा हुआ काम यह औषधि कर देगी। कुछ ही दिन में आपको पता चलेगा कि नशा आपसे बहुत दूर हो गया और आप स्‍वयं दूसरों को सलाह देते फिरेंगे कि यह उपाय करने से नशे से मुक्ति मिलती है। आप अपना नशा छोड़ने के बाद कई लोगों के जीवन से नशे का अंधेरा मिटा देंगे। इस प्रयोग से बीड़ी, सिगरेड, चबाने वाली तंबाकू, अफीम, चाय, कॉफी व गांजा आदि के नशे काफूर हो जाएंगे।

पारस पीपल Paras Pipal

नशे की लत छुटाने के लिए पारस पीपल

पारस पीपल की छाल ले आएं। यह एक बड़ा पेड़ होता है। इसके पत्‍ते पीपल के पत्‍तों की भांति होते हैं तथा भिंडी के फूलों की तरह इसमें फूल खिलते हैं। कुछ दिन बाद ये फूल गाढ़े गुलाबी होकर मुर्झा जाते हैं। मराठी में इस वृक्ष को पारोसा पिंपल कहा जाता है। जब वृक्ष पुराना होता है तो इसकी छाल अपने आप वृक्ष से अलग हो जाती है। यही छाल ले आइए। इस छाल को ख़ूब बारीक़ पीस लें ताकि मैदा की तरह हो जाए। अब इसे शीशी में भर लें। इसमें से 12 ग्राम चूर्ण लेकर 250 मिलीलीटर पानी में हल्‍की आंच पर पकाएं, जैसे चाय बनाते हैं। जब पानी 100 मिलीलीटर रह जाए तो छानकर चाय की तरह चुस्कियां लेकर इसे पिएं। पंद्रह दिन तक इसका सुबह-शाम नियमित सेवन मादक द्रव्‍यों से मुक्‍त करा देगा। लत छूट जाएगी, तलब ही नहीं लगेगी।

एक बार व्‍यसन से मुक्‍त हो जाने पर दुबारा नशे की गिरफ़्त में नहीं जाना चाहिए। यह आपके आत्‍मविश्‍वास व संकल्‍प पर निर्भर है। जब भी आपको कोई कहे कि अरे एक बार खा लेने से क्‍या होगा, ले लो तो आप अपने अतीत पर एक नज़र ज़रूर डालना कि कितनी परेशानियों के बाद इससे निजात मिली है। इस प्रयोग से जब व्‍यसन छूट जाए तो दो माह तक बैद्यनाथ कंपनी का दिमाग दोष हरी नामक दवा का सेवन कर लेना चाहिए। यदि आपके आसपास पारस पीपल न मिले तो इसे महाराष्‍ट्र में रहने वाले किसी मित्र से मंगवा सकते हैं।

पारस पीपल के अन्य नाम

हिंदी – पारस पीपल, गजदंड, सहोरा, गजहुंड, फारसझाड़, परास पीपल
संस्कृत – पारीष, कपिचूत, कन्दराल, गर्दभांड, कमंडलु, नन्दी, सुपार्श्वक, कुबेराक्ष
मराठी – पारोसा पिंपल, अष्ट, मणेर, कडे़ पाईर
गुजराती – पारस पीपलो, बेड़ी
बंगाली – पलास, पीपुल, गजशुण्डी
अंग्रेजी – पार्शियाट्री
लैटिन – थेसपेसिया, पापुलनी

अन्‍य लाभ स्वास्थ्य लाभ

– संग्रहणी, बवासीर, सुजाक व पेशाब की जलन में चीनी के साथ पारस पीपल के दो-तीन बीज खाने से लाभ होता है।

– इसके पके फलों को राख में मिलाकर लगाने और इसका काढ़ा बनाकर पीने से दाद, खाज, खुजली में लाभ होता है।

– पारस पीपल के पत्‍तों को पीसकर हल्‍का गर्म कर जोड़ों पर बांधने से जोड़ों के दर्द व सूजन चली जाती है।

– दाद पर पारस पीपल के फूलों का रस लगाने से दाद ख़त्‍म हो जाता है।

– नारू रोग द्वारा पैदा हुए छाले व घाव पर इसके पत्तों पर तेल चुपड़ कर गरम करके बांधने से शीघ्र लाभ होता है।