नॉन स्टिक बर्तन का प्रयोग करने से बचने की ज़रूरत है। इनमें टेफ़्लॉन कोटिंग होती है। भोजन पकाने में तेल तो कम लगता है, इन्‍हें मांजने में श्रम भी कम लगता है लेकिन वहीं से कई तरह की बीमारियों की शुरुआत हो जाती है। ये बर्तन हमारी तकलीफ़ तो बढ़ाते ही है, हमारे पर्यावरण को संतुलित रखने वाली पक्षियों की भी जान ले लेते हैं।

टेफ़्लॉन केमिकल को बीसवीं शताब्‍दी की सबसे महत्‍वपूर्ण खोजों में से एक माना जाता है। स्‍पेस सुइट व पाइप में इसका प्रयोग ऊर्जा रोधी के रूप में होने लगा है। इसका स्‍वास्‍थ्‍य पर बहुत बुरा असर डालता है। जन्‍मजात बीमारियों, सांस की तकलीफ़ जैसी कई बीमारियों के रूप में इसके हानिकारक असर देखे जा सकते हैं। जब नॉन स्टिक बर्तनों को काफ़ी गरम किया जाता है तो पक्षियों के लिए ख़तरा बढ़ जाता है। कुछ दिनों पहले एक प्रयोग में टेफ़्लॉन कोटेड अर्थात नॉन स्टिक बर्तनों को पहले से गरम किया गया और तेज़ आंच पर खाना पकाया गया, सिर्फ़ पंद्रह मिनट के इस प्रयोग 14 पक्षियों की जान चली गई। ये बर्तन सिर्फ़ 5 मिनट में 721 डिग्री तापमान तक गर्म हो जाते हैं। इन्‍हें गरम करने पर छह तरह की गैस वातावरण में फैलती है। इनमें से 2 ऐसी गैसें होती हैं जो कैंसर का कारक बनती हैं। जानकारों के मुताबिक टेफ़्लॉन को अधिक गर्म करने से पक्षियों में टेफ़्लॉन टोक्सिकोसिस व मनुष्‍यों में पॉलिमर फ़्यूम फ़ीवर की आशंका बहुत बढ़ जाती है। टेफ़्लॉन केमिकल यदि शरीर में गया तो कई तरह की बीमारियों को जन्‍म देता है।

नॉन स्टिक बर्तन के नुकसान

नॉन स्टिक बर्तन यानि स्वास्सस्स के दुष्‍प्रभाव

1. पुरुष इनफ़र्टिलिटी

एक डच अध्‍ययन पर गौर करें तो मनुष्‍य के शरीर में लंबे समय तक टेफलोन जाने से पुरुष इनफ़र्टिलिटी का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही इससे संबंधित कई बीमारियों की आशंका बलवती हो जाती है।

2. थायरॉयड

एक अमेरिकन एजेंसी द्वारा किए गए शोध में यह तथ्‍य सामने आया कि टेफ़्लॉन की मात्रा शरीर में यदि लगातार जा रही है तो थायरॉयड ग्रंथि को प्रभावित करती है।

3. बच्‍चे को जन्‍म देने की क्षमता में कमी

कैलिफ़ोर्निया में हुए एक शोध में यह बात सामने आई कि जिन महिलाओं के शरीर में टेफ़्लॉन की मात्रा सामान्य से अधिक पाई गई उन्हें बच्चोंं को जन्म देते समय अनेक प्रकार की समस्‍याओं का सामना करना पड़ा। साथ ही उनकी बच्चों को जन्म देने की क्षमता अपेक्षाकृत कम मिली।

4. कैंसर या ब्रेन ट्यूमर की आशंका

चूहों पर किए गए एक प्रयोग में जब चूहों को टेफ़्लॉन (पी ऍफ़ ओ) के इंजेक्शन लगाए गए तो उनमे ब्रेन ट्यूमर विकसित हो गया और कैंसर के लक्षण दिखाई देने लगे। यह केमिकल जब एक बार शरीर के अन्दर चला जाता है तो शरीर को लगभग 4 साल तक उसका दुष्‍प्रभाव झेलना पड़ता है। इसकी अधिक मात्रा लीवर कैंसर का भी कारक बनती है।

सुरक्षा टिप्स

  1. नॉन स्टिक बर्तन में बिना कोई सामान डाले आग पर गर्म न करें। ध्‍यान रखें कि इनका इनका तापमान 350 से 450 फ़ॉरेहाइट के बीच ही रहे।
  2. इन बर्तनों में साग-सब्‍जी या अन्‍य पक रहे पदार्थों को चलाने के लिए मेटल से बने चम्‍मचों का प्रयोग न करें, इससे टेफ़्लॉन कोटिंग हटने का ख़तरा रहता है।
  3. इन्‍हें साफ़ करने के लिए हाथ या साफ़्ट स्पंज का इस्‍तेमाल करें।
  4. नॉन स्टिक बर्तनों को एक-दूसरे के ऊपर चढ़ाकर न रखें।
  5. पालतू पक्षियों को किचन से दूर रखें।
  6. यदि ग़लती से कोई नॉन स्टिक बर्तन सामान्‍य से अधिक टेम्‍प्रेचर पर गर्म हो गया तो कुछ देर के लिए घर के खिड़की-दरवाज़े खोल दें और स्‍वयं भी घर से बाहर चले जाएं।
  7. टेफ़्लॉन कोटेड बर्तन ख़राब न भी दिखें तो भी इन्‍हें दो साल में बदल दें।
  8. जितना संभव हो, इन नॉन स्टिक बर्ततनों का उपयोग कम करें।