सदाबहार पारिजात गठिया की उत्तम दवा है। इसे संस्कृत में शेफालिका, हिंदी में हरसिंगार, बंगला में शिउली और अंग्रेजी में नाइट जेस्मिन कहते हैं। इसके वृक्ष पर छोटे-छोटे सफेद फूल खिलते हैं और उसकी डंडी नारंगी होती है। यह फूल खुशबूदार होता है और रात को खिलता, सुबह ज़मीन पर गिर जाता है।

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के रामनगर क्षेत्र के बोरोलिया गांव में बहुत पुराना पारिजात वृक्ष मौजूद है। यह बहुत ही विशालकाय वृक्ष है। इसकी ज़्यादातर शाखाएं ज़मीन की ओर झुकती हैं और और ज़मीन को छूकर सूख जाती है। यह वृक्ष लगभग पांच हजार साल तक यानि लंबे समय तक जीवित रहता है।

पारिजात के फूल
Night jasmine; Parijat; Harsingar

वनस्पति शास्त्री इस वृक्ष को एडोसोनिया वर्ग का मानते हैं, इसकी कुल पांच प्रजातियां पाई जाती हैं, इनमें से एक ‘डिजाहाट’ है। रुड़की के शोधार्थी हरी सिंह के अनुसार बोरोलिया गांव का पारिजात वृक्ष डिजाहाट प्रजाति का है। इसमें सफेद व पीले दोनों रंग फूल आते हैं।

पारिजात के औषधीय प्रयोग

1. गठिया का इलाज

पारिजात वृक्ष के पांच पत्तों की चटनी बना लें और इसे एक गिलास पानी में खौलाएं। जब पानी आधा रह जाए तो इसे ठंडा करके पीने से पुराना से पुराना गठिया भी चला जाता है। इसे पीने से सिर्फ़ गठिया ही नहीं खत्‍म होता है बल्कि पुराना से पुराना बुखार भी विदा हो जाता है। जो बुखार बहुत दिन से आ रहा है और दवा से ठीक नहीं होता है, उसे पारिजात के पत्तों का यह रस जड़ से निकालकर बाहर कर देता है। वह बुखार चाहे चिकनगुनिया हो या डेंगू या इंसेफ्लाटिस अथवा ब्रेन मलेरिया, सभी ठीक हो जाते हैं।

2. बवासीर का उपचार

पारिजात के एक बीज का रोज सेवन करने से बवासीर ठीक हो जाता है।  इसके बीजों को पीसकर गुदा पर लगाने से बवासीर में राहत मिलती है।

3. हृदय रोग से बचाव

पारिजात के फूल हृदय रोगों की रोकथाम करते हैं। जून माह में जब हरसिंगार वृक्ष पर फूल आते हैं तो इन फूलों के रस का सेवन करने से हृदय रोग की आशंका कम हो जाती है।

4. सूखी खांसी से निजात

पारिजात की पत्तियों को पीसकर मधु के साथ चाटने से सूखी खांसी से मुक्ति मिलती है।

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पारिजात से स्किन केयर
पारिजात से स्किन केयर

5. त्वचा रोग में लाभदायक

– किसी भी प्रकार के त्‍वचा रोगों में इसकी पत्तियां लाभकारी हैं। शेफालिका पत्तियों को पीसकर त्‍वचा पर लगाने से त्‍वचा से संबंधित रोग चले जाते हैं।

– हरसिंगार की पत्तियों से बने तेल का प्रयोग भी त्‍वचा रोगों में किया जाता है।

6. स्त्री रोग का उपाय

स्‍त्री रोग में शिउली की नई कोंपल को पांच काली मिर्च के साथ खाने से आराम मिलता है।

7. बालों के लिए लाभकारी

पारिजात के बीज बालों के लिए भी उपयोगी हैं।