मदार के पौधे से आप सभी परिचित हैं। इसे विभिन्‍न क्षेत्रों में श्वेतार्क, आक व आकड़ा के नाम से भी जाना जाता है। इस पौधे का कोई रोपण नहीं करता, यह स्‍वत: उगता है, फिर भी यह पौधा हर जगह मिल जाता है। यह दो रंगों में पाया जाता है – नीला व सफेद। सफेद मदार की जड़ अक्‍सर गणेश जी की आकृति में स्‍वत: बन जाती हैं। अनेक स्‍थलों पर मदार गणेश की मूर्तियां मिल जाएंगी। इनकी पूजा से सभी मनोकामनाएं सिद्ध होती हैं। सफेद मदार के पौधे में गणेश जी का वास माना जाता है। जिस घर में यह पौधा लगा होता है, वहां किसी भी प्रकार के तंत्र-मंत्र या जादू-टोने का असर नहीं होता है। मदार में अनेक औषधीय गुण भी विद्यमान होते हैं।

मदार के पौधे के फूल

मदार के पौधे के गुण और लाभ

1. मदार की ज‌ड़ के प्रयोग

– नाखूना रोग में मदार की जड़ पानी में घिसकर लगाने से लाभ मिलता है।

– दो किलो मदार की जड़ चार लीटर पानी में उबालें, जब पानी आधा रह जाए तो उसमें से जड़ निकाल लें। पानी में दो किलो गेहूं डालकर छोड़ दें। गेहूं जब पानी सोख लें तो उसे सुखा कर पिसवा लें। इस गेहूं के आटे की रोटी गुड़ व घी के साथ खाने से गठिया में आराम में मिलता है। कितना भी पुराना गठिया अधिकतम 21 दिन में ठीक हो जाता है।

– मदार की जड़ को बारीक पीस लें और उसमें काली मिर्च का चूर्ण मिला लें। एक-एक रत्‍ती की गोली बनाकर सुबह- शाम खाने से खांसी ठीक हो जाती है।

– खांसी के लिए चार तोला पुराने गुड़ में मदार की जड़ का चूर्ण 1 तोला मिलाकर चने की बराबर गोली बनाकर नियमित सेवन करें।

– यदि हैजा हुआ है तो मदार की जड़ की छाल का चूर्ण बनाएं और उसमें अदरक का रस व काली मिर्च पीसकर मिला लें। इनकी दो-दो रत्‍ती की गोलियां बनाकर इनका सेवन करने से हैजा रोग ठीक हो जाता है।

– यदि खुजली हुई है तो मदार के पौधे की जड़ को भूनकर राख बना लें और उसमें सरसों का तेल मिलाकर लगाएं।

– गर्मी की वजह से कोई रोग हुआ है तो मदार की जड़ का चूर्ण गरम पानी के साथ लेने से ठीक हो जाता है। गर्मी की वजह से यदि घाव हो गया है तो उसकी जड़ का चूर्ण लगाने से ठीक होता है। पानी में मदार उबाल कर यदि घाव को धोएं तो शीघ्र लाभ मिलता है।

श्वेतार्क के पौधे और फूल
श्वेतार्क के पौधे और फूल

Calotropis gigantea Root Benefits

– फोड़ा कितना भी पुराना हो और ठीक न हो रहा हो तो मदार की जड़ पीसकर उस पर लगाएं।

– मदार की जड़ का चूर्ण एक माशा ठंडे पानी के साथ लेने से प्‍लेग रोग का ख़तरा समाप्‍त हो जाता है।

– किसी स्‍त्री को यदि प्रदर रोग हुआ है तो मदार की जड़ का चूर्ण दही के साथ खिलाना चाहिए।

– किसी को सर्प काटा हो तो मदार की जड़ पानी में घिसकर पिलाना चाहिए। यह विष दोष को दूर कर देता है।

– सुजाक रोग में मदार की जड़ का धुँआ लेने से लाभ मिलता है। ऐसे मरीज़ को नमक से परहेज़ करना चाहिए और इसमें बेसन की रोटी तथा घी का सेवन करना चाहिए।

– नासूर में मदार की जड़ व पीपल की छाल का भस्‍म लगाने से लाभ मिलता है।

सांस की परेशानी के लिए मदार की जड़ के चूर्ण का धुआं लेकर उसके बाद गुड़ के साथ दूध पियें, आराम मिलेगा।

– सूजन में मदार की जड़ का एक माशा चूर्ण खाने से आराम मिलता है।

– प्रमेह रोग में मदार की जड़, असगंध व बीजबंध 5-5 तोला मिलाकर चूर्ण बनाकर उसे गुलाब जल में खरल कर सुखा लें। उसे तीन दिन गुलाब के अर्क में घोंटे। औषधि तैयार हो गई। 1 माशा चूर्ण शहद के साथ चाटकर दूध पीने से प्रमेह ठीक हो जाता है।

– जिन्‍हें दूध नहीं पचता है, उन्‍हें चाहिए कि मदार के पौधे की जड़ का काढ़ा बनाकर उसमें सुहागा भिगो दें और आग पर फुला लें। 1 से 4 रत्‍ती तक इसका सेवन कर सकते हैं। यह एक किलो दूध को पचाने की क्षमता रखता है।

मदार की डाल और पत्ते के प्रयोग

– सिर दर्द में मदार की सूखी डाल तोड़कर एक छोटा डंडा बना लें, उसके एक सिरे को जला लें और दूसरे सिरे से नाक से जोर से धुआं लें, सिर दर्द में आराम मिलेगा।

– बवासीर में मदार के पत्‍ते व डाल को पानी में डालकर आबदस्‍त लेने से आराम मिलता है।

– दांतों के रोग के लिए मदार की दातून अच्‍छी मानी जाती है।

– खांसी, दमा, प्‍लीहा में मदार की पत्‍ती लें और उसमें चौथाई हिस्‍सा सेंधा नमक मिलाकर कूट लें। उसे हांडी में रखकर कपरौटी आग में फूंक दें। उसके भस्‍म को मधु या पानी के साथ 1 माशा तक सेवन करने से लाभ मिलता है।

– मदार को जड़ से उखाड़ लें और जड़ काटकर अलग कर दें। उसे छाया में सुखा लें। सूखने के बाद उसे पीस कर उसमें गुड़ मिला लें। यह शीत ज्‍वर की अचूक औषधि है।

मदार के दूध के प्रयोग

– यदि पांव में कांटा गड़ा है और उसकी नोंक अंदर घुस गई है तो मदार के पौधे का दूध लगाने से पक कर वह बाहर आ जाता है।

– मदार का दूध लगाने से उंगुलियों की सड़न ठीक होती है।

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