नवजात के लिए माता का दूध अमृत समान है। इसीलिए इसे पीयूष कहा जाता है। बच्‍चे का पहला आहार वही है, उसी से बच्‍चे का जीवन आगे बढ़ता है और पुष्‍ट होता है। बच्‍चे को यदि माँ का दूध न मिले तो बाहर का कितना भी दूध पिला दीजिए, वह कमज़ोर ही रहता है। इसका असर उसकी पूरी ज़िंदगी पर पड़ता है। इसीलिए जिन बच्‍चों की माँ जन्‍म लेते ही मर जाती है, उसे टूअर कहते हैं, इसका अर्थ होता अतिशय कमज़ोर। इसलिए हर बच्‍चे के समग्र विकास के लिए माता के दूध से बढ़कर कुछ और नहीं है। माँ के दूध में अपार शक्ति होती है। उसे कुछ भी न मिले तो भी केवल माँ का दूध बच्‍चे का पूरा भरण-पोषण करने में सक्षम है।

बच्‍चे के जन्‍म लेने के बाद बहुत सी महिलाओं में पर्याप्‍त दूध नहीं उतरता है। इससे बच्‍चे का पेट भरता नहीं और वह भूखा रह जाता है। चूँकि नवजात पूरी तरह माँ के ही दूध पर निर्भर होता है, वह बाहर का कुछ ले नहीं सकता। इसलिए माँ व बच्‍चे दोनों के सामने एक गंभीर समस्‍या आ खड़ी होती है। आज इस पोस्‍ट के जरिये नवजात की माता का दूध बढ़ाने के घरेलू व कारगर उपायों पर चर्चा करेंगे।

माँ का दूध बढ़ाने के अचूक उपाय

– जिन माताओं को दूध कम उतर रहा हो उन्‍हें एक या दो ग्राम शतावर का चूर्ण दूध के साथ लेना चाहिए। इससे दूध में वृद्धि हो जाती है।

– शतावर, रुद्रवंती व अश्‍वगंधा मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम तीन-तीन ग्राम लेना लाभकारी है।

– माँ के स्‍तनों पर शीशम के पत्तों को पीसकर उसकी लुगदी लगाने से दूध में वृद्धि होती है और अधिक दूध आना शुरू हो जाता है।

शिशु को स्तनपान कराना

– दूध में मुलेठी व शतावर का पाउडर पकाकर लेने से दूध भी ख़ूब आता है और बच्‍चा भी स्‍वस्‍थ रहता है। केवल मुलेठी का पाउडर भी दूध में पकाकर लिया जाए तो लाभ होता है।

– शतावर व कदंब के फल का पाउडर बराबर मात्रा में लेने से लाभ होता है।

– दूध कम आने की समस्‍या में करेले की सब्ज़ी लाभकारी है। यदि माता को रोज़ करेले की सब्‍ज़ी खिलाई जाए तो दूध पूरा आने लगता है, इससे गठिया की रोकथाम भी होती है।

– एक ग्राम पिप्‍पली व दो ग्राम शतावर का पाउडर मिलाकर लेने से दूध कम आने की समस्‍या से निजात मिलती है और बच्‍चा भी पूरी तरह स्‍वस्‍थ रहता है।

गौ माता के दूध में वृद्धि के उपाय

– पशुओं में थनैला नामक रोग हो जाए या दूध कम आए तो 50 से 60 ग्राम तक शतावर की जड़ का पाउडर देने से रोग भी समाप्‍त होता है और दूध में वृद्धि होती है।

– पशुओं के थन पर शीशम के पत्तों की लुगदी लगाकर 7-8 घंटे छोड़ देने से थनैला रोग ख़त्‍म होता है और दूध में वृद्धि होती है।

– चारे के साथ सौ ग्राम मुलेठी की जड़ पशु को खिला दी जाए तो उसके पेट की बीमारियाँ ख़त्म होती हैं और दूध अधिक आने लगता है, इस दूध को पीने से मनुष्‍य की बीमारियाँ भी दूर भागती हैं।