ल्यूकोरिया यानी श्‍वेत प्रदर महिलाओं में सामान्‍य बीमारी है। इसमें गुप्‍तांगों से असामान्‍य सफेद एवं बदबूदार पानी निकलने लगता है। यह कोई बीमारी नहीं है बल्कि योनि या गर्भाशय के विकार या दोष का लक्षण है। यह स्‍वयं कोई बीमारी न होने के बावजूद अनेक बीमारियों व कमज़ोरी का कारण है। इसकी वजह से शरीर में कमज़ोरी, त्‍वचा में रूखापन, गालों में गड्ढे, कमर दर्द, यौन इच्‍छा की कमी, चिड़चिड़ापन व घुटनों में दर्द की समस्‍या सामने आने लगती है।

ल्यूकोरिया के कारण

शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में कमी या मधुमेह इसका कारण हो सकता है। ऐसी महिलाओं की योनि में फ़ंगल यीस्‍ट नामक संक्रामक रोग संभव है। ज़्यादा उपवास, उत्‍तेजक कल्‍पनाएं, अश्‍लील वार्तालाप, संभोग के दौरान उल्‍टे आसनों का प्रयोग तथा अधिक घर्षण, रोगग्रस्‍त पुरुष के साथ संभोग, संभोग के बाद योनि को स्‍वच्‍छ जल से न धोना आदि इसके कारण हैं। बार-बार गर्भपात कराना भी इसका एक कारण है।

ल्यूकोरिया श्वेत प्रदर

श्वेत प्रदर के सरल उपाय

– इस समस्‍या में क्रौंच के बीजों का उपयोग कारगर है। इसमें कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन, प्रोटीन, गंधक व गेलिक एसिड पाया जाता है। क्रौंच के बीजों का पाउडर सुबह-शाम पानी के साथ दो-दो ग्राम लेने से शीघ्र ही इस बीमारी में आराम मिल जाता है।

– समान मात्रा में अशोक की छाल का चूर्ण व मिश्री सुबह-शाम गाय के दूध के साथ लेने से लाभ होता है। इसके अलावा आंवला, गिलोय के चूर्ण को अशोक की छाल के चूर्ण के साथ समान मात्रा में उबालकर उसमें जल मिलाकर शहद के साथ सुबह-शाम सेवन करने से भी लाभ होता है।

– दस-दस ग्राम मुलैठी व अशोक की छाल का चूर्ण, पांच ग्राम जीरा व बीस ग्राम मिश्री मिलाकर किसी शीशी में रख लें। रोज दिन में तीन बार पांच-पांच ग्राम चूर्ण खाने से आराम मिलता है।

– इस रोग में केला भी मदद कर सकता है। कच्चे केले को सुखाकर चूर्ण बना लें और उसमें समान मात्रा में गुड़ मिलाकर दिन में तीन बार सेवन करें, ल्यूकोरिया में यह अत्‍यंत लाभकारी है।

– ल्‍यू‍कोरिया से निजात के लिए समान मात्रा में सिंघाड़ा, गोखरू, बबूल की गोंद, बड़ी इलायची, शक्‍कर व सेंमल की गोंद मिलाकर चूर्ण बना लें और सुबह-शाम सेवन करें।

फिटकरी का चूर्ण बना लें और रोज दिन में तीन बार पानी के साथ चौथाई चम्‍मच चूर्ण लेने लाभ होता है, साथ ही फिटकरी के पानी से योनि को सुबह-शाम अच्‍छी तरह धुलें। इस पानी का योनि के अंदर पिचकारी भी देना चाहिए।

– ल्यूकोरिया के लिए दस-दस ग्राम ककड़ी के बीजों की गिरी व सफेद कमल की कलियां लेकर पीस लें तथा उसमें जीरा व चीनी मिलाकर एक सप्‍ताह तक सेवन करें। शीघ्र लाभ होगा।

आप पढ़ रहे हैं ल्यूकोरिया के घरेलू इलाज

– चार सौ मिलीलीटर पानी में दस ग्राम बबूल की छाल को उबालें, जब पानी सौ मिलीलीटर बचे तो इसे किसी बोतल में भरकर रख लें। इसमें से रोज़ दो-दो चम्‍मच सुबह-शाम पीने से ल्यूकोरिया शीघ्र ठीक होता है। इस काढ़े में थोड़ी-सी फिटकरी मिलाकर योनि में पिचकारी देने से योनिमार्ग शुद्ध होकर निरोगी बन जाता है। योनि भी तंग व सशक्‍त पेशियों वाली हो जाती है।

– बबूल की दस ग्राम छाल को रात भर पानी में भिगो दें और सुबह उसे सौ मिलीलीटर पानी में उबालें। जब पानी आधा रह जाए तो उसे किसी शीशी में भरकर रख लें। पेशाब के बाद इस पानी से योनि को धोने से ल्यूकोरिया या श्वेत प्रदर समाप्‍त होता है तथा योनि तंग होती है।

– रात को मेथी का चूर्ण पानी में भिगो दें, सुबह उस पानी में कपड़ा भिगोकर योनि पर रखने से ल्यूकोरिया ठीक होता है। साथ ही चार चम्‍मच मेथी चूर्ण को सफेद व साफ कपड़े में बांधकर उसे योनि के अंदर रखकर रात को सोएं। किसी तरह का कष्‍ट होने पर चार घंटे बाद उसे योनि से बाहर निकाल दें। इससे श्वेत प्रदर में बहुत जल्‍दी आराम मिलता है।

– मेथी-पाक या मेथी-लड्डू खाने से भी ल्यूकोरिया में आराम मिलता है। गर्भाशय की गंदगी बाहर निकल जाती है। सुबह-शाम एक-एक चम्‍मच मेथी का चूर्ण गुड़ के साथ खाने से भी लाभ होता है।

– दस-दस ग्राम बबूल की छाल व नीम की छाल लेकर मोटा-मोटा कूट लें। इसका काढ़ा बनाकर पीने से भी ल्यूकोरिया यानि श्वेत प्रदर में लाभ मिलता है।

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