किडनी की पथरी को बाहर निकालने व किडनी में पथरी का निर्माण न होने देने के लिए कुल्थी दाल को जाना जाता है। यह शुगर को भी ख़त्‍म करती है तथा सभी बीमारियों की जड़ वात, पित्‍त, कफ के दोषों का शमन करती है। पथरी के रोगी को कुल्थी की दाल, खीरा, तरबूज-खरबूज के बीज, चौराई का साग, मूली, आंवला, अनन्‍नास, बथुआ, जौ, मूंग की दाल व गोखरु आदि का सेवन करना चाहिए। साथ ही पालक, टमाटर, बैंगन, चावल, उड़द, लेसदार पदार्थ, सूखे मेवे, चॉकलेट, चाय, मद्यपान, मांसाहार आदि से परहेज़ करना चाहिए।

कुल्थी दाल

कुल्थी दाल से औषधि बनाना

कुल्थी दाल के एक पाव / 250 ग्राम दानें लेकर उसे साफ़ कर लें। रात में उसे तीन लीटर पानी में भिगो दें। सुबह पानी सहित इसे धीमी आंच पर पकाएं। जब पानी एक लीटर रह जाए तो उसे आग से उतार लें। इसके बाद उसे लगभग तीस ग्राम देशी घी से छौंक दें। फिर थोड़ा सा सेंधा नमक, काली मिर्च, जीरा, हल्दी डाल दें। औषधि तैयार हो गई।

कैसे करें प्रयोग

– दोपहर को भोजन करके पूरी औषधि पी जाएं। इसके बाद एक गिलास पानी ज़रूर पियें। एक दो सप्‍ताह में ही किडनी व मूत्राशय की पथरी बाहर आ जाएगी। यदि बहुत ज़रूरी हो तो औषधि लेने के बाद एक रोटी खा सकते हैं। न खाएं तो बेहतर है। पानी पर्याप्‍त पीना चाहिए। यह दवा कमर दर्द में भी लाभ पहुंचाती है।

– कुल्थी दाल हड्डियों के अंदर की चिकनाई बढ़ाती है। इसे प्रतिदिन रोटी के साथ खाने से पथरी टूटकर पेशाब के रास्‍ते बाहर निकल जाती है।

– कुल्थी दाल के 20 ग्राम दाने एक पाव में पानी में रात को शीशे के बर्तन में भिगो दें। सुबह पानी को पी जाएं। पुन: कुल्‍थी में उतना ही पानी डाल दें। उसे दोपहर को पी जाएं। पुन: उसमें उतना ही पानी डाल दें और शाम को पी जाएं। इसके बाद कुल्‍थी के दानों को फेंक दें। एक माह तक यही प्रयोग करें। किडनी व मूत्राशय की पथरी गल कर बाहर निकल आएगी।