आज शादी-विवाह में खड़े होकर खाना खाने की परंपरा बन गई है। बफ़र सिस्‍टम चल पड़ा है। अब पीढ़ा पर बैठकर खाने की परंपरा लगभग ख़त्म हो गई है। पहले आराम से पूरी बारात पीढ़ा पर बैठकर भोजन करती थी, भोजन परोसने वाले होते थे। भोजन करने में आराम मिलता था। अब भी यह परंपरा गाँवों में कुछ जगह पर है। इस परंपरा से एक तो भोजन की बर्बादी नहीं होती थी और व्‍यक्ति अनेक प्रकार की बीमारियों से बचा रहता है। जो खड़े होकर भोजन करने मात्र से उत्‍पन्‍न होने लगती हैं।

बैठकर भोजन करने से भोजन कुछ ज़्यादा भी कर लिया जाता है और कब्‍ज़ भी नहीं होता, जबकि खड़े होकर भोजन करने से एक तो कम भोजन ही किया जा सकता है और दूसरे कब्‍ज़ की समस्‍या उत्‍पन्‍न हो जाती है, यानी जो भोजन किया, वह भी पच नहीं पाता है और धीरे-धीरे शरीर की ऊर्जा क्षय होने लगती है।

खड़े होकर खाना खाने या खड़े होकर भोजन करने के नुक़सान

गाँवों की अपेक्षा सामान्‍य तौर से शहरों में भोजन टेबल पर सजा दिया जाता है और लोग प्‍लेट में अपने हाथ से निकालते हैं और खड़े होकर खाते हैं। इसीलिए रोग के शिकार हो रहे हैं। आइए बताते हैं खड़े होकर भोजन करने के क्‍या नुक़सान हैं।

खड़े होकर खाना खाने से परहेज़ करें

– भोजन जब हम खड़े होकर करते हैं तो निचले अंगों में वात रोग जैसे कब्‍ज़, पेट में गैस, घुटनों में दर्दकमर दर्द आदि की शिक़ायत होने लगती है। केवल कब्‍ज़ हो जाए तो अनेक प्रकार की बीमारियाँ उत्‍पन्‍न हो लगती हैं।

– खड़े होकर भोजन करने से एक तो कम भोजन में ही पेट भर जाता है और भोजन ठीक से पचता नहीं है। खाना न पचने से कब्‍ज़ होता है, मोटापा बढ़ने लगता है। पेट की अनेक बीमारियाँ जन्‍म लेने लगती हैं।

– जब हम खड़े होकर खाना खाते हैं तो हमारी आँतें सिकुड़ जाती हैं जो कब्‍ज़ बनाने में सहायता करती हैं और अपच की समस्‍या उठ खड़ी हो जाती है।

– खड़े होकर भोजन करना यौन रोगों को भी निमंत्रण देना है। इससे नपुंसकता, किडनी की बीमारीपथरी की समस्‍या उठने लगती है।

– जब हम खड़े होकर भोजन करते हैं तो पैर के जूते-चप्‍पल तो निकालते नहीं, इससे पैर गर्म रहता है जबकि आयुर्वेद के अनुसार भोजन करते समय पैर ठंडे होने चाहिए। इसलिए हमारी परंपरा रही है कि भोजन करने के पूर्व पैर धुल लिया जाता था।

बैठकर भोजन करने के लाभ

ज़मीन पर सुखासन या पालथी मारकर बैठकर भोजन करने से स्‍वास्‍थ्‍य सम्बंधित अनेक लाभ प्राप्‍त होते हैं। न तो कब्‍ज़ बनता है और न ही किसी तरह की पेट की बीमारियाँ होती है। मोटापे की समस्‍या नहीं आती। शरीर को पर्याप्‍त शक्ति व ऊर्जा मिलती है। शरीर में हमेशा स्‍फूर्ति बनी रहती है। सुखासन में बैठकर जब हम भोजन करते हैं तो स्‍वास्‍थ्‍य सम्बंधित विशेष लाभ प्राप्त होता है। एक तो हम आराम से भोजन करते हैं और मन एकाग्र बना रहता है।

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