किसी भी रोग से जड़ से निजात के लिए आयुर्वेद से बेहतर कोई विकल्‍प नहीं है। यह ऐसी प्राचीन भारतीय चिकित्‍सा पद्धति है जो बिना किसी नुक़सान के रोग का समूल नाश करती है। इसकी दवा के सेवन से किसी प्रकार का साइड इफ़ेक्‍ट नहीं होता है, चूंकि इसकी सभी औषधियाँ प्रकृति से प्राप्‍त की जाती है। यह पैथी किसी रोग का नहीं बल्कि उसके कारणों का इलाज करती है। इसलिए जब कारण समाप्‍त हो जाते हैं तो रोग अपने आप विदा हो जाता है। प्राचीन काल से ही आयुर्वेद ने अनेक असाध्‍य रोगों को जड़ से समाप्‍त करने में महारत हासिल की है। एलोपैथ से जब लोग दवा कराकर थक जाते हैं तो आयुर्वेद की शरण में आते हैं और रोगमुक्‍त होते हैं। इसमें ऐसी भी दवाएँ हैं जो तुरंत लाभ करती हैं और किसी-किसी मर्ज में दवा लम्बी चलती है लेकिन लाभ अवश्‍य होता है।

इंफ्लुएंजा का घरेलू इलाज

बरसात के मौसम में अनेक प्रकार के रोग जन्‍म लेते हैं। यह मौसम रोगों का घर होता है, थोड़ी भी लापरवाही हुई कि सर्दी, जुखाम, फुंसी-फोड़े, कब्‍ज़ आदि तुरंत हो जाते हैं। जिस रोग की हम कल्‍पना भी नहीं करते, वह भी इसी मौसम में पैदा होता है। इस समय चिकित्‍सकों की दुकान कुछ ज़्यादा ही चलने लगती है, इसे वे अपना मौसम मानते हैं। इस समय कुछ महामारी भी पैदा होती हैं जैसे इंसेफ्ला‍इटिस, इंफ्लुएंजा आदि। तराई क्षेत्रों में इनका प्रकोप कुछ अधिक ही होता है। सैकड़ों लोग इस इंफ्लुएंजा की दवा कराने के बाद भी बच नहीं पाते।

श्लैष्मिक ज्वर

इंफ्लुएंजा का समय-समय पर चिकित्‍सक नाम बदल देते हैं, जैसे इस समय “स्वाइन फ्लू” कहा जा रहा है। बड़ी संख्‍या में प्रतिवर्ष इस रोग के लोग शिकार होते हैं और असमय ही मृत्‍यु को प्राप्‍त हो जाते हैं। आयुर्वेद में (इंफ्लुएंजा) का नाम वात श्लैष्मिक ज्वर है। इस ज्‍वर के लिए आयुर्वेद में विभिन्‍न प्रकार के नुस्‍खे हैं। जिस नुस्‍खे को हम यहाँ बताने जा रहे हैं वह इंफ्लुएंजा को मात्र दो दिन में ठीक कर देता है। इसे बनाना बहुत आसान है, घर पर बनाया जा सकता है। इसमें पड़ने वाली सभी औषधियाँ पंसारी की दुकान पर मिल जाती हैं।

इंफ्लुएंजा की आयुर्वेदिक दवा

  • Servings: 200gm
  • Difficulty: Medium

बरसात के दिनों में इंफ्लुएंजा का प्रकोप देखने के मिल जाता है। जिसमें कई लोगों की जान तक जाती है। आइए इंफ्लुएंजा की आयुर्वेदिक दवा बनाने की विधि सीखें।

आवश्यक जड़ी बूटी

  • भारंगी- 10 ग्राम
  • मोथा- 10 ग्राम
  • बहेड़ा- 10 ग्राम
  • रस सिंदूर- 80 ग्राम
  • सुहागे की खील- 10 ग्राम
  • पिप्पली- 10 ग्राम
  • कूठ- 10 ग्राम
  • नीम छाल- 10 ग्राम
  • चिरायता- 10 ग्राम
  • श्वेत सरसो- 10 ग्राम
  • तेजपात- 10 ग्राम
  • बच- 10 ग्राम
  • लाल चन्दन- 10 ग्राम

बनाने की विधि

इन सभी सामग्री को आपस में खूब कूट-पीसकर घोंट लें और किसी साफ-सुथरे शीशे के पात्र में रख दें।

सेवन करने की विधि


जब इंफ्लुएंजा की शिकायत हो तो 125 मिलीग्राम से 250 मिलीग्राम तक मधु या अदरक के रस के साथ दिन में एक बार लें। यदि रोग गंभीर अवस्‍था में है तो दवा दिन में दो बार ले सकते हैं। मात्र दो दिन के इस दवा के सेवन से इंफ्लुएंजा विदा हो जाएगा।