इमली यानि टमरिंड (Tamarind) हर घर में इस्‍तेमाल की जाती है। ख़ासकर इसकी चटनी बनाई जाती है और खटाई के रूप में इस्‍तेमाल किया जाता है। लेकिन इमली में अनेक औषधीय गुण भी होते हैं। आज हम आपको इमली के औषधीय गुणों के बारे में बताने जा रहे हैं। इसका प्रयोग कर विभिन्‍न प्रकार की बीमारियों से मुक्ति पाई जा सकती है।

इमली के लाभ

इमली का दवा के रूप में प्रयोग

1. लू लगने पर

गर्मी के मौसम में तेज़ धूप होती है और लू चलती है। यदि लू लग जाए तो इमली आपके काम आ सकती है। करना कुछ नहीं है, सिर्फ़ पकी हुई इमली का गूदा लें और हाथ-पैरों के तलवे में मल दें, लू का प्रभाव ख़त्‍म हो जाएगा। यदि लू के चलते कोई बेहोश हो गया हो तो टमरिंड के गूदे का गाढ़ा घोल बनाकर सिर पर लगा दें, बेहोशी दूर हो जाएगी, लेकिन घोल लगाते समय सिर पर बाल नहीं होने चाहिए। इसके अलावा पीलिया, गर्मी से होने वाला बुखार व प्‍लेग में भी फ़ायदा होता है।

2. बहुमूत्र रोग

मूत्र विकार से यदि परेशान हैं। मूत्र विकार के चलते शरीर कमज़ोर हो गया हो और हड्डियां बाहर निकली दिख रही हों। मूत्र धारण की शक्ति क्षीण हो गई हो या मूत्र अधिक बनने की समस्‍या हो तो पांच ग्राम इमली का गूदा रात को सोते समय पानी में भिगो दें। सुबह उठकर इमली के छिलके निकालकर गूदे को दूध के साथ पीस लें और छानकर रोगी को पिला दें। यह प्रयोग स्‍त्री व पुरुष दोनों समान लाभ पहुंचाता है।

3. टीबी की खांसी

टीबी या क्षय की खांसी बहुत ज़ोर से आती है और इसमें खांसी के साथ थोड़ा रक्‍त भी आ जाता है। ऐसी स्थिति में इमली के बीजों को तवा पर सेंक कर पीस लें। इसे कपड़े से छानकर महीन चूर्ण बना लें। तीन ग्राम तक यह चूर्ण घी या शहद के साथ दिन में 3-4 बार चाटने से जल्‍दी ही खांसी का वेग कम होने लगेगा और कफ़ सरलता से निकलने लगता है। खांसी के साथ आने वाला ख़ूनयुक्‍त कफ़ व पीला कफ़ भी आना बंद हो जाता है।

4. अंडकोश का सूजन

अंडकोश में पानी भरने से उसमें सूजन हो जाता है। आमतौर लोग इसका ऑपरेशन कराकर पानी निकलवाते हैं। लेकिन इमली का यह प्रयोग आपको ऑपरेशन से बचा लेगा। इमली की लगभग 30 ग्राम ताज़ा पत्तियां लें और उसे ताज़ा गोमूत्र में तब तक उबालें जब तक गोमूत्र जल न जाए। गोमूत्र जल जाने के बाद दुबारा गोमूत्र डालकर पकाएं। अब इमली की पत्तियों को आंच से उतारें और किसी बड़े पत्ते पर रखकर जब सहने लायक हो तो सहा-सहाकर अंडकोश पर कपड़े की पट्टी की सहायता से बांध दें और लंगोट कस लें। कुछ ही दिन के इस प्रयोग से अंडकोश का पानी निकल जाएगा और अंडकोश सामान्‍य अवस्‍था में आ जाएगा।

5. गले में सूजन

गले में यदि सूजन है तो एक किलो पानी में दस ग्राम इमली उबालें जब पानी आधा जल जाए तो उसे आग से उतार कर छान लें और उसमें थोड़ा सा गुलाबजल मिलाकर गरारा या कुल्‍ला करने से गले की सूजन में लाभ होता है।

6. हृदय की दाहकता

पकी हुई इमली के गूदे के घोल में मिश्री मिलाकर पीने से हृदय की दाहकता या जलन शांत होती है।

7. आंखों की गुहेरी

आंखों में गुहेरी की समस्‍या है तो इमली के बीजों की गिरी पत्‍थर पर घिसकर गुहेरी पर लगाएं, इससे ठंडक पहुंचेगी और तत्‍काल लाभ‍ मिलेगा।

8. त्‍वचा रोग

घाव, फोड़ा-फुंसी या किसी भी त्‍वचा रोग में एक गिलास पानी में लगभग 30 ग्राम इमली को गूदे सहित म‍थकर पीने से लाभ होता है।

8. उल्‍टी

रात को सोते समय पकी हुई इमली के गूदे को पानी में भिगो दें। सुबह इसका रस पिलाने से उल्‍टी आना बंद हो जाती है।

9. भांग या शराब का नशा

पचास ग्राम टमरिंड को आधा लीटर पानी में दो घंटे भिगो दें। इसके बाद उसे पानी में मसल लें और छानकर उसमें थोड़ा गुड़ मिलाकर पीने से भांग या शराब का नशा उतर जाता है। इसके अलावा यह लू लगने, जी मिचलाने, बेचैनी, शरीर में जलन व दस्त में भी लाभ करता है।

10. चोट या मोच

चोट लगने या मोच या हड्डी के क्रेक होने पर इमली की ताज़ा पत्तियों को उबालकर उसके पानी से धोने पर लाभ होता है। इस पानी से सेंकने व अंगुलियों से हल्‍का-हल्‍का मलने से वहां जमा हुआ ख़ून फैल जाता है।

11. पीलिया

पीलिया में इमली की छाल का भस्‍म कारगर है। इसकी छाल को जलाकर भस्‍म बना लें और उसमें दस ग्राम भस्‍म को बकरी के दूध के लेने पर पीलिया रोग ख़त्‍म हो जाता है।

12. आग से जलने पर

यदि आग से जलने पर छाले पड़ गए हों या घाव हो गया हो तो इमली की छाल का भस्‍म लें और उसे गाय के घी में मिलाकर लगाएं। इससे छाले व घाव ठीक हो जाते हैं।

13. पित्तज ज्वर

पित्‍त के चलते होने वाले बुखार में 20 ग्राम इमली को 100 ग्राम पानी में रात को सोते समय भिगो दें। सुबह उसके निथरे हुए जल का छानकर उसमें थोड़ा सा बूरा मिलाएं। लगभग 4-5 ग्राम ईसबगोल की फंकी लेकर यह जल पीने से लाभ होता है।

14. दंश विष

यदि सर्फ या बिच्‍छू आदि ने काट लिया है तो उसका विष उतारने के लिए टमरिंड के बीजों को पत्थर पर थोड़े जल के साथ घिस लें। अब काटे हुए स्‍थान को चाकू आदि से थोड़ा चीरकर उसमें एक या दो बीज चिपका दें। ये बीज ज़हर चूसने लगेंगे। जब बीज गिर पड़ें तो दूसरा बीज चिपका दें। इसी तरह बीज बदलते रहें। ये बीज पूरा विष चूस लेंगे।

15. खूनी बवासीर

ख़ूनी बवासीर में इमली के पत्‍तों का रस निकालकर पीने से फ़ायदा होता है।