आजकल ऊंची एड़ी की चप्पल का फ़ैशन है। समय के दौड़ में इसका इस्‍तेमाल बड़ी संख्‍या में महिलाएं करती हैं लेकिन उन्‍हें नहीं पता कि यह स्‍वास्‍थ्‍य के लिए कितना नुक़सानदायक है। इसी तरह हाई हील फ़ुटवीयर्स भी स्‍वास्‍थ्‍य के लिए घातक है। आज हम इसके नुक़सान पर चर्चा करेंगे।

ऊंची एड़ी की चप्पल हाई हील्स

ऊंची एड़ी की चप्पल न पहनें क्योंकि –

– हाई हील चप्‍पल महिलाओं को थोड़ा लोगों से अलग दिखने में मदद ज़रूर करता है लेकिन इसका ख़ामियाज़ा भी उन्‍हें चुकाना पड़ता है। एक अध्‍ययन के अनुसार हाई हील से हुए नुक़सान के कारण प्रति वर्ष औसत बीस हज़ार महिलाओं को अस्‍पताल में भर्ती होना पड़ता है।

-ऊंची एड़ी वाली सैंडल से महिलाओं की एड़ियां चोटिल हो जाती हैं, साथ ही दुर्घटनाओं की भी आशंका रहती है और कई बार दुर्घटनाएं हो भी जाती हैं। इस तरह का चप्‍पल पहनने से एक तो वे तेज़ी से नहीं चल सकती हैं, दूसरे थोड़ा भी अंसुलतन हुआ तो गिर जाएंगी, गिरने से उनके कूल्‍हे की हड्डी में चोट आ जाती है, पीठ का दर्द शुरू हो जाता है और काफ़ी दिन तक परेशान करता है। एक अध्‍ययन के मुताबिक 18 वर्ष से कम आयु की लड़कियां हाई हील के चलते औसतन पचास बार गिरती हैं और इसके दूरगामी परिणाम उनके शरीर को झेलने पड़ते हैं। कई बार तो कूल्‍हे की हड्डी बदलवाने की नौबत आ जाती है।

– यदि हाई हील पसंद है तो ज़रूर इसका इस्‍तेमाल करें लेकिन नियमित नहीं। यह आदत न बनने पाए। पैरों की चाल प्राकृतिक ही होनी चाहिए। हाई हील लंबे समय तक प्रयोग न करें।

हाई हील्स पहनना ख़तरनाक

– हाई हील पहनने पर शहिरीर का पूरा भार एड़ी पर पड़ता है, इससे पंजा तेजी से ज़मीन की तरफ़ दबता है। यह बार-बार अप्राकृतिक दबाव पंजे को कमज़ोर करता है।

– नियिमित ऊंची एड़ी की चप्पल पहनने से पेट आगे की तरफ़ निकलने लगता है और पुट्ठे पीछे की तरफ़ जाने लगते हैं। इसकी वजह से रीढ़ की हड्डी पर पड़ने वाला शरीर का भार असंतुलित हो जाता है।

– हाई हील पहनने से पैरों की पोज़ीशन बदल जाती है। इसकी वजह से जंघापेशी छोटी होती जाती है।

– दैनिक हाई हील का प्रयोग करने से टखनों के आसपास की मसल्स का तनाव बढ़ जाता है, सेंटर ऑफ़ ग्रेविटी फ़ारवर्ड शिफ़्ट होने से पीठ में दर्द शुरू हो जाता है। इस पर हुए शोधों के मुताबिक असंतुलित पैर कई तरह की बीमारियों को जन्‍म देते हैं।

– हाई हील ज़्यादा देर तक पहनने से पैरों की अंगुलियों में अकड़न शुरू हो सकती है तथा पैरों की नसों को भी क्षति पहुंच सकती है।