गुड़हल मात्र एक फूल का पौधा ही नहीं है। यह अनेक औषधीय गुणों से भरा हुआ है। उपलब्‍धता भी इसकी बहुतायत है, हर जगह यह आसानी से मिल जाता है। इसके फूल कई रंगों के होते हैं- सफेद, लाल, गुलाबी, नीला, पीला आदि। सफेद फूलों वाले गुड़हल की जड़ का दवाइयों में प्रयोग होता है। कई प्रकार के सौंदर्य वृद्धि वाली दवाइयों में इसका इस्‍तेमाल किया जाता है। कम उम्र में बालों के झड़ने की समस्‍या हो या चेहरे पर मुंहासों की समस्‍या, इन सभी में यह अत्‍यंत लाभकारी है। आज हम गुड़हल के उपयोग के बारे में चर्चा करेंगे। इसे जवाकुसुम भी कहते हैं। इसका वनस्पतिक नाम हिबिस्कस रोज़ा साइनेन्सिस है।

गुड़हल का फूल गुलाबी

गुड़हल के विविध औषधीय प्रयोग

Hibiscus Health Benefits

कोलेस्‍ट्रॉल

एलडीएल कोलेस्‍ट्राल को कम करने में गुड़हल की पत्ती से बनी चाय कारगर है। इसमें ऐसे तत्‍व पाए जाते हैं जो अर्टरी में प्‍लैक को जमने से रोकते हैं, जिससे कोलेस्‍ट्राल का स्‍तर कम होता है। इसके फूलों में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट कोलेस्ट्रॉल कम करने के साथ ही उच्‍च रक्‍तचाप को भी नियंत्रित करते हैं। इसके लिए जवाकुसुम के फूलों को पानी में उबालकर पीना चाहिए।

मधुमेह

गुड़हल की 20-25 पत्तियों का नियमित सेवन मधुमेह को खत्‍म कर देता है। इसका पौधा हर जगह मिल जाता है, ख़ासकर मंदिरों के आसपास यह ज़रूर रहता है। इसके अलावा इसे नर्सरी से भी प्राप्‍त किया जा सकता है।

यादाश्‍त की कमज़ोरी

दिल व दिमाग की शक्ति के लिए जवाकुसुम के फूलों का शर्बत कारगर है। यह यादाश्‍त को बढ़ाता है। बढ़ती उम्र के साथ यादाश्‍त कमज़ोर होने की समस्‍या आम है। लेकिन कम उम्र में ही याददाश्त कमज़ोर होने लगे तो गुड़हल का सेवन लाभ करेगा। इसकी 10 पत्तियां व 10 फूल लें फिर इन्‍हें सुखाकर पीस लें और किसी एयर टाइट डिब्बे में बंद करके रख लें। सुबह-शाम दूध के साथ इस पाउडर का सेवन यादाश्‍त की कमज़ोरी को दूर करता है।

बालों के झड़ने की समस्‍या

यदि असमय बाल झड़ रहे हों तो मेथी दाना तथा गुड़हल व बेर की पत्तियां पीसकर पेस्‍ट बना लें और बालों पर लगाएं। इससे बाल स्‍वस्‍थ व मजबूत होंगे तथा झड़ना धीरे-धीरे कम हो जाएगा। बालों में चमक भी आती है और बाल बढ़ने लगते हैं। केवल गुड़हल की पत्तियां पीसकर भी बालों में लगाने से फायदा होता है।

सर्दी-खांसी

गुड़हल विटामिन सी से भरपूर होता है। इसका सेवन चाय व अन्‍य रूपों में किए जाने से सर्दी-खांसी में तुरंत आराम मिलता है।

बुखार व प्रदर

गुड़हल का शर्बत बुखार व प्रदर में अत्‍यंत लाभकारी है। इसका शर्बत बनाने के लिए गुड़हल के सौ फूल लें और रात को उसे किसी शीशे के बर्तन में डालकर ऊपर से 20 बूंद नीबू का रस डालकर व ढंक दें। सुबह इसे हाथ से मसलकर कपड़े से रस को छान लें। इसमें 80 ग्राम मिश्री, 20 ग्राम गुले गाजबान का अर्क, 20 ग्राम अनार का रस, 20 ग्राम संतरे का रस मिलाकर धीमी आंच पर पका लें।

खुजली व जलन

गुड़हल का फूल खुजली व जलन में आराम देता है, साथ ही सूजन को भी खत्‍म करने में कारगर है। इसकी पत्तियों को अच्‍छी तरह पीस लें, यह पेस्‍ट सूजन वाले स्‍थान पर लगाने से सूजन ख़त्‍म हो जाती है। जलन वाले स्‍थान पर लगाने से तुरंत जलन में आराम मिलता है। खुजली धीरे-धीरे विदा हो जाती है।

ए‍नीमिया

अक्सर आयरन की कमी से महिलाओं को एनीमिया हो जाती है। उन्‍हें जवाकुसुम के फूल का सेवन करना चाहिए। 40-50 गुड़हल की कलियों को सुखा कर पीस लें तथा उन्हें किसी एयर टाइट डिब्बे में बंद कर रख लें। रोज़ सुबह-शाम यह पाउडर एक कप दूध के साथ लेने से एक माह में एनीमिया से छुटकारा मिल जाता है, इससे स्टेमिना भी बढ़ती है।

अन्‍य प्रयोग

– गुड़हल की पत्तियों को पीसकर उसमें मधु मिलाकर लगाने से मुंहासे ख़त्‍म हो जाते हैं।

– किडनी व डिप्रेशन की समस्‍या में इसका सेवन लाभकारी है।

– गुड़हल के पत्‍तों को चबाने से मुंह में छाले ठीक हो जाते हैं।

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