आमतौर पर किडनी यानी गुर्दा की किसी भी समस्‍या यानी छोटी से छोटी समस्‍या में भी व्‍यक्ति घबरा जाता है। कारण यह कि यदि यह समस्‍या बढ़ी तो फिर किडनी ट्रांसप्‍लांट के अलावा कोई उपाय नहीं है। इसमें कई तरह की समस्‍या आती है, जैसे सूजन, इंफ़ेक्‍शन आदि। ख़ासतौर से क्रोनिक नेफाइटिस की तकलीफ़। गुर्दे की सूजन होने पर तेज़ दर्द, पेशाब में जलन आदि समस्याएँ होती है। इसे ख़त्म करना बहुत आसान नहीं होता है। कभी-कभी ये समस्‍याएँ छह माह या एक साल दवा कराने के बाद ख़त्म हो जाती हैं और कभी-कभी बहुत परेशान करती हैं।

गुर्दे की सूजन

ऐसे ही एक व्‍यक्ति को क्रोनिक नेफाइटिस की तक़लीफ़ थी। उन्‍होंने बहुत दवा कराई लेकिन कोई आराम नहीं हुआ। बहुत तेज़ दर्द होता था, बिस्‍तर पर पड़े रहते थे। जब दर्द बहुत ज़्यादा होता था तो रात को इंजेक्‍शन लगाना पड़ता था, सेंकाई करनी पड़ती थी, तब जाकर सो पाते थे। यह क्रम दस-पंद्रह साल से था। उनकी ज़िंदगी केवल दवा पर निर्भर थी। दवा खा रहे थे लेकिन मर्ज जाने का नाम नहीं ले रहा था। वह स्‍वयं एलोपैथ के चिकित्‍सक थे, उनका होम्‍योपैथ पर भरोसा नहीं था। इसलिए एलोपैथ का ही सहारा लिया था।

गुर्दे की सूजन

मित्र की सलाह

उनके एक मित्र ने जबरदस्‍ती एक बड़े होम्‍योपैथिक चिकित्‍सक को दिखाने के लिए प्रेरित किया और ले जाकर दिखाए। वह इस शर्त पर दिखाने को तैयार हुए कि एलोपैथिक दवा छोड़ेंगे नहीं, साथ में होम्‍योपैथिक दवा खा लेंगे। होम्‍योपैथिक चिकित्‍सक ने भी उनकी यह शर्त मान ली। लेकिन उन्‍होंने कहा कि आज आप कोई दर्द की दवा या इंजेक्‍शन नहीं लेंगे। उन्‍होंने कहा कि रात को बिना इंजेक्‍शन लगाए मैं सो नहीं पाता हूं। चिकित्‍सक ने कहा कि आप इसकी चिंता न करें, आपको दर्द नहीं होगा।

होम्योपैथिक दवा का असर

चिकित्‍सक ने उन्‍हें ‘केन्थरिस 1000‘ की दो पुड़िया दी और कहा कि एक पुड़िया अभी खा लीजिए और एक पुड़िया आधा घंटे के बाद। साथ ही उन्‍होंने ‘मेग्नेशियाफांस 6 एक्स‘ की 15-20 गोलियाँ दी और कहा कि इसे आधा कप गुनगुने पानी में घोल कर रख लीजिएगा और जब दर्द हो तो दो-दो चम्मच दस-दस मिनट पर पी लिजिएगा और सुबह एक बार फिर मेरे पास आ जाइएगा। सुबह जब आए तो पूरी तरह ठीक थे। दर्द ग़ायब हो गया था। वे ख़ुद होम्‍योपैथ के इस चमत्‍कार से हतप्रभ थे। न तो रात को उन्‍हें इंजेक्‍शन लेना पड़ा और न ही सेंकाई करनी पड़ी। रात भर आराम से सोये। इसके बाद चिकित्‍सक ने उन्‍हें “वेर्वेरिस वल्गेरिस” मूल अर्क की 5-5 बूँद दिन में दो बार एक माह तक लेने के लिए दिया।

इसके बाद दवा बंद कर दी। उनका दर्द ग़ायब हो गया था, बीमारी विदा हो गई थी। जिसे वे एलोपैथ से दस-पंद्रह वर्षों में ठीक नहीं कर पाए, वह होम्‍योपैथ ने एक माह में ही ठीक कर दिया।