गेहूँ का ज्‍वारा जहां कैंसर सहित अनेक रोगों का कारगर इलाज है वहीं यदि स्‍वस्‍थ व्‍यक्ति इसका सेवन करे तो कई प्रकार के रोगों से हमेशा बचा रहेगा। इसमें अद्भुत शक्ति है। मात्र एक सप्‍ताह के इसके सेवन से अपनी खोई हुई ताकत पाई जा सकती है। दूध, दही व मांस से भी यह कई गुना गुणकारी है। इसमें कार्बोहाइड्रेड, विटामिन, क्षार, श्रेष्‍ठ प्रोटीन सहित शरीर के लिए जरूरी सभी पोषक तत्‍व मौजूद होते हैं। एक तो यह सबसे सस्‍ता, सबसे उत्तम व सबसे ज्‍यादा सुलभ है। गरीब से गरीब आदमी भी प्रकृति की अनमोल भेंट का उपयोग कर अपना जीवन संवार सकता है। जीव वैज्ञानिकों ने गेहूँ के ज्वारे को हरा लहू कहा है। प्रकृति के गर्भ में छिपी औषधियों का यह अक्षय भंडार है।

विदेशी महिला चिकित्‍सक डॉ. एन. विगमोर ने गेहूँ ज्वारों के रस से अनेक असाध्य रोगों का सफल इलाज किया है। इसके सेवन से 350 से अधिक रोग छू-मंतर हो जाते हैं।

गेहूँ के ज्वारे
Wheatgrass ke fayde in Hindi

गेहूँ के ज्वारे या उसके रस के सेवन से मूत्राशय की पथरी, डायबिटीज, पीलिया, पायरिया व दांत के अन्‍य रोग, कब्‍ज, लकवा, दमा, पेट दुखना, अपच, गैस, बिटामिन ए व बी की कमी से उत्‍पन्‍न रोग, गठिया, जोड़ों में सूजन, संधिशोध, स्किन एलजी सम्बंधी बारह वर्ष पुराने रोग, आंखों की दुर्बलता, बालों का पकना, झड़ना, जली त्‍वचा, घाव आदि शीघ्रता से ठीक होते हैं। हजारों लोगों ने इसके सेवन से अपना रोग ठीक किया है।

कैसे उगाएं गेहूँ के ज्वारे

चौड़े मुंह वाले थोडे गहरे मिट्टी के नौ नए पात्र खरीद कर ले आएं। उसे खाद मिली मिट्टी से भर दें। रासायनिक खाद का उपयोग नहीं करना है। पात्रों को ऐसी जगह स्‍थापित करें जहां सीधे सूर्य की रोशनी न आती हो। पहले दिन एक पात्र में जितना गेहूँ बोया जा सके, बो दें। दूसरे दिन दूसरे, तीसरे दिन तीसरे इसी तरह रोज एक पात्र में गेहूँ बोते जाएं। नौंवे दिन जब आप नौवें पात्र में गेहूँ बो रहे होंगे तो पहले पात्र का ज्‍वारा तैयार हो चुका होगा। उसे जड़ से कैंची की सहायता से काट लें या जड़ से उखाड़ लें। उसका रस निकालें और बिना विलंब किए धीरे-धीरे पीना शुरू करें। रस निकालने के बाद जितना देर करेंगे, उतना ही उसके पोषक तत्‍व नष्‍ट होते जाएंगे। पहले दिन का पात्र जो अब खाली हो चुका है उसमें पुन: गेहूँ बो दें। यह क्रम चलता रहेगा।

कैसे निकालें रस

ज्‍वारों को काटने या उखाड़ने के बाद तुरंत धोकर उन्‍हें कूटकर तत्‍काल कपड़े में रखकर निचोड़ लें, पुन: कूटें और निचोड़ें। ऐसा तीन बार करें। इससे उसका अधिकांश रस निकल आएगा। जूसर से भी इसका रस निकाला जा सकता है। रस निकालने के बाद इसे पीने में जरा भी विलंब न करें, धीरे-धीरे पीयें। रस निकलते ही उसके पोषक तत्‍व नष्‍ट होने लगते हैं, यदि रस निकालकर तीन घंटे छोड़ दिया जाए तो उसके सभी पोषक तत्‍व नष्‍ट हो जाएंगे। इसे सुबह खाली पेट पीना ज्‍यादा लाभकारी है। वैसे दिन में इसका सेवन कभी भी किया जा सकता है। रस पीने के आधा घंटे पहले व आधा घंटे बाद कुछ न खाएं।

गेहूँ के ज्वारे का सेवन

– शुरुआत में कई लोगों को उल्‍टी हो जाती है, उबकाई आने लगती है या सर्दी हो सकती है। यह इस बात का संकेत है कि आपके शरीर में विष एकत्रित हो चुका है, वह निकल रहा है। इसलिए उल्‍टी, मिचली या सर्दी होने से घबराना नहीं चाहिए।

– ज्वारों का रस निकालते समय खाने वाले पान के पत्ते, शहद, अदरक आदि मिलाए जा सकते हैं। इससे स्‍वाद व गुण दोनों बढ़ जाते हैं। भूलकर भी इसमें नमक व नींबू का रस नहीं मिलाना चाहिए।

– यदि ज्‍वारे का रस निकालने में दिक्‍कत हो रही है तो उसे चबाकर भी खा सकते हैं। इससे मसूढ़े व दांत मजबूत होंगे, मुंह से यदि दुर्गंध आती है तो दूर हो जाएगी।

– सभी उम्र के लोग इसका उपयोग कर सकते हैं। नवजात शिशुओं को प्रतिदिन पांच बूंद देना चाहिए। मृत्‍यु शैय्या पर पड़े रोगियों को प्रतिदिन चार बड़े गिलास ज्‍वारों का रस भरकर दिया जा सकता है।

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