होम्‍योपैथ एक ऐसी चिकित्‍सा पद्धति है जो हमारे आचरण व व्‍यवहार की भी चिकित्‍सा करती है। यह केवल घोषित बीमारियों भर का कारगर इलाज नहीं करती बल्कि बीमारियों के भ्रम का भी निवारण करती है। इसीलिए कहा जाता है कि जहाँ एलोपैथ की सीमा ख़त्‍म होती है, वहाँ होम्‍योपैथ की सीमा शुरू होती है। इसकी दवाएँ हमारे मन, भाव व विचारों तक को प्रभावित करती हैं। इसलिए इस पैथी में भ्रम का भी सफलता पूर्वक इलाज किया जा सकता है। भ्रम चाहे जैसा भी हो। इसमें एक बात का ध्‍यान रखना जरूरी होता है कि चिकित्‍सक जो भी पूछे, बिना छिपाये उसे पूरी बात बता देनी चाहिए, क्‍योंकि इस पैथी में रोग की हिस्‍ट्री व लक्षणों को जानना बहुत ज़रूरी होता है। यदि चिकित्‍सक ने रोग पकड़ लिया तो दवा को असर करने में देर नहीं लगती है।

गर्भवती होने का भ्रम

महिलाओं में कभी-कभी यह समस्‍या उत्‍पन्‍न हो जाती है, हालांकि यह बहुत रेयर होती है। यह बीमारी एक हज़ार में किसी एक महिला को हो सकती है। इस बीमारी में महिला को गर्भवती होने का भ्रम हो जाता है। उसे लगता है कि उसका पेट बढ़ रहा है, पेट में बच्‍चा हिल-डुल रहा है। स्‍तनों में वृद्धि हो रही है। जबकि वास्‍तव में ऐसा कुछ होता नहीं। मिचली व उल्‍टी आदि की समस्‍याएँ होने लगती हैं। महिला के मस्तिष्‍क में इस तरह की भावना प्रबल हो जाती है और उसे गर्भवती होने का भ्रम होने लगता है। भ्रम के अनुसार ही उसका शरीर भी प्रतिक्रिया करने लगता है। इसे चिकित्‍सा की भाषा में स्यूडोसाइसिस (अंग्रेजी: Pseudocyesis aka False Pregnancy) कहा जाता है।

garbhvati hone ka bhram

समस्या का जन्म और इलाज

ऐसी ही समस्‍या एक तीस-पैंतीस वर्ष की महिला को उत्‍पन्‍न हो गई थी। उन्‍हें लगता था कि वह गर्भवती हैं। अल्‍ट्रासाउंड कराया गया लेकिन उसमें कुछ आया नहीं। फिर भी उनका यह विश्‍वास कमज़ोर नहीं हुआ और वह रट लगाए रहती थीं कि वह गर्भवती हैं। चिकित्‍सक ने साफ़ कह दिया कि आपको कोई गर्भ नहीं है। लेकिन वह मानने को तैयार नहीं थीं क्‍योंकि उन्‍हें पेट में बच्‍चे के हिलने-डुलने का एहसास होता था। उनके पति ने इस बात को समझा और इस भ्रम के इलाज के लिए एक होम्‍योपैथिक चिकित्‍सक से संपर्क किया।

उस महिला को बताया गया कि एलोपैथ के चिकित्‍सक आपको समझ नहीं पा रहे हैं, चलिए एक बड़े होम्‍योपैथिक चिकित्‍सक से आपको दिखाते हैं, वह तैयार हो गईं। अल्‍ट्रासाउंट वगैरह देखने और उस महिला से बातचीत करने के बाद होम्‍योपैथिक चिकित्‍सक की समझ में बात आ गई और उन्‍होंने उस महिला को ‘कांक्यूलस इण्डिका 1000‘ की दो खुराक आधे-आधे घंटे पर देने के लिए कहा। उनका यह भ्रम तीन दिन में समाप्‍त हो गया।