वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों में चुंबक चिकित्सा ‌_ Magnet therapy पद्धति का महत्‍वपूर्ण स्‍थान है। इस पद्धति में मुख्‍यत: दो प्रकार से चिकित्सा की जाती है। विशेष अंगों के लिए अलग तथा सामान्‍य रोगों के लिए अलग विधि से चुंबक का प्रयोग किया जाता है। इस विधि में दवा खाने की ज़रूरत नहीं पड़ती केवल चुंबक लगाने और चुंबकांकित जल पीने मात्र से ही रोग विदा हो जाते हैं।

चुंबक चिकित्सा
Magnet therapy

चुंबक चिकित्सा से रोगों का उपचार

सभी रोगों का इलाज

यदि शरीर में रक्‍त संचार, स्‍नायु व्‍यवस्‍था, पाचन क्रिया, श्‍वांस क्रिया, मल-मूत्र व्‍यवस्‍था, प्रजनन व्‍यवस्‍था सुचारु रूप से चल रही है तो कोई रोग नहीं होता है। चुंबक चिकित्सा इन व्‍यवस्‍थाओं को नियमित करके रोगों का उपचार करती है। जब ये प्रकियाएं नियमित हो जाती हैं तो कोई भी आंतरिक रोग नहीं होता और मनुष्‍य स्वस्थ रहता है। इसी व्‍यवस्‍था से चुबंक चिकित्सा पद्धति सभी रोगों का इलाज करती है।

कैसे काम करता है चुंबक

मानव शीरीर के तलवों व हथेलियों से शरीर की लगभग सभी नाड़ियां जुड़ी होती हैं। तलवों व हथेलियों में स्‍नायु पुंज होते हैं। जो भी नाड़ियां वहां तक पहुंचती है उनका फैलाव पूरे शरीर में होता है। इसलिए चुंबक का प्रयोग तलवों व हथेलियों में किया जाता है ताकि उसका प्रभाव नाड़ियों के माध्‍यम से समूचे शरीर में पहुंच सके।

कब, कहां और कैसे लगाएं चुंबक

चुंबक लगाते समय यह जानना बहुत ज़रूरी है कि हथेलियों व तलवों में चुंबक कब और उनका कौन सा ध्रुव लगाएं। रोग यदि शरीर के ऊपरी भाग में है तो चुबंक हथेलियों में और यदि निचले भाग में है तो तलवों में चुंबक का प्रयोग किया जाता है। रोग यदि पूरे शरीर में हो या शरीर के अधिकांश हिस्‍से में व्‍याप्‍त हो तो पहले दिन हथेलियों में और दूसरे दिन तलवों में चुंबक लगाया जाता है। यदि दिन में दो बार चुंबक लगाना आवश्‍यक हो तो सुबह हथेलियों में और शाम को तलवों में लगाना चाहिए।

अंग विशेष में रोग का उपचार

किसी अंग विशेष में कोई रोग है तो प्रभावित अंग पर चुंबक का ध्रुव लगाया जाता है। अंग पर सीधे चुंबक लगा सकते हैं या उसके ऊपर कपड़ा रखकर भी चुंबक लगा सकते हैं। यदि यह पता हो कि उक्‍त रोग कीटाणुओं के कारण है तो रोगग्रस्‍त अंग पर चुंबक का उत्‍तरी ध्रुव अन्‍यथा दक्षिणी ध्रुव लगाना चाहिए। यदि रोगग्रस्‍त अंग पर चुंबक लगाने से दर्द या पीड़ा होती हो तो चुंबक उस अंग के पास वहां लगाना चाहिए जहां छूने पर दर्द न हो। दोनों ध्रुवों का प्रयोग एक साथ लगाने की आवश्‍यकता हो तो दोनों ध्रुव थोड़ी-थोड़ी दूर पर लगा देना चाहिए या चुंबक का एक ध्रुव रोगग्रस्‍त अंग पर और दूसरा ध्रुव उसी अंग की तरफ़ के हथेली या तलवे में लगा देना चाहिए।

पूरे शरीर में रोग का उपचार

जब रोग पूरे शरीर या शरीर के अधिकांश भाग में व्‍याप्‍त हो तो सामान्‍य उपचार देना चाहिए। ऐसी स्थिति में चुंबक चिकित्सा में चुंबक के दोनों ध्रुव हथेलियों या तलवों में लगा दिए जाते हैं। इसके लिए दो चुंबक चाहिए। चूंकि हथेलियों और तलवों का संबंध मस्तिष्‍क व हृदय से होता है। स्‍नायु व रक्‍तवाहिनी नाड़ियां इसका संबंध पूरे शरीर से बना देती हैं।

1. कमर दर्द

कमर के ऊपरी या निचले भाग में दर्द होने पर ऊपरी भाग में चुंबक का उत्तरी ध्रुव व निचले भाग में दक्षिणी ध्रुव लगाना चाहिए। यदि दाएं या बाएं तरफ़ दर्द हो तो दाएं तरफ़ उत्‍तरी ध्रुव व बाएं तरफ़ दक्षिणी ध्रुव लगाना चाहिए। साथ ही चुंबक के दोनों ध्रुवों से तैयार किया गया पानी भी पिलाना चाहिए।

चुम्बक चिकित्सा

2. हाई ब्‍लड प्रेशर

उच्च रक्तचाप का इलाज भी चुंबक चिकित्सा द्वारा संभव है। यदि हाई ब्‍लडप्रेशर है तो ज़्यादा शक्ति के चुंबक दोनों हथेलियों पर 5-6 मिनट तक रखना चाहिए। यदि ज़्यादा शक्ति के चुबंक न उपलब्‍ध हों तो मध्‍यम शक्ति के चुंबक दस मिनट तक रखना चाहिए। यह इलाज सुबह के समय ज़्यादा उपयुक्‍त है। चुंबकों से बने बाजूबंद दायीं कलाई पर बांधने से भी लाभ होता है। इन्‍हें एक से दो घंटे तक बांधना चाहिए। साथ ही चुंबक के दोनों ध्रुवों से तैयार किया गया पानी भी पिलाएं।

3. लो ब्‍लडप्रेशर

यदि लो ब्‍लडप्रेशर की शिक़ायत है तो ज़्यादा शक्ति वाले चुबंकों को दोनों हथेलियों पर 15-20 मिनट या मध्‍यम शक्ति के चुंबकों को आधा घंटा रखा जाना चाहिए। चुंबकों से बने बाजूबंद बायीं कलाई पर बांधने से भी लाभ होता है। इन्‍हें एक से दो घंटे तक बांधना चाहिए। साथ ही चुंबक के दोनों ध्रुवों से तैयार किया गया पानी भी पिलाएं।

4. पेट दर्द

पेट दर्द के रोगी को सुबह और शाम दस मिनट तक ज़्यादा शक्ति के चुंबक अपनी दोनों ह‍थेलियों पर रखना चाहिए। तत्‍पश्‍चात चीनी मिट्टी के बने अर्धचंद्राकार चुंबक अपनी दोनों नासिकाओं से लगाना चाहिए। साथ ही ठंडी चीज़ें खाने-पीने व नहाने से परहेज़ करना चाहिए। चुंबक के दक्षिणी ध्रुव से तैयार किया गया पानी पीने से शीघ्र लाभ होता है।

5. आंखों का सूजन

चीनी मिट्टी के बने अर्धचंद्राकार चुंबक दोनों आंखों पर लगाने से सूजन कम होता है। यदि एक ही आंख में सूजन हो या एक में कम और दूसरी में ज़्यादा हो तो भी दोनों आंखों पर चुंबक लगाना चाहिए। चुंबक लगाने की अवधि आठ से दस मिनट रखनी चाहिए। साथ ही उस चुंबक के उत्‍तरी ध्रुव से तैयार किए गए पानी से आंखों को धोना चाहिए और पीना चाहिए।

6. घट्टा

कभी-कभी पैर के तलवों में घट्टे बन जाते हैं, उन्‍हें गुरखुल भी कहते हैं। इनसे निजात के लिए ज़्यादा शक्ति या मध्‍यम शक्ति के चुंबकों को पैर के तलवों में दिन में दो बार लगाना चाहिए। साथ ही चुंबक के उत्‍तरी ध्रुव से तैयार किया गया पानी पीयें और उसी से घट्टों को धोएं भी।

7. डायबिटीज

मुख्‍यत: दो प्रकार का शुगर रोग होता है।

एक में पेशाब के साथ शक्‍कर आता है और दूसरे में बहुत ज़्यादा पेशाब लगता है। इस रोग का मुख्‍य कारण पेन्क्रियाज का ठीक से काम न करना है। शुगर के रोगी को सुबह दस मिनट तक ज़्यादा शक्ति के चुंबक अपनी हथेलियों पर रखने चाहिए।

पानी को कैसे चुंबकांकित करें

चुंबक चिकित्सा का लाभ लेना हो तो पानी को चुंबकांकित करने के लिए शीशे की एक बोतल में पानी भरकर ढक्‍कन ठीक से बंद कर दें। उसपर चुंबक इस तरह लगाए कि एक ओर उत्‍तरी व दूसरी तरफ़ दक्षिणी ध्रुव आए। चुंबकों का उत्‍तरी ध्रुव उत्‍तर तथा दक्षिणी ध्रुव दक्षिण दिशा में होना चाहिए। ये चुंबक लगभग 2000 से 3000 गोस की शक्तिवाले होने चाहिए। सामान्‍यतया 24 घंटों में पानी चुम्बकांकित हो जाता है। यदि बहुत आवश्‍यक है तो 12-14 घंटे बाद भी इसका उपयोग किया जा सकता है। चुंबकांकित पानी दिन में चार बार आधा-आधा गिलास लें, बुखार में ज़्यादा बार लें। बच्‍चों को चौथाई गिलास दें।

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