मस्तिष्‍क हमारे शरीर का एक महत्‍वपूर्ण अंग है। सब स्‍वस्‍थ रहे और मस्तिक काम न करे तो पूरा शरीर बेकार हो जाता है। हमारे मस्तिष्‍क में करोड़ों तंतु होते हैं, हर एक तंतु बाल की मोटाई से भी सौ गुना कम पतले होते हैं। इन तंतुओं में यदि कोई क्षति हुई तो उसे ठीक कर पाना बहुत आसान नहीं होता है। इसीलिए अभी तक मस्तिक की पूरी सर्जरी विकसित नहीं हो पाई है। इसे स्‍वस्‍थ रखना हमारा कर्तव्‍य भी है और ज़रूरत भी। इसके लिए हमें पोषक तत्‍वों से भरपूर भोजन, पर्याप्‍त आक्‍सीजन व आराम की सख़्त ज़रूरत पड़ती है। ध्‍यान से मस्तिष्‍क को बहुत ज़्यादा आराम मिलता है। जब मस्तिष्‍क को पर्याप्‍त आराम, पोषक तत्‍व या पर्याप्‍त ऑक्‍सीजन नहीं मिलता है तो उसे क्षति पहुंचती है, इस क्षति को सेरिब्रल सक्लेरोसिस (Cerebral Sclerosis) कहते हैं।

सेरिब्रल सक्लेरोसिस बीमारी

क्‍या है सेरिब्रल सक्लेरोसिस

सेरिब्रल सक्लेरोसिस मस्तिष्‍क की एक बीमारी है। इसे मस्तिक की क्षति के नाम से भी जाना जाता है। आमतौर पर इस बीमारी में एलोपैथकि दवाओं से कोई लाभ नहीं मिलता है, कारण यह है कि उसकी सही पहचान हो पाना मुश्किल होती है। दवा खाने के बाद भी बीमारी बढ़ती जाती है और व्‍यक्ति असहज होने लगता है। इस बीमारी में अधिकांश मरीज़ों में एक पैर ठंडा व दूसरा गर्म होता है।

सेरिब्रल सक्लेरोसिस का कारण

1- समय से नाश्‍ता न करना इसका कारण हो सकता है। भले ही सुबह भूख न लगी हो लेकिन थोड़ा-बहुत नाश्‍ता जरूर कर लेना चाहिए। नाश्‍ता न करने से मस्तिष्‍क में ब्‍लड शुगर की मात्रा कम हो जाती है और मस्तिष्‍क सुचारु रूप से काम नहीं कर पाता है।

2- ज़्यादा देर तक गर्मी में रहने से मस्तिक को ऑक्‍सीजन पहुंचाने वाली रक्‍त वाहिनियां ठोस हो जाती हैं जिससे मस्तिष्‍क को पर्याप्‍त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाता है और वहां ब्‍लड सर्कुलेशन कम हो जाता है। इससे हमारे मस्तिष्‍क को क्षति पहुंच सकती है।

3- सिगरेट पीने से भी मस्तिष्‍क को क्षति पहुंच सकती है। जब धुंआ हमारे फेफड़े में जाता है तो वहां से रक्‍त के माध्‍यम से वह मस्तिष्‍क तक पहुंचता है, इस वजह से मस्तिक से संबंधित कई बीमारियां हो सकती हैं।

4- अधिक शुगर का सेवन करने से भी पोषक तत्‍व पूरी तरह अवशोषित नहीं हो पाते और मस्तिष्‍क को पर्याप्‍त पोषण नहीं मिल पाता है।

Cerebral Sclerosis Information In Hindi…

5- मस्तिष्‍क को आराम की ज़रूरत होती है। इसे सबसे ज़्यादा आराम ध्‍यान में मिलता है और इसके बाद नींद में। इसलिए पर्याप्‍त नींद न लेने के कारण भी समस्‍या उत्‍पन्‍न हो सकती है।

6- सिर ढककर सोने से बचना चाहिए। जब हम सिर ढककर सोते हैं तो रात को शरीर से निकलने वाला कार्बन डाइ ऑक्‍साइड मस्तिष्‍क में पहुंचकर उसे क्षति पहुंचा सकता है।

7- तबीयत ख़राब होने पर मस्तिष्‍क से संबंधित कार्य नहीं करना चाहिए। उसपर अतिरिक्‍त बोझ पड़ता है और इसका असर मस्तिष्‍‍क पर पड़ने लगता है।

8- नकारात्‍मक सोच से बचने की कोशिश करते हुए मस्तिष्‍क को हमेशा सकारात्‍मक सोच की दिशा में मोड़ना चाहिए, नकरात्‍मकता मस्तिष्‍क को क्षति पहुंचा सकती है।

होम्‍योपैथिक चिकित्‍सा

ऐसी स्थिति में मरीज़ को पहले ‘लायकापोडियम 1000’ की दो पुड़िया दी जा सकती है, बाद में ‘जेल्सीमियम 30’ और ‘काली फांस 30’ की दो-दो खुराकें दी जानी चाहिए। इसके बाद ‘नियोडायनम आक्साइड 30’ तथा ‘ऐर्चियम मेटेलीकम30’ को लंबे समय तक दिया जाता है। इन दवाओं से शरीर में धीरे-धीरे शक्ति का संचार होगा, ताकत आएगी और बीमारी विदा होने लगेगी। ये दवाइयां स्‍वयं खरीदकर खाने से परहेज करें, यह सूचना सिर्फ जानकारी के लिए है। किसी तरह की तकलीफ होने पर योग्‍य चिकित्‍सक से परामर्श लेकर ही दवाओं का सेवन करना चाहिए।