1952 में जर्मनी के डॉ. योहाना बुडविज ने एक कैंसररोधी तकनीक विकसित की जो ठंडी विधि से निकाले गए अलसी के तेल व पनीर के मिश्रण तथा कैंसररोधी फलों व सब्ज़ियों पर आधारित है। बाद में यह तकनीक बुडविज प्रोटोकॉल के नाम से जानी गई। इस विधि यानि बुडविज आहार से लगभग नब्‍बे प्रतिशत कैंसर रोगियों का कैंसर ठीक होने में सफलता मिली।

डॉ. योहाना बुडविज के अनुसार आहार में शामिल पदार्थ ताज़े, इलेक्ट्रॉन्स युक्त व जैविक होने चाहिए। इस विधि में ज़्यादातर खाद्य पदार्थ सलाद व जूस के रूप में लिये जाते हैं। इस विधि में छोटी-छोटी बातें भी महत्वपूर्ण हैं। ज़रा सी असावधानी बुडविज आहार के औषधीय प्रभाव को कम कर सकती है।

Dr Johanna Budwig
Dr Johanna Budwig (30 September 1908 – 19 May 2003)

बुडविज आहार से कैंसर का उपचार

– बुडविज आहार के रूप में प्रात:काल सॉवरक्रॉट का एक गिलास रस या छाछ लेना चाहिए। सॉवरक्रॉट भारत में नहीं होता, इसकी जगह खमीर की हुई पत्‍तागोभी का रस ले सकते हैं। सॉवरक्रॉट में पर्याप्‍त कैंसर रोधी तत्‍व व विटामिन सी मिलता है।

– नाश्‍ता करने से आधा घंटा पूर्व बिना चीनी वाली गर्म हर्बल या ग्रीन टी लें। चाय को मीठा करने के लिए स्‍टेविया का अर्क मिला सकते हैं। इसका शक्‍कर डॉ. स्‍वीट के नाम से बाजार में उपलब्‍ध है।

– इसके बाद मरीज को “ॐ खंड” लेना है जो अलसी के तेल व घर पर बनाए गए वसा रहित पनीर या दही से बने पनीर को मिलाकर बनाया जाएगा। एक घंटे तक दही को कपड़े में बांधकर लटका दें ताकि उसका अधिकांश पानी निकल जाए। गाय या बकरी का दूध पनीर बनाने के लिए सर्वोत्‍तम है। इसे ताज़ा बनाकर ख़ूब चबा-चबाकर खाएं।

– 45ml अलसी का तेल (लगभग तीन बड़ा चम्‍मच) व 90 ग्राम पनीर (लगभग छह बड़ा चम्‍मच) मिलाकर बिजली से चलने वाले हेंड ब्‍लेडर में एक मिनट तक मिक्‍स करें। यह मिक्‍स होकर क्रीम की तरह हो जाएगा। मिश्रण में तेल दिखाई नहीं देना चाहिए। यदि ब्‍लेंड करते समय मिश्रण गाढ़ा लगे तो 2 चम्मच अगूंर का रस या दूध मिला लें। अब 2 बड़ी चम्मच अलसी ताजा पीस कर मिलायें। मिश्रण में स्ट्राबेरी, रसबेरी, चेरी, जामुन आदि फल मिलायें। यदि चाहें तो आधा कप कटे हुए मेवे खुबानी, बादाम, अखरोट, किशमिश, मुनक्के आदि मिला सकते हैं। मेवों में सल्फर युक्त प्रोटीन,वसा और विटामिन होते हैं। बुडविज आहार में अलग-अलग दिन अलग-अलग फल, मेवे व मसाले प्रयोग करें।

ॐ खण्ड को बनाने के बाद तुरंत सेवन कर लेना चाहिए, क्‍योंकि इसके बनने दस मिनट बाद इसकी गुणवत्‍ता में कमी आ जाती है। स्वाद के लिए वनिला, दाल चीनी,ताजा काकाओ, कसा नारियल या नींबू का रस मिलाया जा सकता है। मूंगफली कतई न मिलाएं।

Budwig Diet for Cancer Treatment

बुडविज आहार
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– एक दिन में तीन से पांच चम्‍मच से ज़्यादा मधु न लें। जो मधु लें वह प्राकृतिक होना चाहिए। दिन भर में 6 या 8 खुबानी के बीज जरूर लें, इनमें मौजूद विटामिन बी-17 कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करता है।

– कुछ और खाने की इच्छा हो तो टमाटर, मूली, ककड़ी आदि का सलाद व कुटू, बाजरा, ज्‍वार आदि के साबुत अनाज की बनी एक रोटी ले सकते हैं। बुडविज आहार में कुटू सबसे अच्‍छा अन्‍न है। गेहूँ में मौजूद ग्‍लेटून इसे जल्‍दी पचने नहीं देता, इसलिए इसका प्रयोग कम से कम करें।

– नाश्‍ता के बाद एक घंटे तक कुछ न लें, इसके बाद ताज़े गाजर, मूली, लौकी, टमाटर, चुकंदर, करेला, पालक व गेहूं के जवारों आदि का ताज़ा रस लें। गाजर और चुकंदर कैंसररोधी होते हैं और इनसे यकृत को ताक़त मिलती है।

दोपहर का भोजन

दोपहर भोजन से आधा घंटे पहले एक गर्म हर्बल चाय लें। कच्ची सब्ज़ियाँ जैसे चुकंदर, मूली, गोभी, गाजर, शलगम, हरी गोभी, शतावर आदि का सलाद घर पर बनी सलाद डेसिंग या ऑलियोलक्स के साथ लें। डेसिंग को 1-2 चम्मच अलसी का तेल व 1-2 चम्मच पनीर के मिश्रण में एक चम्मच सेब का सिरका या नींबू का रस व मसाले डालकर बनाएं।

– यदि मीठा सलाद खाने का मन हो तो अलसी के तेल में अंगूर, संतरे या सेब का रस या मधु मिला सकते हैं। इसके बाद भी यदि कुछ खाने की इच्‍छा है तो उबली या भाप में पकी सब्ज़ियों के साथ एक दो मिश्रित आटे की रोटी ले सकते हैं। सब्ज़ियों व रोटी पर ऑलियोलक्स (इसे नारियल, अलसी के तेल, प्याज व लहसुन से बनाया जाता है) भी डाल सकते हैं। मसाले, सब्‍ज़ी व फल बदल-बदल कर लेना चाहिए। रोज एक चम्मच कलौंजी का तेल भी लें। बुडविज आहार तनाव रहित होकर खूब चबा-चबा कर खाएं।

कैंसर का उपचार
Cancer treatment Budwig diet

दूसरी ख़ुराक़

ॐ खंड की दूसरी ख़ुराक़ में भी नाश्‍ते की भांति ही 3 बड़ी चम्मच अलसी के तेल व 6बड़ी चम्मच पनीर के मिश्रण में ताज़ा फल, मेवे व मसाले मिलाकर लें। यह अत्यंत आवश्यक है। इस बार पिसी अलसी नहीं डालना है।

दोपहर बाद

अनन्‍नास, चेरी या अंगूर के रस में एक या दो चम्मच अलसी पीस कर मिलाएं और खूब चबा कर लार में मिलाकर धीरे धीरे चुस्कियाँ ले लेकर पीयें। चाहें तो आधा घंटे बाद एक गिलास रस और ले सकते हैं।

तीसरे पहर

पपीता या ब्लू बेरी (नीली जामुन) के रस में एक या दो चम्मच अलसी को ताजा पीस कर डालें और खूब चबा-चबा कर, लार में मिलाकर धीरे-धीरे चुस्कियाँ ले लेकर पीयें। पपीते में भरपूर एंजाइम होते हैं और इससे पाचन शक्ति भी ठीक होती है।

शाम का भोजन

बिना तेल डाले सब्ज़ियों का शोरबा या अन्य विधि से सब्ज़ियाँ बनायें। मसाले भी डालें। पकने के बाद ईस्ट फ़्लेक्स और ऑलियोलक्स डालें। ईस्ट फ़्लेक्स में मौजूद विटामिन-बी शरीर को ताक़त देते हैं। टमाटर, चुकंदर, गाजर, प्याज, शिमला मिर्च, शतावर, पालक, पत्‍ता गोभी, पालक, गोभी, हरी गोभी यानी ब्रोकली आदि सब्ज़ियों का सेवन करें। शोरबे के साथ उबले कूटू, रतालू, भूरे चावल, आलू, मसूर, राजमा, मटर की साबुत दालें या मिश्रित आटे की रोटी ले सकते हैं।

– रोगी की स्थिति यदि बहुत गंभीर हो और भोजन ले पाने में उसे परेशानी हो रही हो तो अलसी के तेल का एनीमा दें। डा. बुडविज ऐसे रोगियों के लिए अस्थाई आहार लेने की सलाह देती थी। अस्थाई आहार में रोगी को सामान्य भोजन के अलावा कुछ दिनों तक पिसी हुई अलसी और पपीते, अंगूर व अन्य फलों का रस दिया जाता है। कुछ दिनों के बाद उसकी पाचन शक्ति ठीक हो जाने पर सम्पूर्ण बुडविज आहार शुरू किया जाता है। यह अस्थाई आहार यकृत और अग्नाशय कैंसर के रोगियों को भी दिया जाता है, क्योंकि वे भी शुरू में सम्पूर्ण बुडविज आहार नहीं पचा पाते हैं।

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