बथुआ एक घास है जिसका उपयोग साग के रूप में किया जाता है। इसे अंग्रेजी में Lamb’s Quarters कहते हैं। यह खेतों में बिना बोए उगता है। गेहूं बोने के बाद जब उगता है तो उसके साथ खेत में बथुआ भी बड़े पैमाने पर उगता है। एक तो पोषक तत्‍वों से भरपूर होने के नाते इसका साग या रायता बनाकर खाना स्‍वास्‍थ्‍यवर्धक है और दूसरे इसे उखाड़ने से खेत साफ़ हो जाता है और गेहूं को वृद्धि के लिए जगह मिल जाती है। जिस मिट्टी में नाइट्रोजन ज़्यादा होता है वहां यह ज़्यादा उगता है। इसमें विटामिन ए, कैल्‍शियम, फॉस्‍फोरस और पोटैशियम प्रचुर मात्रा में होता है। इसका सेवन कई प्रकार की बीमारियों को दूर भगाता है। अनियमित माहवारी, कब्ज़, मुंह के रोग व बालों के लिए यह बहुत ही लाभकारी है।

बथुआ

बथुआ खाने से लाभ

बालों के लिए स्‍वास्‍थ्‍यवर्धक

बालों का प्राकृतिक रंग कायम रखने के लिए बथुआ बहुत ही लाभकारी है। इसमें आंवले से कम गुण नहीं होते हैं। इसमें विटामिन व खनिज तत्‍व आवंले से ज़्यादा पाए जाते हैं। आयरन, फास्फोरस व विटामिन ए व डी प्रचुर मात्रा में मिलते हैं।

मुख रोगों में लाभकारी

यह मुख रोगों में बहुत लाभकारी है। इसकी पत्तियों को कच्‍चा चबाने से मुंह का अल्‍सर, सांस की बदबू, पायरिया व दांत से संबंधित रोगों में बहुत लाभ होता है।

कब्ज़ से दिलाए मुक्ति

इसका नियमित सेवन कब्ज़ से मुक्ति दिला देता है। साथ ही गठिया, लकवा, गैस आदि की समस्‍या में भी अत्‍यंत लाभकारी है।

पाचन शक्ति ठीक करे

बथुआ का सेवन पाचन शक्ति को बढ़ाता है। इसके सेवन से भोजन आसानी से पच जाता है, खुलकर भूख लगती है, खट्टी डकार व पेट फूलने जैसी समस्‍याएं नहीं आती हैं।

बवासीर में लाभकारी

बवासीर की समस्‍या से परेशान हैं तो नियमित कुछ दिन तक सुबह-शाम बथुआ का सेवन कर लें। काफी लाभ मिलेगा। तिल्ली बढ़ने पर काली मिर्च और सेंधा नमक के साथ उबला हुआ बथुआ का सेवन करने से धीरे-धीरे तिल्ली घट जाती है।

पेट के कीड़े

बच्‍चों या बड़ों किसी के लिए बथुआ अत्‍यंत लाभकारी है। इसका कुछ दिन लगातार सेवन करने से पेट के कीड़े मर जाते हैं।

पीलिया

पीलिया होने पर समान मात्रा में बथुआ व गिलोय का रस मिलाकर 25-30 ग्राम दिन में दो बार लेने से फ़ायदा होता है।

प्रसव संक्रमण

प्रसव के बाद यदि संक्रमण हो गया है तो दस ग्राम बथुआ, अजवाइन, मेथी व गुड़ लेकर मिला लें। इसे 10-15 दिन तक नियमित खाने से बहुत लाभ होगा।

मूत्र संक्रमण

मूत्र संक्रमण के चलते यदि परेशानी है, पेशाब रुक-रुक कर आ रहा है या जलन हो रही है तो 10 ग्राम बथुआ की पत्‍ती लें और उसमें 50 मिली पानी मिलाकर नियमित सेवन करें।

ख़ून को करे साफ़

चार-पांच नीम की पत्तियों के रस के साथ बथुआ का सेवन ख़ून को साफ़ व शुद्ध करता है।

अनियमित मासिक धर्म

अनियमित मासिक धर्म के लिए बथुआ बहुत लाभकारी है। इसके बीज व सोंठ मिलाकर पाउडर बना लें। चार सौ ग्राम लीटर पानी में 15-20 ग्राम पाउडर उबालें, जब पानी 100 ग्राम रह जाए तो उसे छानकर दिन में दो बार पियें। इसका कुछ दिन नियमित सेवन करने से माहवारी नियमित हो जाती है।

ज़्यादा सेवन नुक़सानदायक

बथुआ का सेवन कम मात्रा में करना चाहिए। इसका ज़्यादा सेवन नुक़सानदायक हो सकता है। इसमें ऑक्‍जेलिक एसिड का स्‍तर बहुत ज़्यादा होता है, इसलिए ज़्यादा खाने से डायरिया हो सकता है। गर्भवती महिलाओं को भी इसका सेवन नहीं करना चाहिए, इसके सेवन से गर्भ गिरने की आशंका रहती है।