प्रकृति ने हमें पेड़-पौधों के रूप में अमूल्‍य निधि प्रदान की है। जो हमारे आसपास ही उपलब्‍ध है लेकिन हम उसके औषधीय गुणों से अनभिज्ञ होने के नाते उसका उपयोग नहीं कर पाते। आज हम आपको आपके गार्डन व आसपास उपलब्‍ध पेड़-पौधों के औषधीय गुणों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो समय पर आपके काम आ सकते हैं और कई बीमारियों का उपचार कर सकते हैं।

बाग़ीचे में मौजूद बीमारियों का उपचार

बीमारियों का उपचार हर्बल प्लांट्स द्वारा
Herbal plants for homeremedies

1. एलो वेरा

आपने घृतकुमारी या चित्रघृतकुमारी नाम सुना होगा, यह एलोवेरा का ही नाम है। इसका रस अमृत तुल्‍य माना गया है। इसके उपयोग से लंबे समय तक व्‍यक्ति युवा रहता है। इसके जेल को पीने से व्‍यक्ति को ख़ुद को स्‍वस्‍थ व तरोताज़ा महसूस करता है।

– इसका जेल यानी रस बालों को काला, घना व मुलायम बनाता है, इसमें गंजेपन को दूर करने की भी क्षमता है।

– इसके जेल के सेवन से सर्दी-खांसी दूर भाग जाती है। इसके पत्‍ते को भूनकर इसका रस निकालें। आधा चम्‍मच रस एक कप पानी के साथ लेना काफी लाभप्रद है।

– इसका जेल लगाने से फोड़े-फुंसी, मुंहासे, फटी एड़ियाँ, सन बर्न व आंखों के नीचे काले धब्‍बे ख़त्म हो जाते हैं।

बवासीर, गठिया, कब्‍ज़, हृदय रोग व मोटापा आदि बीमारियों का उपचार करने में इसका सेवन काफ़ी लाभप्रद है।

2. पथरचट्टा

पथरचट्टा पथरी का कारगर इलाज है। इसकी दो पत्तियाँ अच्‍छी तरह धुलकर प्रात: खाली पेट चबाकर गर्म पानी पी लेने से एक सप्‍ताह के अंदर पथरी की समस्‍या ख़त्म हो जाती है।

पेट दर्द में पथरचट्टा का एक चम्‍मच रस लें और उसमें सोंठ का चूर्ण मिलाकर खिला दें, तुरंत आराम मिल जाएगा। यह मूत्र रोगों में भी लाभदायक है।

3. शंखपुष्पी

शंखपुष्‍पी की पत्‍ती व तना के प्रयोग से बच्‍चों की बुद्धि तीक्ष्‍ण होती है और शरीर स्‍वस्‍थ रहता है। इसे शक्तिशाली मस्तिष्क टॉनिक माना जाता है। साथ ही यह समृति शक्ति को बढ़ाता है और तनाव को दूर रखता है।

– शंखपुष्‍पी की पत्तियों को अल्‍सर व दिल की बीमारी के लिए उपयोगी माना जाता है। अस्‍थमा में भी इसकी पत्तियों का उपयोग किया जाता है।

4. अश्वगंधा

अश्वगंधा के पौधे वज़न कम करने व लकवा आदि से लड़ने में मदद करते हैं। साथ ही बुखार, संक्रमण व सूजन आदि बीमारियों का उपचार करने में भी इनका प्रयोग किया जाता है।

– इसकी पत्तियों व जड़ों से बनाई गई अश्‍वगंधा चाय बच्‍चों की स्‍मरण शक्ति बढ़ाती है।

– गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन करना चाहिए, यह इम्‍यून सिस्‍टम को शक्तिशाली बनाता है।

– अश्‍वगंधा में हार्ट अटैक के खतरे को कम करने की क्षमता होती है।

– मधुमेह पीड़ितों में यह मोतियाबिंद नहीं होने देता।

– इसमें मौजूद ऐंटिऑक्सीडेंट कैंसर से लड़ने में मदद करते हैं।

– प्‍लेग के लिए यह कारगर औषधि मानी जाती है, टूटी हड्डियों को जोड़ने में भी यह सहायक है।

5. नीम

नीम के पेड़ को घर का डाक्‍टर कहा जाता है। एक तो यह पर्याप्‍त मात्रा में आक्‍सीजन उत्‍सर्जित करता है दूसरे अपने आसपास कीटाणुओं को पनपने नहीं देता।

– इसकी पत्तियों को पानी में उबालकर भांप लेने से सर्दी-जुकाम में आराम मिलता है।

– चोट व मोच पर इसकी पत्तियों को पीसकर लगाने से लाभ होता है, नीम की पत्तियों को पानी में उबालकर धोने से भी लाभ होता है।

– एक कप पानी में नीम की चार-पांच पत्तियाँ उबालकर पीने से बुखार में लाभ होता है।

– त्‍वचा रोगों से निजात के लिए नहाते वक्‍त नीम की पत्तियों को मसलकर पानी में डालकर नहाना चाहिए।

6. तुलसी

तुलसी का पौधा अपने आसपास के कीटाणुओं को नष्‍ट कर देता है तथा उन्‍हें पुन: पनपने नहीं देता।

– तुलसी की पत्तियों में कई तरह के तेल मौजूद होते हैं जो पौधे के आसपास फैल जाते हैं। इससे आसपास की वायु हमेशा शुद्ध रहती है तथा कीटाणु नष्‍ट हो जाते हें।

– गठिया, लकवा व वात दर्द जैसी बीमारियों का उपचार करने में तुलसी की पत्तियाँ, जड़ व तना लाभप्रद है।

– सुबह खाली पेट तुलसी की पत्तियाँ खाने से वात, पित्‍त व रक्‍त विकार जैसी समस्‍याएं समाप्‍त हो जाती हैं।

7. चिरौता

चिरौता का रस पीलिया की अच्‍छी दवा है। इसकी 50 ग्राम पत्तियाँ लेकर दो कप पानी में उबाल लें, जब पानी आधा बचे तो इसका सेवन करें, यह पीलिया को ख़त्म कर देता है।

दाद, खाज, खुजली पर इसकी पत्तियाँ रगड़ने या पीसकर लगाने से फ़ायदा होता है।