आधुनिक जीवनचर्या ने हमारे स्‍वास्‍थ्‍य और सुकून को बुरी तरह प्रभावित किया है। भागदौड़ बढ़ी है, खान-पान अनियमित व दूषित हुआ है। इसका सीधा असर स्‍वास्‍थ्‍य पर पड़ा है। कब्‍ज़ व बदहजमी की समस्‍या बढ़ी है। बहुत से लोगों की सामान्‍य शिक़ायत है कि उन्‍हें भोजन पच नहीं रहा है। भूख नहीं लग रही है। इसकी बहुत जगहों से दवाइयां कराई लेकिन ठीक नहीं हो रहा है। हर दो-चार दिन के बाद पेट साफ़ करने की दवा खानी पड़ती है। पेट तो साफ़ हो जाता है लेकिन कब्‍ज़ दूर नहीं होता और समस्‍या ज‍स की तस बनी रहती है।

बदहजमी का इलाज

बदहजमी के कारण और उपाय

भोजन न पचने से क्‍या होगा

पेट साफ़ न होना लगभग सभी बीमारियों की जड़ है। क्‍योंकि जब भोजन पचता है तो रस में तब्‍दील होता है, रस से रक्‍त, मांस, मज्‍जा होते हुए वीर्य तक बनता है। जब भोजन नहीं पचेगा तो उससे रस नहीं निकलेगा और न ही मांस, मज्‍जा मेद व वीर्य आदि बनेंगे। इससे मनुष्‍य कमज़ोर होता जाएगा, उसकी प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर होगी और एक दिन अनेक प्रकार की बीमारियों की ज़द में आ जाएगा। भोजन नहीं पचेगा तो सड़ेगा और तमाम तरह के विकार उत्‍पन्‍न करेगा। इस लिए पेट को साफ़ रखना स्‍वस्‍थ रहने के लिए बहुत ही आवश्‍यक है।

आसान उपाय

आज मैं सभी लोगों के लिए ख़ासकर उन लोगों के लिए जो बदहजमी की दवा अनेक जगहों पर करा चुके हैं और आराम नहीं मिला है, एक नुस्‍खा बताने जा रहा हूं। ऐसा नुस्‍खा जो ज़्यादा ख़र्चीला भी नहीं है और बदहजमी को चुटकी बजाते विदा कर देगा।

दमदार नुस्‍खा

काली मिर्च, दालचीनी, घी में भुनी उत्‍तम हींग, सोंठ, बड़ी इलायची के दाने व छोटी पीपल सभी को 32-32 ग्राम यानी आधा-आधा छटांक तथा काला नमक, सेंधा नमक, भुना हुआ काला दाना बीज, भुना हुआ जीरा व अमजोद सभी 65-65 ग्राम यानी एक-एक छटांक लेकर बारीक पीसकर चूर्ण तैयार करके रख लें। अब अमलतास व नींबू का रस निकालकर छान लें और उसमें चूर्ण मिला दें। इसके बाद 125 ग्राम मुनक्का लें और उसका बीज निकाल कर चटनी बना लें। अब चटनी भी दवा में अच्‍छी तरह मिला दें। इसे एक साफ़ सूखे हुए कांच के जार में रख दें।

प्रयोग की मात्रा

ज़रूरत पड़ने पर इसमें से एक चम्‍मच लें और चाटकर गुनगुना पानी पी लें।

होमे वाले लाभ

गर्भवती स्‍त्री हो या छोटे बच्‍चे अथवा बूढ़े या आपरेशन कराया हुआ व्‍यक्ति हो, कोई भी इसका सेवन कर सकता है, एक बार में ही पेट साफ़ हो जाता है और बदहजमी दूर हो जाती है। आवश्‍यकता होने पर एक से अधिक बार भी इसे दिया जा सकता है। यह गैस भी नहीं बनने देता है।

– मुंह में पानी आना, अफारा आदि में भी लाभ होता है।

– इसके सेवन से भूख भी खुलकर लगती है।