अतिबला (Aka Indian Mallow or Abutilon Indicum) पौष्टिक गुणों से भरपूर एक औषधि है। आयुर्वेद में इसे बाजीकरण के रूप में इस्‍तेमाल किया जाता है। इसका एक नाम खिरैटी भी है। धातु संबंधी रोग में यह एक कारगर औषधि है। यौन दुर्बलता, धातु क्षीणता व शारीरिक दुर्बलता को दूर करने के साथ ही यह अन्‍य कई प्रकार की बीमारियों में कारगर औषधि के रूप में इस्‍तेमाल की जाती है।

इसकी मुख्‍यत: चार जातियां पाई जाती हैं- बला, अतिबला, नागबला व महाबला। ये चारो जातियां शीतवीर्य, मधुर रसयुक्त, पुष्टिकारक, कांति वर्धक, वात, रक्‍त पित्‍त व रक्‍त विकार तथा व्रण को दूर करने में सक्षम हैं। मुख्‍यत: इसकी जड़ व बीजों का उपयोग किया जाता है। कंघनी, कंघी, कंकतिका, ककही, कंकहिया, ऋष्याप्रोक्ता आदि अतिबला के नाम हैं। इंग्लिश में इसे इंडियन मेलो और लैटिन में अबूटीलन इंडिकम कहते हैं।

अतिबला - इंडियन मैलो

अतिबला के लाभ

धातु गाढ़ा करने के लिए

अतिबला यानी खरैटी की ताजा जड़ का लगभग 5-6 ग्राम का एक टुकड़ा लें और उसे एक कप पानी के साथ पीसकर छानकर सुबह खाली पेट पीने से शुक्रमेह बंद हो जाता है और धातु गाढ़ा होने लगती है। इसका सेवन कुछ दिन नियमित करना चाहिए।

श्‍वेत प्रदर

महिलाओं की एक आम समस्‍या है श्‍वेत प्रदर यानी ल्‍यूकोरिया। ल्‍यूकोरिया में बला के बीजों को बारीक पीसकर चूर्ण बना लें और इसे छानकर रख लें। एक चम्‍मच चूर्ण शहद में मिलाकर सुबह-शाम लेने और ऊपर से हल्‍का गर्म मीठा दूध पीने से श्‍वेत प्रदर की समस्‍या से मुक्ति मिल जाती है।

शारीरिक कमजोरी

इसकी जड़ को पीसकर महीन चूर्ण बना लें। आधा चम्‍मच चूर्ण हल्‍का गर्म व मीठा दूध के साथ सुबह-शाम सेवन करने से शारीरिक कमजोरी दूर होने लगती है। भोजन में दूध-चावल की खीर शामिल करने से वजन भी बढ़ता है, शरीर सुडौल होता है, सातों धातुएं पुष्ट व बलवान होती हैं तथा बल, वीर्य व ओज में वृद्धि होती है।

मूत्रातिसार

समान मात्रा में अतिबला के बीज व छाल लेकर कूट-पीसकर महीन चूर्ण तैयार कर लें और छानकर रख लें। घी-शक्‍कर के साथ एक चम्‍मच चूर्ण सुबह-शाम सेवन करने से वस्ति व मूत्रनलिका की उग्रता दूर होती है तथा मूत्रातिसार बंद हो जाता है।

Abutilon Indicum

बवासीर

खूनी बवासीर में मल के साथ रक्‍त भी आता है। इसका मुख्‍य कारण खानपान की अनियमितता व कब्‍ज है। बला के पंचांग को मोटा-मोटा कूटकर किसी डिब्‍बे में भरकर रख लें। प्रतिदिन सुबह लगभग दस ग्राम यह जौकुट चूर्ण एक गिलास पानी में डालकर उबालें, जब पानी चौथाई बचे तो आग से उतारकर छान लें और ठंडा हो जाने पर इसमें एक कप दूध मिलाकर पीयें। कुछ दिन के नियमित प्रयोग से मल के साथ खून आना बंद हो जाएगा।

मासिक धर्म का रुकना

मासिक धर्म रुकने या उसकी अनियमितता को ठीक करने में अतिबला काम की औषधि है। अतिबला, चीनी, मुलहठी, बड़ के अंकुर, पीले फूल की कटेरी की जड़ व नागकेसर की छाल लेकर दूध में पीस लें और इसमें घी व शहद मिलाकर कम से कम पंद्रह दिन पीयें। इससे मासिक धर्म पुन: शुरू हो जाता है।

गीली खांसी

खांसी के लिए समान मात्रा में अतिबला, कंटकारी, वासा (अड़ूसा) के पत्‍ते, बृहती व अंगूर लेकर काढ़ा बना लें। 15 से 30 मिलीलीटर काढ़ा में 5 ग्राम चीनी मिलाकर दिन में दो बार लेने से गीली खांसी चली जाती है।

अन्‍य प्रयोग

– चालीस मिलीलीटर अतिबला की जड़ का काढ़ा सुबह-शाम पीने से पेशाब के साथ खून आना बंद हो जाता है।

– नियमित इसके पत्‍तों का काढ़ा बनाकर दिन में तीन-चार बार कुल्‍ला करने से मसूढ़ों का सूजन व ढीलापन समाप्‍त हो जाता है।

– ऋतु स्‍नान के बाद अतिबला व नागकेसर मिलाकर पीसकर दूध के साथ सेवन करने से दीर्घजीवी संतान पैदा होती है।

गोक्षुरादि चूर्ण

गोक्षुरादि चूर्ण बनाने के लिए समान मात्रा में नागबला, अतिबला, शतावर, तालमखाना, कौंच के शुद्ध छिलकारहित बीज व गोखरू लें, इन्‍हें कूट-पीसकर चूर्ण बनाकर एक में मिला लें। इसे छननी से तीन बार छान लें ताकि सभी पदार्थ एक में अच्‍छी तरह मिल जाएं।

उपयोग

सुबह शाम एक-एक चम्‍मच यह गोक्षुरादि चूर्ण या रात को सोते समय मिश्री मिले हल्‍के गर्म दूध के साथ लेने से यौन शक्ति में वृद्धि होती है, शीघ्रपतन दूर होता है। यह चूर्ण बाजार में भी बना-बनाया मिलता है।

Keywords – Atibala, Abuliton Indicum, Indian Mallow, Gokshuradi Churna