अपराजिता पौधे ‌_ Clitoria ternatea or Asian Pigeonwings का इस्तेमाल लोग घरों में सजावट के लिए करते हैं। इसकी इकहरे व दुहरे फूलों वाली बेल होती है और इसके फूल भी दो प्रकार के होते हैं- सफेद व नीले। सफेद फूलों वाली अपराजिता बेल सांप के ज़हर का दुश्‍मन है। सांप का ज़हर शरीर में कहां तक प्रवेश किया है, उसके आधार पर अपराजिता के साथ अन्‍य औषधियों को मिलाकर दिया जाता है। विष की शरीर में पहुंच के बारे में कोई जानकार व्‍यक्ति ही बता सकता है। मेडिकल साइंस के अनुसार ज़हर की गति सांप की प्रजाति पर निर्भर करती है लेकिन कुछ सांप जो ज़हरीले नहीं माने जाते, उनका विष वीर्य तक पहुंचने में 5 दिन का समय लग जाता है और आने वाली संतान को प्रभावित करता है। इसलिए सांप कोई भी हो यदि उसने काट लिया है तो उसकी दवा ज़रूर करा लेनी चाहिए।

अपराजिता पौधे के गुण
Clitoria ternatea

अपराजिता बेल के औषधीय गुण

– सांप के ज़हर का असर यदि चमड़ी के अंदर तक ही है तो अपराजिता पौधे की जड़ का 12 ग्राम पाउडर घी में मिलाकर खिला देना चाहिए।

– अगर विष रक्‍त में प्रवेश कर गया है तो अपराजिता बेल की जड़ का 12 ग्राम पाउडर दूध में मिलाकर पिलाना चाहिए।

– यदि सांप के ज़हर की पहुंच मांस तक हो गई है तो कूठ व अपराजिता का 12-12 ग्राम पाउडर मिलाकर देना चाहिए।

– जब ज़हर हड्डियों तक पहुंच जाए तो हल्‍दी व अपराजिता पौधे की जड़ का एक-एक तोला पाउडर मिलाकर देना चाहिए।

– ज़हर यदि चर्बी में फैल गया है अपराजिता की जड़ का व अश्‍वगंधा का पाउडर मिलाकर देना चाहिए।

– यदि सांप का ज़हर वीर्य तक पहुंच गया है तो अपराजिता की जड़ का 12 ग्राम पाउडर व ईसरमूल कंद का 12 ग्राम पावडर मिलाकर देना चाहिए।

– इन औषधियों का प्रयोग दो बार ही काफी है।

अपराजिता पौधे के बारे में

पानी वाले क्षेत्रों ख़ासकर बंगाल में एक बेल पाई जाती है जिसका पत्ता आगे से चौड़ा और पीछे सिकुड़ा रहता है, इसे ही अपराजिता कहते हैं। इसके फूल स्त्री की योनि की तरह से होते हैं, इसीलिए इसे भगपुष्‍पी या योनिपुष्‍पी भी कहा जाता है। नवदुर्गा व काली पूजा में इसके फूलों का प्रयोग विशेष रूप से किया जाता है। बंगाल में इसके फूल नीले व सफेद रंग के मिलते हैं और जहां काली का स्‍थान होता है वहां यह बेल अवश्‍य मिलती है। गर्मी को छोड़कर हर समय इसके फूल पर्याप्‍त मात्रा में मिलते हैं। वेदों में सफेद फूलों वाली बेल को विष्‍णुकांता व नीले फूलों वाली बेल को कृष्‍णकांता कहा गया है। तंत्र शास्‍त्रों में इस बेल के विभिन्‍न प्रयोग बताए गए हैं।

Aparajita Plant
Asian Pigeonwings

Clitoria ternatea health benefits

– यदि किसी स्‍त्री को प्रसव में बहुत ज़्यादा वेदना हो रही हो तो इसके पत्‍तों को उसकी कमर में लपेट देने से बिना वेदना के आसानी से प्रसव हो जाता है।

– ज़हरीले कीट-पतंगों जैसे बर्र, ततैया व मधुमक्खी आदि के काटने पर इसका प्रयोग किया जाता है। ये शरीर के जिस अंग में काटें, शरीर के दूसरी तरफ उसी अंग पर अपराजिता पौधे के पत्ते रखकर पानी से धोने पर कुछ ही देर में आराम हो जाता है।

– यदि किसी को बिच्‍छू ने काट लिया है तो इसके पत्ते को काटने वाले स्‍थान से ऊपर से नीचे की ओर रगड़ें और शरीर के जिस तरफ काटा हो उसी तरफ के हाथ में अपराजिता के पत्‍ते दबा देने से पीड़ा कुछ ही देर में समाप्‍त हो जाती है।

– नीले रंग की अपराजिता की जड़ नीले रंग के कपड़े में बांधकर गले में पहनने से प्रेत बाधा व शरीर का भारीपन दूर होता है। इसके पत्‍तों का रस निकालकर साफकर नाक में दो बूंद डालने से जल्‍दी लाभ मिलता है।

– नीम व अपराजिता के पत्तों को एक साथ जलाकर घर में धुंआ देने से भी बाहरी बाधा समाप्‍त होती है और घर में सुख-शांति आती है।

– कहा जाता है कि मासिक धर्म के बाद यदि संतानहीन स्त्रियों को नीली अपराजिता पौधे की जड़ दूध में पीसकर लगभग एक तोला पिलायी जाए तो वे गर्भधारण कर लेती हैं।

– मान्‍यता है कि सफेद अपराजिता की जड़ सहित पत्ती बकरी के मूत्र में पीसकर बनाई गई गोली को पशुओं के गले में बांध देने से उन्‍हें कोई बीमारी नहीं होती है और उन्‍हें को चुराता भी नहीं है। वशीकरण के लिए भी इसका प्रयोग किया जाता है।