अजवाइन अनेक प्रकार के औषधीय गुणों से भरपूर है। ठंड से बचने की यह उत्‍तम औषधि है। यह उत्‍तम एंटी-ऑक्सिडेंट है। वज़न घटाने के साथ ही यह शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत करती है। इसके सेवन से श्‍वसन क्रिया ठीक रहती है और जोड़ व मांसपेशियां लचीली होती हैं। पेट रोगों व पाचन संबंधी विकारों व रोगों को दूर करने में यह समर्थ है। कहा जाता है कि अकेली अजवाइन में सौ प्रकार के खाद्य पदार्थों को पचाने की क्षमता है।

अजवाइन के गुण

Properties of Carom Seeds

यह पाचक, रूचिकारक, तीक्ष्ण, कड़वी, अग्नि प्रदीप्त करने वाली, पित्तकारक तथा शूल, वात, कफ, उदर, आनाह, प्लीहा व कृमि का नाश करने वाली है। इसकी पत्तियों में संक्रमण से लड़ने वाले एंटी बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं। इसमें लाल मिर्च की तेजी, राई की कटुता, हींग व लहसुन जैसे वातनाशक गुण एक साथ मिलते हैं। इसके सेवन से उदर शूल, गैस, वायुशोला, पेट फूलना, वात प्रकोप आदि रोग दूर हो जाते हैं। गर्म प्रकृति वालों के लिए यह हानिकारक होती है।

अजवाइन बीज और पत्ते

मुंहासे

मुंहासों से निजात के लिए दो चम्‍मच अजवाइन को चार चम्‍मच दही में मिलाकर रात को सोते समय चेहरे पर लगा लें और सुबह उठकर गर्म पानी से धुल लें, चेहरा साफ़ हो जाएगा और मुंहासे विदा हो जाएंगे।

गठिया

– अजवाइन की पोटली बनाकर सेंकने से गठिया रोग में आराम मिलता है।

– आधा चम्‍मच सोंठ का चूर्ण खाकर ऊपर से आधा कप पानी में अजवाइन का रस मिलाकर पीना भी गठिया के लिए लाभप्रद है।

– जोड़ों के दर्द के लिए सरसो के तेल में अजवाइन डालकर गर्म कर लें और इससे जोड़ों की मालिश करें।

दाद, खाज, खुजली, घाव

– अजवाइन को गाढ़ा पीसकर लगाने से दाद, खाज, खुजली में आराम मिलता है।

– जला हुआ और घाव भी इससे ठीक हो जाता है और निशान भी नहीं पड़ता।

– अजवाइन के फूल का चूर्ण पानी में मिलाकर लगाने से घाव, दाद, खुजली व फुंसी आदि समाप्त हो जाती है।

खट्टी डकारें

सेंधा नमक, अजवाइन, सेंचर नमक, हींग व सूखे आंवला का चूर्ण बराबर मात्रा लेकर पीस लें। 1 ग्राम यह चूर्ण सुबह-शाम मधु के साथ चाटने से खट्टी डकारें आना बंद हो जाती हैं।

मासिक धर्म की पीड़ा

– भोजन के बाद या बीच में गुनगुने पानी से अजवाइन लेने से मासिक धर्म के दौरान होने वाली पीड़ा से निजात मिलती है। इसका प्रयोग 15-30 दिन तक प्रयोग करना चाहिए। मासिक धर्म अधिक आने या गर्मी अधिक लगने पर यह प्रयोग न करें।

– सुबह खाली पेट 2 से 4 गिलास पानी पीने से भी मासिक धर्म की अनियमितता में लाभ होता है।

खांसी-जुकाम

– जुकाम से परेशान हों और साथ में हल्‍का बुखार भी हो तो देशी अजवाइन 5 ग्राम, सतगिलोय 1 ग्राम लेकर रात में 150 मिलीलीटर पानी में भिगो दें। सुबह मसलकर छान लें और इसमें नमक मिलाकर दिन में 3 बार पिएं।

– आधा-आधा कप अजवाइन का रस व पानी मिलाकर सुबह-शाम भोजन के बाद पीने से दमा रोग चला जाता है।

– खांसी-जुकाम ने पकड़ लिया है तो एक चुटकी काला नमक, आधा चम्मच अजवाइन व दो लौंग लेकर पीस लें। इसे गुनगुने पानी के साथ लें। यह खांसी-जुकाम की बहुत ही कारगर दवा है।

छाती में कफ जम गया है तो आधा कप पानी में आधा चम्मच अजवाइन व थोड़ी सी हल्दी चूर्ण डालकर उबाल लें और ठंडा होने पर इसमें एक चम्मच मधु मिलाकर पी जाएं। कफ निकल जाएगा। गर्म पानी में इसे डालकर भाप लेने से भी लाभ होता है।

– खांसी में बेर के पत्तों के साथ अजवाइन पानी में उबालकर छानकर पीने से लाभ होता है।

– पुरानी खांसी के लिए पान में अजवाइन डालकर खाने से राहत मिलती है।

Ajwain plants
Ajwain plants

एसिडिटी

– एसिडिटी के लिए थोड़ा अजवाइन व जीरा भूनकर पानी में उबाल लें और छानकर चीनी मिलाकर पी जाएं।

– पेट दर्द व गैस की समस्‍या के लिए दो हिस्‍सा अजवाइन, दो हिस्‍सा सोंठ व एक हिस्‍सा काला नमक मिलाकर रख लें और भोजन के बाद एक चम्‍मच गुनगुने पानी से लें। इससे अशुद्ध वायु का बनना व सिर का भारी होना भी ठीक हो जाएगा।

मसूढ़ों के रोग

– अजवाइन को भूनकर पीस लें। इससे मंजन करने से मसूढ़ों के रोग नष्‍ट होते हैं।

– गुनगुने पानी में कुछ बूंद अजवाइन तेल की डालकर कुल्‍ला करने से मसूढ़ों की सूजन समाप्त होती है।

मोटापा

मोटापा कम करने के लिए रात को एक गिलास पानी में अजवाइन भिगो दें और सुबह उसे छानकर उसमें मधु मिलाकर पी जाएं, यह प्रयोग कुछ दिन करने से मोटापा कम होने लगता है।

शीतपित्ती

शीतपित्ती यानी शरीर पर लाल चकत्‍ते पड़ गए हैं तो अजवाइन का फूल लें और इसे गुड़ के साथ खा जाएं और ऊपर से पानी पी लें। चकत्‍ते ठीक हो जाएंगे। अजवाइन का चूर्ण व गेरू मिलाकर शरीर पर मलने से भी लाभ होता है।

पेट व आंतों के कीड़े

– अजवाइन व काला नमक का सेवन आंतों से कीड़ों को बाहर कर देता है। अजवाइन का चूर्ण व गुड़ समान मात्रा में लेने से भी पेट के कीड़े नष्‍ट हो जाते हैं।

– सुबह 10-15 ग्राम गुड़ खाकर 10-15 मिनट बाद 1-2 ग्राम अजवाइन का चूर्ण बासी पानी के साथ लेने से आंतों में मौजूद सभी प्रकार के कीड़े मर जाते हैं और मल के साथ बाहर आ जाते हैं।

प्रसव के बाद

– प्रसव के बाद अग्नि प्रदीप्‍त करने, भोजन पचने व गर्भाशय को शुद्ध करने के लिए महिलाओं को अजवाइन का लड्डू खिलाया जाता है। इससे बुखार व कमर का दर्द भी ठीक हो जाता है। गर्भाशय शुद्ध होता है और पूर्व स्थिति में आ जाता है। दूध अधिक बनता है। अनियमित मासिक धर्म को भी यह सही करता है।

अजवाइन के अन्‍य उपयोग

Some other uses of Ajwain

– अजवाइन रक्त शोधन करती है और रक्‍त प्रवाह को संचालित करती है, इसलिए गर्भावस्‍था में महिलाओं के लिए इसका सेवन आवश्यक है।

– शराब पीने के बाद उल्टियां हों तो अजवाइन खिलाने से बंद हो जाती हैं।

– अजवाइन के सेवन से भूख खुलकर लगती है।

– अजवाइन का तेल डालने से कान दर्द में तुरंत राहत मिलती है।

– गुर्दे के दर्द में पिसी हुई कच्‍ची अजवाइन व गुड़ समान मात्रा में दिन में चार बार खाने से आराम मिलता है।

– बच्‍चों को रात में आधा ग्राम अजवाइन खिला देने से वे रात को बिस्‍तर पर पेशाब नहीं करते।

– भूख नहीं लगती है तो अजवाइन, सौंफ व काला नमक समान मात्रा में देशी घी के साथ खाएं, भूख बढ़ जाएगी।

– दोपहर को भोजन के बाद दो-तीन ग्राम अजवाइन चूर्ण खा लेने से भोजन आसानी से पच जाता है।

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