लत कोई भी हो, नुक़सान ही करती है। यदि नशे की लत हो तो बहुत नुक़सान करती है। इससे स्‍वास्‍थ्‍य और पैसा दोनों बर्बाद होता है। शुरू में तो शौक वश व्‍यक्ति इसका सेवन करता है लेकिन बाद में यह जी का जंजाल बन जाती है। यदि नशा महंगा करने की आदत पड़ गई तो आर्थिक स्थिति पूरी तरह खराब हो जाती है और स्‍वस्‍थ्‍य पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। व्‍यक्ति बीमार हो जाता है, कमजोरी स्‍थायी हो जाती है। किसी काम में मन नहीं लगता है। इसी तरह का एक नशा है अफ़ीम। इसकी लत लग गई तो समझिए व्‍यक्ति गया। भूख-प्‍यास लगती नहीं है और अफ़ीम लेता रहता है। पूरा वेतन अफ़ीम की लत में ही चला जाता है। शरीर कृशकाय हो जाता है और अनेक प्रकार की बीमारियाँ घर कर लेती हैं।

अफ़ीम की लत व होम्‍योपैथ

किसी प्रकार की लत का होम्‍योपैथ में बहुत ही कारगर इलाज है। चूंकि लंबे समय तक नशे का सेवन करने से व्‍यक्ति के शरीर में उस नशीले पदार्थ की बड़ी मात्रा इकट्ठा हो जाती है। वह मात्रा ही उसे पुन: नशा लेने के लिए बाध्‍य करती है। जैसे आप तंबाकू खाते हैं तो लंबे समय तक इसके सेवन से आपके शरीर में निकोटीन की बहुत ज़्यादा मात्रा एकत्रित हो जाएगी। यह पार्ट ऑफ़ बॉडी हो जाएगा और आपको हमेशा नशे के लिए प्रेरित करता रहेगा। इसलिए सबसे ज़रूरी है कि शरीर में नशे का जो विषाक्‍त पदार्थ एकत्रित हो गया है, उसे दूर कर दिया जाए और शरीर को पर्याप्‍त पोषण प्रदान किया जाए।

होम्‍योपैथ यह कार्य बड़ी सरलता से कर देता है, इतना ही नहीं होम्‍योपैथ में वह ताक़त है जो मानसिक टाक्सिंस को भी बाहर निकाल देती है और आचरण तक को सुधार देती है। लेकिन दवा के साथ ही इसके लिए मरीज़ का पूरी तरह तैयार व संकल्पित होना ज़रूरी है। यदि मरीज़ नशा छोड़ने को राज़ी नहीं है तो कोई दवा उसे नशा छोड़ने में मदद नहीं कर सकती है।

सूखी अफ़ीम

लत की दवा

एक व्‍यक्ति को अफ़ीम की लत पड़ गई थी। उनका पूरा वेतन अफ़ीम में जाता था। शरीर में केवल हड्डियाँ बची थीं, मांस पूरी तरह गल गया था। भूख-प्‍यास ग़ायब हो गई थी। जैसे लगता था कि अफ़ीम खाकर ही जी रहे हैं। अभी पूरी जिंदगी पड़ी थी लेकिन किसी काम की नहीं, वे पूरी तरह नशे की गिरफ़्त में आ गए थे। अच्‍छी बात यह थी कि वे स्‍वयं नशा छोड़ना चाहते थे, इसका दुष्‍प्रभाव उन्‍हें समझ में आ गया था लेकिन लत ऐसी थी कि छूटती नहीं थी। इसी बीच उनकी भेंट एक होम्‍योपैथिक चिकित्‍सक से हो गई। चिकित्‍सक ने पूरा भरोसा दिलाया कि वह लत छुड़ा देंगे लेकिन जब तक दवा चलेगी, उस दौरान एक बार भी अफ़ीम नहीं लेना है, नहीं तो परिणाम बहुत घातक होगा। वह इसके लिए तैयार हो गए।

होम्योपैथिक दवा का लाभ

चिकित्‍सक ने उन्‍हें ‘अवेना सटाइवा‘ दी। साथ ही सुस्‍ती, कमज़ोरी व कब्‍ज़ आदि के लिए ‘जेल्सीमियम‘ ‘चायना‘ ‘नक्स वोमिका’ आदि और नींद के लिए ‘काली फ़ॉस‘ देते रहे। धीरे-धीरे टट्टी, पेशाब व पसीने के रास्‍ते उनके शरीर से अफ़ीम बाहर निकलना शुरू हो गया। पसीना जो उनके शरीर से निकलता था और सूख जाता था, वह सफेद पाउडर जैसा उनके शरीर पर दिखता था और हाथ लगाने से झड़ता था। कमज़ोरी, बेचैनी, घबराहट से उनकी हालत ख़राब होने लगी। लेकिन वह धैर्य रखे रहे। धीरे-धीरे जब उनके शरीर से पूरा अफ़ीम बाहर हो गया तो उसके साथ ही अफ़ीम खाने की इच्‍छा भी विदा हो गई। भूख- प्यास लगने लगी और शरीर को शक्ति मिलने लगी। उन्‍हें पौष्टिक खुराक़ दी जाने लगी। धीरे-धीरे वह स्‍वस्‍थ हो गए और अफ़ीम की लत से निजात मिल गई।