अक्सर हम जो खाते-पीते हैं, उसके बारे में बहुत गहराई से विचार नहीं करते हैं। धीरे-धीरे उसका ज़हर हमारे शरीर में अपनी जगह बना लेता है और हम बार-बार उसके कोपभाजन बनते हैं क्योंकि रक्त विषाक्त हो जाता है। ख़ासतौर से महिलाओं में जब गर्भधारण करने की क्षमता का ह्रास हो जाता है तब हमें पता चलता है कि हमारे द्वारा जाने अनजाने किए गए भोजन का कितना बड़ा दुष्प्रभाव होता है।

रक्त विषाक्त हो

सीमा पेशे से एक चिकित्सक हैं। लेकिन उन्हें तीन-चार बार जब अनचाहा गर्भपात हो गया तब वह सजग हुईं। जांच में पता चला कि उनका रक्त विषाक्त हो गया है। रक्त में रुवेला विष जैसा विषाक्त तत्व मौजूद है। ऐसी स्थिति में महिलाएं मां नहीं बन सकतीं और एलोपैथी के चिकित्‍सकों अपने हाथ खड़े कर लिए। अनेक चिकित्‍सा पैथियों में इसका इलाज ढूँढ़ते वह एक होम्योपैथिक चिकित्सक के पास पहुंची। उन्होंने उन्हें ठीक कर देने का आश्वासन दिया लेकिन इसके लिए पर्याप्त समय मांगा। सीमा के पास दूसरा कोई उपाय नहीं था। वह चाहे जितना समय लगे, इस बीमारी से छुटकारा पाना चाहती थीं। चिकित्सक ने उन्हें रुबेला के लिए “मार्बीलीनम-1000” से सी.एम. पोटेंसी तक दिया। साथ ही उनके हाथ में एक्जीमा, मासिक गड़बड़ी, मलेरिया व कमर दर्द आदि के लिए “रेननकुलस बल्बस”, “टूयूवरक्यूलिनिम”, “सिक्यूटा विरोसा”, “कालोफायलम”, “सीपिया”, “चायना आर्स” व “लेकेसिस” आदि दवाइयां दी गईं। दो वर्ष बाद उनकी रक्त व हार्मोन संबंधी परेशानियां दूर हो गईं। इसके बाद उन्हें गर्भस्थापन हुआ और उन्होंने एक बहुत ही सुंदर बच्चे को जन्म दिया।

रक्त विषाक्त हो ने से बचायें

  1. गर्भवती होने की पुष्टि के बाद नियमित चिकित्सक से परामर्श लेते रहें और उनके अनुसार जांच कराते रहें।
  2. भोजन व पेय पदार्थ भी चिकित्सक की सलाह पर ही लें। यह जानें कि उन्हें इस दौरान क्या खाना चाहिए और क्या नहीं।
  3. साफ़ सफ़ाई रखें, शरीर व दांतों की भली भांति सफ़ाई करें। संभव हो सुबह-शाम ब्रश करें।
  4. गर्भावस्था के दौरान कमर का दर्द बढ़ जाता है। इसका एकमात्र कारगर उपचार आराम है।
  5. संतुलित भोजन करें जिसमें पर्याप्त पोषक तत्व हों।
  6. अत्यंत ढीले कपड़े पहनें। ऊंची एड़ी के सैंडल से बचें और भारी सामान न उठाएं।

आप इस बातों का ध्यान रखें और स्वस्थ जीवन व्यतीत करें।