पेट में अनेक प्रकार के दोषों के चलते आंव या पेचिश रोग की उत्‍पत्ति होती है। एक प्रकार के जीवाणु आंतों में प्रवेश कर जाते हैं जिसकी वजह से यह रोग हो जाता है। इस रोग में मल त्‍यागने के समय या उससे पूर्व अंतड़ियों में मरोड़ होता है। अंतड़ी के निचले हिस्‍से में सूजन आ जाती है। ऐसी स्थिति में मल त्‍याग के समय मल के साथ ख़ून आ जाता है, इसे रक्‍तातिसार कहते हैं। यह मक्खियों के चलते भी फैलता है। इसलिए खुले में शौच या खुले में रखे खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। खाना पचता नहीं है तो वह आंतों में सड़कर घाव पैदा कर देता है, आंव का यह भी एक कारण है। उपचार के साथ-साथ सुबह-शाम खुली हवा में टहलने व स्नान करने से पूर्व शरीर में सरसों या तिल के तेल से मालिश करने से लाभ मिलता है।

आंव के लक्षण

अचानक पेट में मरोड़ होता है और शौच जाने पर गुदा द्वार से लालिमा लिए पतला व दुर्गंधयुक्‍त थोड़ा सा मल बाहर निकलता है। उसके साथ आंव व ख़ून होता है। लेकिन पेट साफ़ नहीं होता। यह स्थिति बार-बार आती है और पेट तना रहता है। भूख नहीं लगती है। काम में मन नहीं लगता है और लगातार कमज़ोरी बढ़ती जाती है। इसमें बुखार भी आ सकता है।

आंव के लक्षण और उपचार

खान-पान में बदलाव

आंव के रोगी को तत्‍काल भोजन बंद कर देना चाहिए। पहले कुछ दिन तक सफेद पेठे का पानी, नींबू पानी, नारियल पानी, मट्ठा तथा खीरा, लौकी, अन्नानास के जूस का सेवन करना चाहिए। फिर कुछ दिन तक फल, सलाद व अंकुरित चीज़ों का सेवन करना चाहिए। तत्पश्चात भोजन पर आना चाहिए। पानी ख़ूब पीना चाहिए।

– भूख लगने पर मट्ठे के साथ मूंग की दाल की खिचड़ी देना चाहिए।

– दिन भर में चार गिलास नींबू पानी पीना चाहिए।

– भोजन के साथ पतली दही, छाछ या मट्ठे का सेवन करना चाहिए।

– ज़रूरत पड़ने पर पेट साफ़ करने के लिए एनिमा का सहारा लेना चाहिए और सप्‍ताह में एक बार पेट पर मिट्टी का पतला लेप लगाना चाहिए। संभव हो तो सप्‍ताह में एक दिन व्रत ज़रूर रहें।

– गर्म पानी में दही व नमक डालकर पीने से या सुबह-शाम मट्ठा पीने आराम मिलता है। नारियल व चावल का पानी पीने से भी आराम मिलता है।

आंव के औषधीय उपाय

– आंव के लिए दस-दस ग्राम सूखा पुदीना व अजवाइन में एक चुटकी सेंधा नमक व दो बड़ी इलायची के दानें मिलाकर पीस लें। दोनों समय भोजन के बाद एक-एक चम्‍मच यह चूर्ण मट्ठा या पानी के साथ लेने से आराम मिलता है।

– काले गाजर का रस भोजन के बाद सुबह-शाम पीने से पुरानी पेचिश भी चली जाती है।

– दही या मट्ठे के साथ दो चम्‍मच आम की गुठली का चूर्ण खाने से भी आराम मिलता है।

– आंव के रोग में चार-पांच काली मिर्च चूसने के थोड़ी देर बाद गुनगुना पानी पीना लाभप्रद है।

– आंव की स्थिति में दो- दो चम्मच जामुन का रस व गुलाब जल मिला लें और उसमें थोड़ी सी मिश्री डालकर पीने से लाभ होता है।

– सौंफ, धनिया व अनार का दाना समान मात्रा में लें और इसे पीसकर चूर्ण बना लें। इसमें थोड़ी सी मिश्री मिला कर सेवन करें। साथ ही यदि दिन भर में मिश्री के साथ सात-आठ नीम के ताजे निकले मुलायम पत्‍तों का सेवन करें तो ज्‍यादा लाभ मिलेगा।

– आंव में बबूल का गोंद भी लाभदायक है। एक कप गरम पानी में 10 ग्राम बबूल का गोंद भिगो दें। फूल जाने के बाद उसे चम्‍मच से पानी में मिलाकर पी जाएं।

– जीरा या काली मिर्च के साथ एक चम्‍मच कच्‍चे केले का रस सुबह-शाम लेने से लाभ होगा।

– एक पाव दूध में एक चम्मच ईसबगोल की भूसी भिगो दें। रात को सोते समय उसमें थोड़ी सोंठ व थोड़ा जीरा मिलाकर पी जाएं।

– सुबह ब्रश करने के तुरंत बाद सेंधा नमक डालकर अदरक का रस पीने से पुरानी पेचिश भी भाग जाती है।

– आंव के रोग में 20 ग्राम फिटकिरी में 3 ग्राम अफ़ीम मिलाकर पीस लें। दो-दो रत्‍ती सुबह-शाम पानी के साथ लेने से आराम मिलेगा।

अन्य उपचार

– देशी घी में छोटी हरड़ का चूर्ण भून लें। एक चुटकी चूर्ण के साथ चार ग्राम सौंफ का चूर्ण खाने से आराम मिलता है।

– पचीस ग्राम सूखी जामुन की छाल का काढ़ा बना लें। ठंडा होने पर उसमें दो चम्मच मधु मिलाकर पीने से लाभ होगा।

– आधा चम्मच सोंठ का चूर्ण गुनगुने पानी से लेने पर पुराने आंव में लाभ होता है।

– मट्ठे के साथ एक चुटकी जावित्री लेने से ख़ूनी पेचिश दूर होती है।

– नियमित एक चम्‍मच चीनी में पांच-छह बूंद सौंफ का तेल डालकर खाने से आराम मिलता है।

– एक चुटकी मेथी का चूर्ण, नींबू शिकंजी या दही के साथ लेने से आराम मिलता है।

– आंव रोग के लिए सेब का छिलका लें और उसमें थोड़ी काली मिर्च मिलाकर पीस लें। सुबह-शाम भोजन के बाद खाने से आराम मिलेगा।

– आधा कप अनार का रस लें और उसमें चार चम्‍मच पपीते का रस मिलाकर पीने से आंव में काफ़ी लाभ होगा।

– पके केले के बीच कच्‍ची खांड़ खोंसकर खाने से लाभ होता है। एक बार में दो से अधिक केले न खाएं।

– रात को सोने से पहले दूध के साथ एक चम्‍मच ईसबगोल की भूसी लेने से सुबह पेट साफ़ हो जाता है।

क्‍या न खाएं

आंव पड़ने की स्थिति में बासी भोजन, मिर्च-मसाला, चना, मटर, बेसन, मैदा, आलू, गोभी, टमाटर, बैंगन, भिंडी, करेला, टिंडा आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके अलावा जो भी देर से पचने या गैस बनाने वाली चीज़ें हैं, उनसे परहेज़ करना चाहिए।