तेजपात एक ऐसा पत्‍ता है जो हर घर में मिल जाता है। मसाले में इसका प्रयोग होता है। इसे अंग्रेजी में Bay leaf कहते हैं। सब्ज़ी व दाल को यह स्‍वादिष्‍ट बनाने की क्षमता रखता है। लेकिन इसमें अनेक औषधीय गुण भी विद्यमान भी होते हैं। सर्दी-ज़ुक़ाम, नज़ला, खांसी, अतिसार, दमा सहित अनेक रोगों में यह अत्‍यंत लाभकारी है। आज हम तेजपत्ते के औषधीय गुणों की चर्चा करते हुए इसके प्रयोग पर भी चर्चा करेंगे। यह छोटा सा पत्‍ता आपकी कभी भी मदद कर सकता है।

हरी तेजपत्ता

तेजपात के स्वास्थ्य लाभ

जूं नाशक

तेजपात जूं नाशक हैं। इसके पांच-छह पत्‍ते लें और एक गिलास पानी में उबालना शुरू करें। जब पानी आधा बचे तो आग से उतार लें और ठंडा होने पर इससे सिर की मालिश करें। मालिश करने के कुछ देर बाद नहा लें। इससे सिर के जुएं तो मर ही जाते हैं और नए पनपने भी नहीं पाते। सिर के जुओं को ख़त्म करने का यह एक अचूक घरेलू उपाय है।

सर्दी-ज़ुक़ाम-सिरदर्द

यदि सर्दी-ज़ुक़ाम व सिरदर्द से पीड़ित हैं, लगातार छींकें आ रही हैं, नाक बह रही है और जलन हो रही है तो तेजपात या उसका चूर्ण डालकर चाय बनाएं। इसमें चाय पत्‍ती न डालें। पहले इसे पानी में उबाल लें और बाद में चीनी व दूध डालें। इसे चाय की तरह घूंट-घूंट कर पीयें। शीघ्र लाभ मिलेगा।

दमा व खांसी

दमा से परेशान हैं तो तेजपात, अदरक, पीपल व मिश्री समान मात्रा में लेकर चटनी पीस लें। एक-एक चम्‍मच यह चटनी चालीस दिन तक रोज़ खाएं। यह चटनी दमा के लिए अत्‍यंत गुणकारी है, लाभ सुनिश्चित है। पुराने से पुराने दमा में भी इससे आराम मिल जाता है। तेजपात का चूर्ण मधु के साथ खाने से खांसी चली जाती है। कुछ दिन तक नियमित यह पत्ते चूंसते रहने से हकलाहट में आराम मिलता है। हकलाहट ख़त्म करने के लिए इसके टुकड़ों को जीभ के नीचे दबा लें और चूसते रहें, एक माह में काफी आराम मिलेगा।

दांतों के रोग

तेजपात का बारीक़ चूर्ण बना लें। हफ़्ते में तीन दिन इस चूर्ण से मंजन करें। दांतों में कीड़े नहीं लगेंगे, दांत मजबूत होंगे, ठंडा-गरम नहीं लगेगा और दांत चमकने लगेंगे।

कपड़ों को सुरक्षित करे

यह कपड़ों को भी सुरक्षित रखने में मदद करता है। ऊनी, सूती या रेशमी किसी प्रकार के कपड़े हों, उनके बीच में तेजपात रख देने से कपड़ों में कीड़े नहीं लगेंगे। यदि अनाज में 4-5 पत्‍ते डाल दें तो वह भी कीड़ों से बच जाएगा और उसमें से अच्‍छी सुगंध निकलेगी।

दुर्गंध को ख़त्म करे

जिनके मोजों से दुर्गंध आए वे तेजपात का चूर्ण तलवे में मलकर मोजा पहनें। मुंह से दुर्गंध आती है तो तेजपात का टुकड़ा चबाया करें। पसीने के चलते बगल से दुर्गंध आती है तो तेजपत्ते का थोड़ा सा चूर्ण कांखों में लगा लें। दुर्गंध चली जाएगी।

सूखी तेजपत्ता

आंखों की रोशनी तेज़ करे

अगर आंखों की रोशनी कम हो रही है, कम दिख रहा है तो तेजपात का बारीक़ चूर्ण बनाएं और आंखों में सूरमा की तरह लगाएं। यह आंखों को साफ़ कर नसों में ताज़गी लाता है जिससे रोशनी बढ़ जाएगी। तेजपत्ते के नियमित प्रयोग से चश्‍मा भी उतर जाता है।

पेट के रोग

तेजपात के पत्‍ते का काढ़ा पीने से पेट के किसी भी तरह की बीमारी में लाभ होता है। दस्‍त, आंतों का घाव, भूख न लगना व गैस आदि में यह बहुत लाभकारी है। पेट में यदि गैस बन रही है और परेशान हैं तो सिर्फ़ तीन-चार चुटकी तेजपात का चूर्ण निगल कर पानी पी लें। तुरंत आराम मिलेगा। इसके नियमित सेवन से बहुत फ़ायदा होता है।

पागलपन

तेजपात का एक-एक ग्राम चूर्ण सुबह-शाम खिलाने से पागलपन ख़त्म होता है। चूर्ण पानी या मधु के साथ खिलाना चाहिए। इसके चूर्ण का हलवा भी फायदेमंद है, सूजी में एक चम्‍मच तेजपत्ते का चूर्ण मिलाकर हलवा बनाएं और रोगी को खिलाएं, यही इससे बना हलवा है।

कुछ अन्‍य प्रयोग

– पेट फूलने व अतिसार में तेजपात के पत्तों का काढ़ा लाभ पहुंचाता है।

– दो से चार ग्राम चूर्ण पानी के साथ लेने से उबकाई चली जाती है।

– नियमित भोजन में इसका प्रयोग से कभी हृदय रोग नहीं होंगे और हृदय मजबूत बना रहेगा।

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