नसों के खिंचाव व दर्द संबंधी समस्‍या का नाम सायटिका है। इस बीमारी में दर्द कमर से शुरू होकर टांग से होता हुआ पैरों तक चला जाता है। नितंब तंत्रिका को क्षति पहुंचने से इस दर्द की शुरुआत होती है। यदि समय से इलाज नहीं हुआ यह रोग उठने-बैठने लायक भी नहीं छोड़ता है। थोड़ा सा भी शरीर हिलता है तो करंट जैसा झटका लगकर तेज़ दर्द शुरू हो जाता है।

क्‍या है सायटिका

सायटिका एक नाड़ी है जो कमर की पांचवी हड्डी तथा पहली सेक्रम वट्रेब्रा के बीच से निकलकर पूरे पैर में नीचे तक जाती है। इस नाड़ी के तंतु जब दबने लगते हैं तो दर्द शुरू हो जाता है।

सायटिका का दर्द
Sciatica pain

सायटिका का कारण

इसका मूल कारण अनियमित जीवनशैली व उठने-बैठने के ग़लत तरीक़े हैं। यदि कमर में दर्द रहता है तो सा‍यटिका की आशंका ज़्यादा होती है। रीढ़ की हड्डी के हिस्‍सों की नसों में तनाव उत्‍पन्‍न होने पर दो तरह की स्थितियां पैदा होती हैं-

डिस्क हर्निएशन Disc herniation: सामान्‍यतया बोलचाल की भाषा में इसे स्लिप डिस्क ‌_ Slipped disc कहा जाता है। दर्द का यह सबसे बड़ा कारण है।

स्पाइनल स्टेनोसिस Spinal stenosis: यह समस्‍या ज़्यादातर लोगों में चोट लगने या पीठ पर ज़्यादा बोझ उठाने से पैदा होती है। बढ़ती उम्र के कारण भी यह समस्‍या हो सकती है।

घरेलू उपचार

यदि दर्द बहुत ज़्यादा न हो ख़ासकर शुरुआती दौर में तो दर्द की दवा कतई न खाएं। रोगी को लकड़ी के तख्‍त पर दो चार चार सप्‍ताह तक सीधा लिटाए रखें। दशमूल काढ़े से बना पिंड स्‍वेद या गर्म बालू या गर्म नमक की पोटली बनाकर रीढ़ की हड्डी की सेंकाई करें। पैर के तलवे की मालिश नहीं करनी चाहिए। कोशिश करें कि कब्‍ज़ न बनने पाए और पेट हमेशा साफ़ रहे। यदि कब्‍ज़ बने तो दूध में एरंड तेल डालकर सेवन करें।

सायटिका के लिए योगासन

सायटिका में योगासन से भी बहुत लाभ होता है। मकरासन, भुजंगासन, क्रीड़ासन, मत्‍स्‍यासन, वायुमुद्रा व वज्रासन का प्रयोग विशेष लाभकारी है। योगासन का प्रयोग किसी योगाचार्य के निर्देशन में ही करना चाहिए। इस रोग में एक्‍यूप्रेशर चिकित्‍सा पद्धति भी काफ़ी लाभ पहुंचाती है।

रसोन पाक अचूक औषधि

सामग्री

8 लीटर दूध, आधा किलो देशी घी, दो किलो मिश्री, 15 ग्राम रास्‍ना, 15 ग्राम शतावरी, 15 ग्राम बिदारीकंद, 15 ग्राम वायविडंग, 15 ग्राम चित्रक की जड़, 15 ग्राम अजवाइन, 15 ग्राम छोटी पीपल, 15 ग्राम सोंठ, 15 ग्राम गिलोय, 15 ग्राम लौंग, 15 ग्राम सोया, 15 ग्राम दालचीनी, 15 ग्राम इलाइची, 15 ग्राम तेजपत्ता, 15 ग्राम नागकेशर। इसके अलावा एक किलो लहसुन लें और उसका छिलका निकाल दें तथा आवश्‍यकतानुसार छाछ ले लें।

बनाने की विधि

रात भर छाछ में लहसुन को भिगो दें। सुबह लहसुन छाछ में से निकालकर पानी से धुल लें तथा मिक्‍सर में पीसकर चटनी बना लें। इस चटनी में आठ लीटर दूध मिलाकर पकाएं। दूध जब मावा जैसा गाढ़ा हो जाए तो इसमें आधा किलो देशी घी डालकर बड़े चम्‍मच से हिलाते हुए इसकी सेंकाई करें। अब इसमें दो किलो पिसी हुई मिश्री मिलाकर चम्‍मच से हिलाते रहें, जब रबड़ी जैसा हो जाए तो आग से उतार लें। ठंडा हो जाने पर इसमें शेष सभी सामग्री को बारीक़ पीसकर और छानकर मिला दें।

सेवन विधि

सुबह नाश्‍ते के साथ तथा रात में सोते समय गर्म दूध से 25 ग्राम रसोन पाक लेना चाहिए। दो माह तक नियमित सेवन तथा पूरी तरह आराम करने से सायटिका के दर्द से मुक्ति मिल जाती है।

एक उपचार मषादी मोदक भी

सामग्री

आधा किलो उड़द का आटा, आधा किलो देशी घी व 750 ग्राम मिश्री लें। इसके अलावा 15-15 ग्राम खरैटी, असगंध, अतिबला, पीतलबला, रास्ना, शतावरी, गिलोय, सहिजना की जड़, सहिजना का गोंद, बील की जड़ की छाल, अरणी, छोटी कटेरी, बड़ी कटेरी, श्योनाक के बीज व सोंठ लें। ध्‍यान रहे इन सबकी मात्रा 15-15 ग्राम ही होनी चाहिए।

बनाने की विधि

आग पर कड़ाही चढ़ाकर उसमें थोड़ा देशी घी डाल दें और उड़द का आटा डालकर धीमी आंच पर भूनें। अब थोड़े से घी में सहजने की गोंद को फुला लें तथा भूने हुए उड़द के आटे में अच्छी तरह मिला दें। इसके बाद शेष सभी चीज़ों को पीसकर तथा मिश्री को अलग पीसकर उसमें मिला दें। अब जो घी बचा हुआ है उसे भी गर्म करके इसमें मिला दें तथा 50-50 ग्राम के लड्डू बना लें और किसी साफ़-सुथरे बर्तन में इसे रख लें।

सेवन की विधि

सुबह नाश्‍ते के समय तथा रात को सोने से पहले एक लड्डू गर्म दूध के साथ लें। दवा शुरू करने के पूर्व यह सुनिश्चित कर लें कि आपको कब्‍ज़, गैस अफारा जैसी शिक़ायत तो नहीं है, यदि है तो पहले उसका इलाज करें। इस दौरान भोजन भी सुपाच्‍य लेना चाहिए। इसके सेवन से सायटिका से शीघ्र मुक्ति मिलती है।

Sciatica

दर्द निवारक लेप

चलते-चलते आपको एक चमत्‍कारी लेप के बारे में भी बता दें। इसका लेप करने से सायटिका के दर्द में अभूतपूर्व लाभ होता है।

कैसे बनाएं

रसौत, पुराना गुड़ व शुद्ध की हुई गूगल समान मात्रा में लें और इसमें अर्क लोबान मिलाकर घोंटे, घोंटने के बाद इसे हल्‍का गर्म कर लें। मरीज़ को तख्‍त पर उल्‍टा लिटा दें और उसके कमर पर इसका लेप करें। मरीज़ को वैसे ही लेटे रहने दें। जब लेप सूख जाए तो उसे उतार दें। इस लेप का एक से डेढ़ माह तक नियमित प्रयोग करने से सायटिका के दर्द में विशेष लाभ होता है।

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